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लाल चंदन तस्करी पर डीआरआई की बड़ी करवाई – 15 टन माल ज़ब्त, 6.26 करोड़ का नुकसान तस्करों को

वाराणसी -राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने लाल चंदन की तस्करी के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है। अधिकारियों ने चेन्नई और उसके आसपास के इलाकों से करीब 15 टन लाल चंदन जब्त किया, जिसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग 6.26 करोड़ रुपये है। इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई दिसंबर महीने में की गई, जो तस्करों के लिए बड़ा झटका साबित हुई।

खुफिया जानकारी पर हुई कार्रवाई

डीआरआई को विश्वसनीय सूचना मिली थी कि चेन्नई के गोदामों में लाल चंदन छिपाकर रखा गया है। तस्कर इसे दिल्ली के रास्ते विदेश निर्यात करने की योजना बना रहे थे। सूचना के आधार पर डीआरआई की टीम ने 9 दिसंबर से 12 दिसंबर तक तीन अलग-अलग जगहों पर छापेमारी की।

एक गोदाम से 5.55 टन उच्च गुणवत्ता वाले लाल चंदन के 169 लट्ठे बरामद हुए। इनमें से कई लट्ठे पैकिंग करके ट्रक में लोड करने के लिए तैयार थे। तस्कर इसे घरेलू सामान के नाम पर छिपाकर भेजने वाले थे। बाकी दो गोदामों से 9.55 टन लाल चंदन मिला, जो लट्ठों, जड़ों और फर्नीचर के रूप में था। कुल मिलाकर 15 टन लाल चंदन जब्त किया गया।

चार तस्कर गिरफ्तार, मुख्य सरगना भी शामिल

इस ऑपरेशन में चार लोगों को पकड़ा गया। इनमें मुख्य सरगना, उसके दो साथी जो पैकिंग और ट्रांसपोर्ट का काम देखते थे, और सप्लायर का एक बिचौलिया शामिल है। पूछताछ में पता चला कि यह एक संगठित गिरोह था, जो लंबे समय से लाल चंदन की तस्करी कर रहा था। जांच अभी जारी है और और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

लाल चंदन क्या है और क्यों इतना कीमती?

लाल चंदन एक दुर्लभ पेड़ है, जिसका वैज्ञानिक नाम Pterocarpus santalinus है। यह मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के जंगलों में पाया जाता है। इसकी लकड़ी लाल रंग की होती है और बहुत मजबूत होती है। में इसका इस्तेमाल दवाइयों, सौंदर्य प्रसाधनों, फर्नीचर और संगीत वाद्ययंत्र बनाने में होता है। चीन और अन्य एशियाई देशों में इसकी बहुत मांग है, इसलिए तस्कर इसे लाखों-करोड़ों में बेचते हैं।लेकिन लाल चंदन संरक्षित है। यह CITES के ऐपेंडिक्स-II में सूचीबद्ध है और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-IV में आता है। विदेश व्यापार नीति के तहत इसका निर्यात प्रतिबंधित या पूरी तरह है। बिना अनुमति काटना, रखना या बेचना गैरकानूनी है।

तस्करी का तरीका कैसे होता है?

तस्कर जंगलों से लाल चंदन काटकर छिपाते हैं। फिर इसे गोदामों में स्टोर करके दूसरे सामान के बीच छिपाकर विदेश भेजते हैं। कभी घरेलू सामान, कभी ग्रेनाइट या अन्य चीजों की आड़ में। चेन्नई जैसे बंदरगाह शहर तस्करी के लिए आसान होते हैं। कई बार दिल्ली या अन्य शहरों से होते हुए निर्यात किया जाता है। यह न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि देश की जैव विविधता को भी खतरे में डालता है।

डीआरआई की भूमिका और अन्य कार्रवाइयां

डीआरआई देश की आर्थिक सुरक्षा की रक्षा करती है। यह तस्करी रोकने के लिए लगातार ऑपरेशन चलाती है। हाल ही में भी डीआरआई ने महाराष्ट्र में ड्रग्स की फैक्ट्री पकड़ी थी। लाल चंदन की तस्करी पर भी नजर रखी जा रही है। पिछले कुछ सालों में डीआरआई ने सैकड़ों टन लाल चंदन जब्त किया है।

निष्कर्ष: सख्त कार्रवाई जरूरी

यह कार्रवाई दिखाती है कि डीआरआई कितनी सतर्क है। लाल चंदन की तस्करी रोकना जरूरी है, क्योंकि इससे जंगल खत्म हो रहे हैं और दुर्लभ प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर हैं। तस्करों को सजा मिलनी चाहिए ताकि दूसरों को सबक मिले। सरकार और एजेंसियां मिलकर ऐसे रैकेट को पूरी तरह खत्म करने की कोशिश कर रही हैं। इससे न सिर्फ पर्यावरण बचेगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। उम्मीद है कि ऐसी कार्रवाइयां जारी रहेंगी और तस्करी पर लगाम लगेगी।

PRAGATI DIXIT
Author: PRAGATI DIXIT

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