Top 5 This Week

Related Posts

India China Relations: इंडो-पैसिफिक में बढ़ी कूटनीतिक हलचल, क्या भारत की नई रणनीति से बढ़ेगी चीन की मुश्किलें?

India China Relations: पिछले कुछ हफ्तों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं और उनके द्वारा किए गए राजनयिक समझौतों ने वैश्विक राजनीति के जानकारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। सेशेल्स से लेकर इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड तक की यह यात्राएं महज औपचारिक दौरे नहीं हैं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीतिक घेराबंदी का हिस्सा हैं। जानकारों का मानना है कि भारत अब चीन की ‘सलामी स्लाइसिंग’ यानी धीरे-धीरे अपनी सीमाएं बढ़ाने की विस्तारवादी नीति का जवाब उसी की भाषा में दे रहा है। यह जाल बड़े ही शांत और सधे हुए कदमों के साथ बिछाया जा रहा है।

India China Relations: हिंद महासागर में चीन की चुनौती का जवाब

प्रधानमंत्री मोदी की सेशेल्स यात्रा को अगर सिर्फ एक सामान्य कूटनीतिक दौरा समझा जाए, तो यह उस बड़ी तस्वीर को अनदेखा करना होगा जो हिंद महासागर में उभर रही है। सेशेल्स रणनीतिक रूप से एक ऐसा द्वीप राष्ट्र है जो समुद्री रास्तों पर अपना नियंत्रण रखता है। चीन पिछले कुछ वर्षों से पूर्वी अफ्रीकी देशों में अपने प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है ताकि वह हिंद महासागर में भारत को घेर सके। सेशेल्स के साथ भारत की बढ़ती साझेदारी न केवल इस घेरेबंदी को तोड़ती है, बल्कि भारत को उस क्षेत्र में एक मजबूत ठिकाना देती है जिससे चीन की चालें नाकाम हो सकती हैं।

मलक्का स्ट्रेट और इंडोनेशिया के साथ रक्षा सहयोग

इंडोनेशिया की यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती दी, बल्कि समुद्री सुरक्षा के नए युग की शुरुआत की। भारत और इंडोनेशिया दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक ‘मलक्का जलडमरूमध्य’ के रक्षक हैं। वैश्विक व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, जिस पर चीन की ऊर्जा आपूर्ति भी निर्भर है।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से इंडोनेशिया का रोंदो द्वीप महज 163 किलोमीटर दूर है। यहां भारत और इंडोनेशिया का संयुक्त सैन्य सहयोग और ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम जैसी रक्षा प्रणालियों का होना ड्रैगन की आंखों में किरकिरी डालना स्वाभाविक है। यह साझेदारी केवल सैन्य अभ्यास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति का एक नया संतुलन बनाने की कोशिश है।

‘सलामी स्लाइसिंग’ क्या है और भारत इसे कैसे देख रहा है?

भू-राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चीन दशकों से ‘सलामी स्लाइसिंग’ की नीति पर काम कर रहा है। इसमें किसी एक बड़े हमले के बजाय छोटे छोटे, सोचे समझे कदम उठाए जाते हैं ताकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय तुरंत प्रतिक्रिया न दे सके। चाहे तिब्बत का मामला हो, अक्साई चिन पर कब्जा, या दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीपों का निर्माण, चीन का पैटर्न एक जैसा रहा है। रितिका करमाकर जैसी विशेषज्ञ कहती हैं कि भारत अब इस बात को समझ चुका है कि आजादी की रक्षा केवल सीमाओं पर लड़ने से नहीं, बल्कि कूटनीतिक और रणनीतिक रूप से घेरने से होती है।

India China Relations: इंडो-पैसिफिक में भारत की बढ़ती सक्रियता

दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता वियतनाम, फिलीपींस और जापान जैसे देशों के लिए लगातार चिंता का विषय रही है। ऑस्ट्रेलिया ने भी चीन के समुद्री दावों को कानूनी रूप से निराधार बताया है। ऐसे समय में भारत का इंडोनेशिया, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों के साथ तालमेल बिठाना यह दर्शाता है कि भारत इस क्षेत्र में एक बहुध्रुवीय व्यवस्था का समर्थक है।

पीएम मोदी की ये यात्राएं भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ को एक नई दिशा दे रही हैं। यह चीन के खिलाफ सीधी लड़ाई नहीं, बल्कि एक सुरक्षित और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था बनाने का प्रयास है। ब्रह्मोस जैसे हथियारों का निर्यात और संयुक्त नौसैनिक अभ्यास इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि भारत अब केवल दर्शक नहीं है, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र का एक प्रमुख सुरक्षा भागीदार बन चुका है।

India China Relations, भविष्य की दिशा: कूटनीति का शांत खेल

भारत की वर्तमान रणनीति प्रसिद्ध दार्शनिक लाओ त्सु के उस विचार पर आधारित है जिसमें कहा गया है कि कीचड़ के बैठने और पानी के साफ होने का इंतजार करना ही सबसे बड़ी बुद्धिमानी है। भारत का लक्ष्य ड्रैगन को सीधे युद्ध में उकसाना नहीं, बल्कि उन सभी रास्तों को सुरक्षित करना है जहां से चीन का दबदबा बढ़ सकता है। आने वाले समय में, यह स्पष्ट है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक राजनीति का केंद्र होगा। भारत की इन रणनीतिक चालों का असर आने वाले दशकों तक महसूस किया जाएगा, क्योंकि यह केवल किसी एक देश का दौरा नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक मार्ग पर भारत के प्रभाव को स्थापित करने का एक ठोस रोडमैप है।

Read More Here:- 

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles