Health News: सोते समय खर्राटे लेना बहुत लोगों में देखा जाता है। ज्यादातर लोग इसे सामान्य मानकर अनदेखा कर देते हैं। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि हर खर्राटा सामान्य नहीं होता। कुछ मामलों में खर्राटे किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं। खर्राटों के साथ अगर कुछ खास लक्षण भी दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलना जरूरी है। इस लेख में हम जानेंगे कि खर्राटे लेना कब खतरनाक हो सकता है और किन पांच संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
Health News: खर्राटे लेना कब बन जाता है चिंता की बात
रात को सोते समय खर्राटे आना एक बहुत आम समस्या है। हर उम्र के लोगों में यह देखी जाती है। कभी-कभी थकान, सर्दी या गलत तरीके से सोने की वजह से भी खर्राटे आ सकते हैं। ऐसे मामलों में कोई खास चिंता नहीं होती। लेकिन जब खर्राटे रोज रात आते हों, बहुत तेज आवाज में हों और उनके साथ दूसरे लक्षण भी हों तो यह किसी बीमारी का इशारा हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे खर्राटे अक्सर स्लीप एपनिया नामक बीमारी से जुड़े होते हैं। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें नींद के दौरान सांस लेने में बाधा आती है। स्लीप एपनिया को अगर समय पर पहचाना न जाए तो यह दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर और दूसरी गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकता है। इसलिए जरूरी है कि खर्राटों के साथ आने वाले इन पांच संकेतों पर ध्यान दिया जाए।
पहला संकेत: रोज रात बहुत तेज खर्राटे आना
अगर किसी को हर रात बहुत तेज आवाज में खर्राटे आते हैं तो यह पहला और सबसे अहम चेतावनी संकेत है। यह बताता है कि नींद के दौरान सांस की नली आंशिक रूप से बंद हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार और तेज खर्राटे अक्सर ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया की निशानी होते हैं। इस बीमारी में गले की मांसपेशियां नींद के दौरान ढीली पड़ जाती हैं जिससे सांस की नली संकरी हो जाती है। हवा इस संकरी नली से गुजरती है तो आवाज पैदा होती है, जिसे हम खर्राटे कहते हैं। अगर घर में किसी के खर्राटों की आवाज से दूसरे लोगों की नींद टूट जाती हो तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए और डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
दूसरा संकेत: सोते समय सांस का रुकना या हांफना

यह सबसे गंभीर संकेत है। अगर कोई व्यक्ति सोते समय अचानक हांफने लगे या उसकी सांस कुछ पलों के लिए रुक जाए तो यह स्लीप एपनिया की साफ निशानी है। इस स्थिति में शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। ऑक्सीजन कम होते ही दिमाग शरीर को जगाने का संकेत देता है और व्यक्ति हांफते हुए उठ जाता है। यह क्रिया रात में कई बार हो सकती है। अक्सर इसका पता खुद मरीज को नहीं होता बल्कि उसके साथ सोने वाला दूसरा व्यक्ति इस बात को नोटिस करता है। अगर किसी ने आपको बताया है कि आप सोते समय सांस रोकते हैं या अचानक हांफते हैं तो बिना देरी किए डॉक्टर से मिलें।
तीसरा संकेत: रात भर सोने के बाद भी दिनभर थकान
आमतौर पर 7 से 8 घंटे की नींद के बाद इंसान तरोताजा महसूस करता है। लेकिन अगर पूरी रात सोने के बाद भी सुबह थकान लगे और दिनभर नींद आती रहे तो यह एक चेतावनी है। स्लीप एपनिया में व्यक्ति रात भर कई बार जागता है, भले ही उसे इसका एहसास न हो। इस वजह से नींद का गहरा और आरामदेह चरण पूरा नहीं हो पाता। नींद टूटती रहती है और शरीर को पूरा आराम नहीं मिलता। इसका असर दिनभर की कार्यक्षमता पर पड़ता है। काम में ध्यान नहीं लगता, मूड खराब रहता है और थकान बनी रहती है। गाड़ी चलाते समय या काम के दौरान अचानक नींद आना भी खतरनाक हो सकता है।
Health News: दिनभर थकान को न समझें सिर्फ काम का बोझ
