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How To Make Alkaline Water: अमृत जल या सिर्फ एक ट्रेंड? घर पर एल्कलाइन वाटर बनाने की आसान विधि और इसके फायदों का सच

How To Make Alkaline Water: आजकल लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो रहे हैं और घरेलू उपायों की ओर रुख कर रहे हैं। एल्कलाइन वाटर एक ऐसा ट्रेंड है जो सामान्य पानी को विशेष बनाकर शरीर के लिए फायदेमंद बताता है। कई लोग इसे अमृत जल कहते हैं और दावा करते हैं कि इससे गट हेल्थ सुधरती है, एसिड रिफ्लक्स कम होता है और शरीर डिटॉक्स होता है। लेकिन क्या यह सच में इतना चमत्कारी है? आइए जानते हैं घर पर इसे कैसे बनाएं, क्या फायदे हैं और किन बातों का ध्यान रखें।

तांबे, चांदी और प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से कैसे तैयार करें ‘क्षारीय पानी’?

How To Make Alkaline Water
How To Make Alkaline Water

सामान्य RO पानी से एल्कलाइन वाटर बनाना आसान है। सबसे पहले एक मिट्टी का घड़ा या बर्तन लें। इसमें 3 से 4 गिलास पानी भरें। अब एक छोटा तांबे का लोटा या कटोरी और एक चांदी का सिक्का डालकर रात भर 15 से 18 घंटे के लिए छोड़ दें। इससे पानी में मिनरल्स, तांबे और चांदी के गुण आ जाते हैं, जो बैक्टीरिया को कम करते हैं।

फिर इस पानी को कांच के जग में निकालें। इसमें बिना छीले खीरे के 2 से 3 लंबे टुकड़े, कुछ पुदीने की पत्तियां, धनिया पत्ता, गाजर और चुकंदर के छोटे टुकड़े, नींबू या संतरे का एक टुकड़ा और थोड़ी हरी मिर्च या अदरक डालें। ढक्कन लगाकर 12 घंटे फ्रिज में रखें। यह पानी दिनभर पी सकते हैं। यह तरीका प्राकृतिक रूप से पानी को क्षारीय बनाता है और स्वाद भी ताजगी देता है।

पीएच लेवल का गणित और शरीर पर इसके प्रभाव का आधार

एल्कलाइन वाटर का पीएच 7 से अधिक होता है, जबकि सामान्य पानी का लगभग 7। यह पानी शरीर में एसिड को बैलेंस करने का दावा करता है। आयुर्वेद में तांबे के बर्तन में रखा पानी या प्राकृतिक मिनरल्स से युक्त जल को अमृत जल कहा जाता है, जो पाचन और डिटॉक्स के लिए उपयोगी माना जाता है। आधुनिक समय में लोग घरेलू सामग्री जैसे खीरा, नींबू, पुदीना से इन्फ्यूज्ड वाटर बनाते हैं।

यह ट्रेंड पिछले कुछ वर्षों में बढ़ा है, क्योंकि लोग एसिडिटी, गैस और पेट की समस्याओं से परेशान हैं। हालांकि वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि शरीर खुद अपना पीएच बैलेंस रखता है, खासकर खून का।

बेहतर पाचन और हाइड्रेशन के दावे, मगर अति से बचें

यह पानी पीने से कई लोगों को एसिडिटी और गैस में राहत मिलती है। खीरा, नींबू और पुदीना जैसे तत्व एंटीऑक्सिडेंट्स देते हैं, जो पाचन सुधारते हैं और त्वचा को फायदा पहुंचाते हैं। हाइड्रेशन बेहतर होता है, क्योंकि स्वादिष्ट होने से लोग ज्यादा पानी पीते हैं।

हजारों लोग रोजाना इसे अपनाते हैं और डिटॉक्स का अनुभव बताते हैं। लेकिन अगर ज्यादा मात्रा में पिया जाए तो पेट में दस्त या असंतुलन हो सकता है। विशेषकर किडनी या पेट की समस्या वाले सावधानी बरतें।

गंभीर बीमारियों के इलाज के दावों में कितनी है सच्चाई?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार एल्कलाइन वाटर से एसिड रिफ्लक्स में कुछ राहत मिल सकती है, क्योंकि यह एसिड को न्यूट्रलाइज करता है। लेकिन बड़े अध्ययन जैसे हार्वर्ड हेल्थ और मेयो क्लिनिक बताते हैं कि सामान्य पानी से बेहतर होने का मजबूत प्रमाण नहीं है। शरीर का पीएच किडनी और फेफड़े नियंत्रित करते हैं, पानी से ज्यादा बदलाव नहीं आता।

आयुर्वेदिक डॉक्टर मनीष आचार्य जैसे विशेषज्ञ इसे गट हेल्थ और डिटॉक्स के लिए फायदेमंद बताते हैं, लेकिन कैंसर, ट्यूमर या गांठ खत्म करने के दावे वैज्ञानिक प्रमाणों से समर्थित नहीं हैं। कई रिसर्च में कहा गया है कि कैंसर सेल्स एसिडिक वातावरण में पनपते हैं, लेकिन पानी पीने से शरीर का पीएच नहीं बदलता। अधिक क्षारीय पानी से पेट की समस्या या मिनरल असंतुलन हो सकता है।

सावधानी और डॉक्टरी परामर्श है अनिवार्य

घर पर बनाएं तो ताजी सामग्री इस्तेमाल करें और ज्यादा समय न रखें, वरना बैक्टीरिया बढ़ सकते हैं। रोजाना 2 से 3 लीटर से ज्यादा न पिएं। अगर कोई बीमारी है तो डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट से पूछें।

यह पानी सामान्य पानी का अच्छा विकल्प हो सकता है, लेकिन कोई जादुई इलाज नहीं। संतुलित आहार, व्यायाम और पर्याप्त नींद ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

How To Make Alkaline Water: निष्कर्ष

एल्कलाइन वाटर घर पर बनाना आसान और ताजगी भरा तरीका है, जो पाचन सुधार सकता है और हाइड्रेशन बढ़ा सकता है। आयुर्वेदिक परंपरा में इसका महत्व है, लेकिन वैज्ञानिक दुनिया में बड़े दावों के लिए मजबूत प्रमाण नहीं हैं। इसे संतुलित जीवनशैली का हिस्सा बनाएं, न कि एकमात्र इलाज। स्वास्थ्य के लिए सबसे अच्छा है प्राकृतिक, साफ पानी ज्यादा पीना और डॉक्टर की सलाह मानना। इससे शरीर स्वस्थ रहेगा और छोटी-मोटी समस्याएं दूर होंगी।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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