Gold-Silver Price: पिछले कुछ महीनों में सोने और चांदी की कीमतों ने जो उछाल देखा है उसने निवेशकों का ध्यान एक बार फिर इन कीमती धातुओं की तरफ खींचा है। एक तरफ जहां शेयर बाजार में अस्थिरता बनी हुई है, वहीं सोना और चांदी स्थिर और भरोसेमंद निवेश के रूप में उभर रहे हैं। ऐसे में हर निवेशक के मन में एक ही सवाल है कि क्या अभी इनमें पैसा लगाना सही रहेगा या थोड़ा और इंतजार करना बेहतर होगा।
इतिहास इस बारे में बहुत कुछ बताता है। 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी के दौरान जब दुनिया भर के शेयर बाजार धराशायी हो रहे थे, सोना निवेशकों के लिए रक्षा कवच बना रहा। कोविड-19 के संकट में भी यही हुआ। इसीलिए अर्थशास्त्री और बाजार विशेषज्ञ सोने को सेफ हेवन एसेट यानी सुरक्षित ठिकाना कहते हैं।
सोने की कीमत कहां तक जाएगी?

बाजार विशेषज्ञों का अनुमान उत्साहजनक है। उनके मुताबिक 2026 के अंत तक सोना 1 लाख 75 हजार रुपये से लेकर 2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है। इसके पीछे कई मजबूत कारण हैं। दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता घटाने के लिए अपने स्वर्ण भंडार लगातार बढ़ा रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक भी इसी दिशा में सक्रिय है। जब संस्थागत स्तर पर इतनी बड़ी खरीद होती है तो कीमतों को स्वाभाविक रूप से मजबूत समर्थन मिलता है। इसके साथ ही ईरान-अमेरिका तनाव, रूस-यूक्रेन संघर्ष और व्यापार युद्ध की आशंकाएं निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर धकेल रही हैं।
चांदी क्यों है दोहरे फायदे का सौदा?
चांदी की बात करें तो यह एक अनोखी धातु है जो दो अलग-अलग मोर्चों पर काम करती है। पहला मोर्चा है निवेश का, जहां यह सोने की तरह आर्थिक संकट में सुरक्षा प्रदान करती है। दूसरा और ज्यादा रोमांचक मोर्चा है औद्योगिक उपयोग का।
आज की दुनिया में चांदी की औद्योगिक मांग बेतहाशा बढ़ रही है। सौर ऊर्जा पैनल बनाने में चांदी एक अनिवार्य घटक है। इलेक्ट्रिक वाहनों में भी इसका भरपूर उपयोग होता है। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, चिकित्सा उपकरण और डिजिटल बुनियादी ढांचे में भी चांदी की मांग लगातार बढ़ रही है। इन्हीं कारणों से विशेषज्ञ मानते हैं कि 2026 में चांदी 2 लाख 75 हजार से 3 लाख 50 हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक जा सकती है। हालांकि इसमें उतार-चढ़ाव सोने से अधिक रहता है इसलिए थोड़ी सावधानी जरूरी है।
निवेश की सही रणनीति क्या हो?
स्टॉकिफाई के संस्थापक और CEO पीयूष झुनझुनवाला कहते हैं कि निवेश का फैसला हमेशा अपने लक्ष्य और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखकर करना चाहिए। जो निवेशक अपनी पूंजी को सुरक्षित रखना चाहते हैं और बाजार की गिरावट से बचाव चाहते हैं, उन्हें अपने कुल पोर्टफोलियो का 5 से 15 प्रतिशत हिस्सा सोने में रखना चाहिए। वहीं जो निवेशक अधिक रिटर्न की उम्मीद में थोड़ा जोखिम उठाने को तैयार हैं, वे चांदी में अवसर तलाश सकते हैं। एकमुश्त निवेश की बजाय SIP यानी व्यवस्थित निवेश योजना के जरिए चरणबद्ध तरीके से निवेश करना ज्यादा समझदारी है क्योंकि इससे बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम होता है।
Gold-Silver Price: निवेश के कौन से रास्ते हैं उपलब्ध?
सोने और चांदी में निवेश के लिए आज कई विकल्प उपलब्ध हैं।
-
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB): सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है क्योंकि इसमें कीमत बढ़ने का फायदा तो मिलता ही है साथ में सालाना ब्याज भी मिलता है।
-
ETF (Gold/Silver): इसके जरिए आप शेयर बाजार में सोने-चांदी में निवेश कर सकते हैं जो पूरी तरह पारदर्शी है।
-
डिजिटल गोल्ड/सिल्वर: इसमें बेहद छोटी राशि से शुरुआत की जा सकती है।
-
भौतिक रूप (Physical Gold): और अगर पारंपरिक तरीका पसंद हो तो सिक्के या बार के रूप में असली सोना-चांदी खरीदना भी एक विकल्प है।
कुल मिलाकर विशेषज्ञों की राय यही है कि मौजूदा माहौल में सोना और चांदी दोनों आकर्षक निवेश हैं और सही रणनीति के साथ इनमें पैसा लगाना दीर्घकाल में फायदेमंद साबित हो सकता है।



