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सनातन समाज के शौर्य का प्रतीक दिवस है गीता जयंती: डॉ वीरेंद्र साहू

रांची : नेताजी एकेडमी उच्च विद्यालय, होचर, कांके रांची परिसर में आज पूर्वाहन 8:30 बजे गीता जयंती के पावन दिवस पर प्रधानाचार्य डॉ वीरेंद्र साहू, विद्यालय के शिक्षक – शिक्षिकागणों एवं बच्चों के द्वारा श्रीमद्भागवतगीता जी का पूजन-अर्चन कर आरती उतारी गई।
इस अवसर पर प्रधानाचार्य डॉ वीरेंद्र साहू ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि द्वापर युग में श्रीमद्भागवत गीता समस्त मानव के जीवन जीने के वास्तविक संदर्भ को भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं कुरुक्षेत्र के मध्य खड़ा होकर अपने विराट स्वरूप को प्रकट करते हुए अर्जुन को बतलाया है कि “कर्म करते जा, फल की चिंता न कर”। जब-जब धर्म की हानि होती है, अधम- अभिमानी बढ़ते हैं, तब -तब भगवान स्वयं मानव का रूप धारण करके विधर्मियों का नाश करते हैं। उन्होंने कहा वर्तमान में गीता जयंती का महत्व भगवान पुरुषोत्तम श्रीरामजी से भी जुड़ा हुआ है। 1992 में गीता जयंती तदनुसार 6 दिसंबर को समस्त हिंदू जनमानस के प्राण श्रीराम के जन्मस्थली पर खड़ा विवादित ढांचा को हटाकर पुण: भगवान पुरुषोत्तम श्रीरामलला जी को प्रतिस्थापित किया गया था। आज उसी स्थल पर 22 जनवरी, 2024 को नूतन भव्य मंदिर में भगवान पुरुषोत्तम श्रीराम लला जी का पुनर्स्थापना किया गया जो सनातन समाज का शौर्य का प्रतीक है।

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