Delhi Fire News: दिल्ली के पालम इलाके से बुधवार की सुबह एक दिल दहला देने वाली खबर आई। साध नगर इलाके में एक पांच मंजिला इमारत में भीषण आग लग गई और इस हादसे में 7 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई। मरने वालों में तीन मासूम बच्चे भी शामिल हैं जिनकी उम्र 12 साल से भी कम थी। दो लोगों ने जान बचाने के लिए इमारत से छलांग लगाई लेकिन वे गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया।
यह हादसा तब हुआ जब सुबह का वक्त था और इमारत में रहने वाले परिवार के लोग सोए हुए थे। आग इतनी तेजी से फैली कि अंदर फंसे लोगों को बाहर निकलने का कोई मौका ही नहीं मिला। घने धुएं और आग की लपटों ने रास्ता बंद कर दिया और तब तक बहुत देर हो चुकी थी। दिल्ली अग्निशमन सेवा को सूचना मिलते ही 30 दमकल गाड़ियां मौके पर भेजी गईं और दिल्ली पुलिस की टीमें भी राहत और बचाव में जुट गईं।
सुबह 7 बजे लगी आग, धुएं में घिरे लोगों को नहीं मिला बाहर निकलने का रास्ता

दिल्ली अग्निशमन सेवा यानी DFS को सुबह करीब 7 बजे पालम के साध नगर इलाके में एक आवासीय इमारत में आग लगने की सूचना मिली। DFS के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जैसे ही कॉल आई तुरंत गाड़ियां रवाना कर दी गईं क्योंकि शुरुआती जानकारी में ही आशंका थी कि कुछ लोग इमारत के अंदर फंसे हो सकते हैं।
मौके पर पहुंचे दमकलकर्मियों ने देखा कि पूरी इमारत में आग और धुआं फैल चुका था। दो लोगों ने जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिल से नीचे छलांग लगाई। वे बच तो गए लेकिन चोटें गंभीर थीं। वहीं इमारत के अंदर फंसे बाकी लोगों को धुएं और लपटों की वजह से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला। आग बुझने के बाद जब दमकलकर्मी अंदर पहुंचे तो उन्हें 7 शव मिले जिनमें से 3 बच्चों के थे।
आग लगने की वजह का अभी तक आधिकारिक रूप से पता नहीं चल पाया है। पुलिस और फायर विभाग दोनों मिलकर जांच में जुटे हैं। शुरुआती अनुमान शॉर्ट-सर्किट की तरफ जा रहे हैं लेकिन जांच पूरी होने के बाद ही असली कारण सामने आएगा।
नीचे थीं कपड़े और कॉस्मेटिक की दुकानें, ऊपर रहता था परिवार
इस इमारत की बनावट इस हादसे को और भी गंभीर बनाने वाली साबित हुई। इमारत में एक बेसमेंट था और उसके ऊपर ग्राउंड फ्लोर सहित कुल चार मंजिलें थीं। छत पर एक टीन का शेड भी था।
बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और पहली मंजिल पर कपड़ों और कॉस्मेटिक सामान की दुकानें थीं। चूंकि सुबह का वक्त था इसलिए दुकानें बंद थीं और दुकानदार मौजूद नहीं थे। दूसरी और तीसरी मंजिल पर परिवार रहता था और वे लोग सो रहे थे।
कपड़ों और कॉस्मेटिक सामान की दुकानें आग के लिए बेहद आसान ईंधन का काम करती हैं। ऐसे सामान में आग बहुत जल्दी पकड़ती है और तेजी से फैलती है। माना जा रहा है कि नीचे की दुकानों से शुरू हुई आग ने बहुत कम वक्त में पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। ऊपर सोए परिवार के लोगों को जब तक होश आया तब तक नीचे उतरने का रास्ता बंद हो चुका था।
अग्नि सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक मिक्स्ड यूज इमारतें यानी वो बिल्डिंग जिनमें नीचे दुकानें और ऊपर घर हों, आग के मामले में सबसे ज्यादा खतरनाक होती हैं। ऐसी इमारतों में फायर एग्जिट, स्मोक डिटेक्टर और फायर सेफ्टी ऑडिट की सख्त जरूरत होती है लेकिन दिल्ली के पुराने और घनी आबादी वाले इलाकों में ये इंतजाम अक्सर नदारद होते हैं।
नहीं बच सकी 7 जिंदगियां
इस हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली अग्निशमन सेवा ने 30 दमकल गाड़ियां मौके पर भेजीं। दिल्ली पुलिस की टीमें और अन्य आपातकालीन सेवाएं भी तुरंत मौके पर पहुंचीं। यह इस बात का सबूत है कि प्रशासन ने तेजी से प्रतिक्रिया दी।
लेकिन इतने बड़े बचाव अभियान के बावजूद 7 लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी। यह सवाल उठाता है कि क्या अगर इमारत में फायर अलार्म या स्मोक डिटेक्टर होता तो थोड़ा पहले अलर्ट मिल सकता था। क्या अगर इमारत में इमरजेंसी एग्जिट होता तो अंदर फंसे लोग बाहर निकल सकते थे। इन सवालों का जवाब जांच में निकलेगा लेकिन यह हादसा एक बार फिर दिल्ली की पुरानी इमारतों में फायर सेफ्टी के मानकों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
पालम का साध नगर इलाका घनी आबादी वाला है। यहां पुरानी इमारतें हैं और गलियां संकरी हैं। ऐसे इलाकों में दमकल गाड़ियों को मौके तक पहुंचने में भी वक्त लगता है और बचाव कार्य मुश्किल हो जाता है। दो घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत की जानकारी अभी आनी बाकी है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आग लगने के कारणों की जांच जारी है। यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि घर हो या दुकान, फायर सेफ्टी के उपाय जिंदगी और मौत का फर्क कर सकते हैं।