अगर आपको लगातार कई दिनों से बिना किसी खास वजह के थकान हो रही है और रात की पूरी नींद भी राहत नहीं दे रही तो इसे सिर्फ काम के बोझ का नतीजा न मानें। यह खर्राटों से जुड़ी नींद की समस्या भी हो सकती है।
चौथा संकेत: सुबह उठते ही सिरदर्द या मुंह का सूखना
बहुत से लोगों को सुबह उठने पर सिर भारी लगता है या सिरदर्द होता है। कुछ लोगों को मुंह बहुत सूखा महसूस होता है। इन लक्षणों को अक्सर थकान या कम पानी पीने का नतीजा मानकर छोड़ दिया जाता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये लक्षण स्लीप एपनिया के मरीजों में बहुत आम हैं। रात के दौरान बार-बार सांस रुकने से शरीर में ऑक्सीजन की कमी होती है। इस वजह से सुबह उठने पर सिरदर्द होता है। इसके अलावा जो लोग रात में मुंह से सांस लेते हैं उनका मुंह सुबह तक सूख जाता है। यह भी खर्राटों और स्लीप एपनिया से जुड़ा एक संकेत है।
मुंह सूखने को न मानें सामान्य
अगर रोज सुबह मुंह सूखा मिले और यह पानी पीने के बाद भी बार-बार हो तो डॉक्टर से इस बारे में बात जरूर करें। यह सिर्फ पानी कम पीने की बात नहीं, बल्कि नींद से जुड़ी किसी समस्या का इशारा भी हो सकता है।
पांचवां संकेत: हाई ब्लड प्रेशर या दिल से जुड़ी परेशानी
डॉक्टरों का कहना है कि खर्राटे लेना सिर्फ नींद की समस्या नहीं है। अगर लंबे समय तक इसे अनदेखा किया जाए तो यह दिल और रक्तचाप से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ा सकता है।
कुछ शोधों में पाया गया है कि स्लीप एपनिया की स्थिति में शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बार-बार कम होता है। इससे रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ता है। यह हाई ब्लड प्रेशर की एक बड़ी वजह बन सकता है।
लंबे समय तक इस स्थिति में रहने से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए जिन लोगों को पहले से हाई ब्लड प्रेशर है और खर्राटे भी आते हैं, उन्हें तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।
Health News: खर्राटे की समस्या में डॉक्टर से कब मिलें
अगर ऊपर बताए गए पांचों में से कोई भी एक संकेत नजर आए तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। और अगर एक साथ कई लक्षण हों तो बिल्कुल देर नहीं करनी चाहिए।
डॉक्टर जांच के बाद स्लीप स्टडी करवाने की सलाह दे सकते हैं। इस जांच में यह पता लगाया जाता है कि नींद के दौरान सांस कितनी बार रुकती है और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर क्या रहता है।
अगर स्लीप एपनिया की पुष्टि हो जाए तो इसका इलाज संभव है। सही समय पर इलाज लेने से नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है और दिल तथा दिमाग दोनों स्वस्थ रहते हैं।
खर्राटे कम करने के लिए क्या करें
खर्राटों की समस्या को कुछ हद तक जीवनशैली में बदलाव करके भी कम किया जा सकता है। सोने का सही तरीका अपनाएं। करवट लेकर सोने से खर्राटे कम हो सकते हैं। वजन ज्यादा हो तो उसे नियंत्रित करें क्योंकि मोटापा खर्राटों की एक बड़ी वजह होती है।
रात को शराब न पीएं। धूम्रपान से बचें। सोने से पहले भारी खाना न खाएं। नाक बंद होने पर उसका इलाज करवाएं। ये छोटे-छोटे बदलाव खर्राटों को कम करने में मदद कर सकते हैं।
लेकिन ध्यान रखें कि ये बदलाव केवल हल्के खर्राटों में फायदा कर सकते हैं। अगर खर्राटे तेज हों और ऊपर बताए संकेत भी हों तो डॉक्टरी सलाह जरूरी है।
निष्कर्ष: खर्राटों को हल्के में न लें
खर्राटे लेना एक आम समस्या जरूर है लेकिन यह हमेशा सामान्य नहीं होती। रोज रात तेज खर्राटे आना, सोते समय सांस रुकना, दिनभर थकान, सुबह सिरदर्द और हाई ब्लड प्रेशर ये पांचों संकेत बताते हैं कि खर्राटे खतरनाक स्तर पर पहुंच चुके हैं।
इन संकेतों को अनदेखा करना सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। जितनी जल्दी इस समस्या की पहचान होगी उतनी जल्दी इलाज मिल सकेगा। इसलिए खुद पर और अपने परिवार के लोगों पर ध्यान दें। अगर इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो आज ही डॉक्टर से मिलने का समय लें।



