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दुनिया का सबसे ठंडा शहर: -45 डिग्री में सांस जम जाती है, लेकिन यहां के लोग हार नहीं मानते!

डेस्क – रूस के साइबेरिया क्षेत्र में बसा याकुत्स्क शहर दुनिया का सबसे ठंडा बड़ा शहर माना जाता है। यहां की आबादी करीब 3.5 लाख है और सर्दियों में तापमान अक्सर -40°C से नीचे चला जाता है। दिसंबर 2025 में तापमान -45°C तक गिर गया, जिससे बाहर की हवा इतनी ठंडी हो गई कि बिना तैयारी के कुछ मिनटों में ही इंसान का शरीर जम सकता है। स्थानीय लोग चेतावनी देते हैं कि थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा हो सकती है। फिर भी यहां की जिंदगी रुकती नहीं है। लोग कैसे जीते हैं, आइए जानते हैं।

याकुत्स्क: ठंड का साम्राज्य

याकुत्स्क रूस के साखा गणराज्य की राजधानी है। यह शहर लेना नदी के किनारे बसा है और आर्कटिक सर्कल से सिर्फ 450 किलोमीटर दूर है। यहां का मौसम बेहद कठोर है। सर्दियों में औसत तापमान -38°C से -40°C रहता है, जबकि सबसे कम तापमान -64°C तक दर्ज हो चुका है। दिसंबर में दिन छोटे होते हैं, सिर्फ 4-5 घंटे की रोशनी मिलती है। ठंड के कारण हवा में नमी जमकर कोहरा बन जाता है, जिसे ‘आइस फॉग’ कहते हैं। बाहर निकलते ही सांस लेना मुश्किल हो जाता है और पलकें जम जाती हैं।

-45°C में बाहर निकलना: जान जोखिम मेंImage result for याकुत्स्क की ठंड दुनिया में अनोखी है

इस ठंड में बाहर निकलना आसान नहीं। स्थानीय लोग बताते हैं कि अगर ठीक से कपड़े न पहने हों तो कुछ मिनटों में फ्रॉस्टबाइट हो सकता है – यानी त्वचा जमकर काली पड़ जाती है। आंखें, नाक और हाथ-पैर सबसे ज्यादा खतरे में रहते हैं। कारें शुरू करने में घंटों लग जाते हैं, क्योंकि इंजन जम जाता है। लोग इंजन हीटर का इस्तेमाल करते हैं या गाड़ी को गर्म जगह पर रखते हैं। स्कूल तब बंद होते हैं जब तापमान -50°C से नीचे चला जाए। बच्चों को भी ठंड की आदत डालनी पड़ती है।

कपड़ों की कई परतें: ठंड से बचाव का हथियार

यहां के लोग ठंड से बचने के लिए कई परतें कपड़े पहनते हैं। अंदर थर्मल, फिर ऊनी स्वेटर, फिर मोटा जैकेट और सबसे ऊपर फर वाला कोट। सिर पर फर की टोपी, हाथों में मोटे दस्ताने और पैरों में विशेष बूट्स। महिलाएं भी लंबे फर कोट पहनती हैं। ये कपड़े ज्यादातर जानवरों की खाल से बने होते हैं, जैसे रेनडियर या भेड़ की। एक स्थानीय महिला ने कहा, “हम कई स्कार्फ और जैकेट पहनते हैं। हवा न चले तो ठंड सहन हो जाती है, लेकिन तेज हवा में बाहर निकलना मुश्किल है।”

घर और इंफ्रास्ट्रक्चर: ठंड के लिए तैयार

याकुत्स्क की सारी इमारतें ठंड को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं। घरों में सेंट्रल हीटिंग सिस्टम होता है, जो कोयले या गैस से चलता है। अंदर का तापमान हमेशा 20-25°C रखा जाता है। घर परमानेंट फ्रॉस्ट (हमेशा जमी मिट्टी) पर बने हैं, इसलिए नींव को विशेष तरीके से बनाया जाता है ताकि इमारत धंस न जाए। पानी की पाइपें जमने से बचाने के लिए उन्हें गर्म रखा जाता है। बाजार, स्कूल और ऑफिस सब अंदर ही हैं, ताकि लोग ज्यादा बाहर न निकलें।

खान-पान और रोजमर्रा की जिंदगी

ठंड में शरीर को गर्म रखने के लिए लोग मोटा और गर्म खाना खाते हैं। मांस, मछली, सूप और चाय बहुत पी जाती है। यहां की मछलियां ताजी पकड़ी जाती हैं और ठंड में तुरंत जम जाती हैं, जिसे काटकर खाया जाता है। लोग चाय या गर्म सूप से दिन शुरू करते हैं। काम पर जाने के लिए ज्यादातर कार या बस का इस्तेमाल होता है। बाजार में ताजी सब्जियां कम मिलती हैं, इसलिए ज्यादातर imported या संरक्षित भोजन होता है। गर्मियों में तापमान 30°C तक चला जाता है, तब लोग नदी में नहाते और सब्जियां उगाते हैं।

चुनौतियां और अनुकूलन

ठंड के कारण कई समस्याएं हैं। कार का ईंधन जम जाता है, चश्मा पहनने वालों की पलकें चश्मे से चिपक जाती हैं। बाहर फोन इस्तेमाल करना मुश्किल, क्योंकि बैटरी तुरंत खत्म हो जाती है। लेकिन लोग इन सबकी आदत डाल चुके हैं। यहां हीरा और कोयला खदानें हैं, इसलिए नौकरियां अच्छी हैं और लोग अमीर भी हैं। कई लोग कहते हैं कि ठंड उन्हें मजबूत बनाती है।

निष्कर्ष :

याकुत्स्क की ठंड दुनिया में अनोखी है, जहां -45°C आम बात है और इंसान मिनटों में जम सकता है। लेकिन यहां के लोग अपनी समझदारी, विशेष कपड़ों, गर्म घरों और अनुकूलन से जिंदगी को सामान्य बनाए रखते हैं। यह शहर साबित करता है कि इंसान कितनी भी कठिन परिस्थितियों में जी सकता है। ठंड यहां चुनौती है, लेकिन लोग इसे अपनी जिंदगी का हिस्सा मानकर खुश रहते हैं। अगर आप कभी यहां जाएं, तो अच्छे से तैयारी करें – वरना ठंड आपका स्वागत ऐसे करेगी कि भूल न पाएं!

PRAGATI DIXIT
Author: PRAGATI DIXIT

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