Indian Airlines: भारतीय विमानन उद्योग ने पिछले 25 सालों में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखे हैं। इंडिगो के हालिया संकट ने फिर याद दिला दिया कि यह सेक्टर कितना अस्थिर है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 2000 से 2025 तक नौ एयरलाइंस बंद हो चुकी हैं। वजहें रही हैं वित्तीय संकट, नियामक दिक्कतें, कम लागत वाली एयरलाइंस की होड़, ईंधन-अन्य खर्चों की बढ़ती कीमतें, संचालन चुनौतियां और बाजार दबाव। छोटे शहरों और गांवों के यात्री जो कभी हवाई सफर का सपना देखते थे, वे इन बंदी से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। लेकिन इंडिगो जैसी दिग्गज अभी भी 60% बाजार पर काबिज है। सरकार ने 10% उड़ानें कम करने का आदेश दिया है। आइए जानें इन 9 एयरलाइंस की कहानी।
1ृ एयर सहारा: फुल-सर्विस मॉडल की हार
एयर सहारा 1993 में शुरू हुई, लेकिन 2000 में री-लॉन्च हुई। सहरा इंडिया ग्रुप की यह एयरलाइन फुल-सर्विस मॉडल पर चलती थी। दो बोइंग 737-200 से शुरू होकर 115 घरेलू उड़ानें चलाती थी। 2003 में पड़ोसी देशों की अनुमति मिली, 2004 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कदम रखा। लेकिन कम लागत वाली एयरलाइंस जैसे एयर डेक्कन की होड़, बढ़ते ईंधन-अन्य खर्चों से घाटा बढ़ा। 2007 में जेट एयरवेज ने 1,450 करोड़ में खरीद लिया, लेकिन अप्रैल 2019 में जेटलाइट के साथ बंद हो गई।
2 एयर डेक्कन: बजट एयरलाइंस का पहला कदम
2003 में रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर जी.आर. गोपीनाथ ने शुरू की। वादा था 1 रुपये में उड़ान। बेंगलुरु से शुरू होकर 2007 तक 67 हवाई अड्डों पर 380 दैनिक उड़ानें, 45 विमान और 25,000 यात्री। लेकिन घाटे और खर्चों से परेशान होकर 2007 में किंगफिशर ने खरीद लिया। नाम बदलकर किंगफिशर रेड हो गया।
3 परमाउंट एयरवेज: बिजनेस क्लास का सपना अधूरा
2005 में चेन्नई से शुरू हुई। बिजनेस क्लास पैसेंजर्स पर फोकस, एम्ब्रेयर 170/190 विमानों से उड़ानें। लेकिन 2010 में फ्लीट कम होने से लाइसेंस रद्द। DGCA ने कहा कि राष्ट्रीय परमिट के लिए कम से कम 5 विमान जरूरी, लेकिन सिर्फ एक था।
4 किंगफिशर एयरलाइंस: विजय माल्या का साम्राज्य ढहा
2005 में विजय माल्या ने लॉन्च की। प्रीमियम एयर ट्रैवल का वादा। 2007 में एयर डेक्कन खरीदा। 2008 में बेंगलुरु-लंदन की पहली अंतरराष्ट्रीय उड़ान। लेकिन 2009 से कैश फ्लो की समस्या, 2011 में संकट गहराया। सालाना 900-1,000 करोड़ लीज खर्च, ईंधन महंगा, कर्मचारी हड़ताल। 2012 में वेतन देरी से गैर-जमानती वारंट, CBI ने 950 करोड़ IDBI लोन पर केस किया। 2012 में बंद।
5. जेट एयरवेज: नरेश गोयल का साम्राज्य लुप्त
1993 में नरेश गोयल ने शुरू की। प्राइवेट बाजार खुलने पर फुल एयरलाइन बनी। 2004 में अंतरराष्ट्रीय उड़ानें। 2007 में एयर सहारा खरीदा। लेकिन कम लागत मॉडल में फुल-सर्विस से खर्च बढ़े। 2010 के अंत तक कर्ज, वेतन देरी। 2019 में ईंधन-सेवा भुगतान न होने से 17 अप्रैल को आखिरी उड़ान।
6 ट्रूजेट: क्षेत्रीय कनेक्टिविटी का सपना टूटा
2015 में हैदराबाद से शुरू। साउथ इंडिया के टियर-2/3 शहरों को जोड़ने का लक्ष्य। 2016 में UDAN स्कीम में शामिल, सब्सिडी मिली। 7 विमानों से उड़ानें। लेकिन कम मांग, छोटे रूट्स, ऊंचे फिक्स्ड कॉस्ट और कोविड ने उड़ानें रोकी। सबसे लंबे समय तक चली क्षेत्रीय एयरलाइन के रूप में बंद हुई।
7 गो फर्स्ट: इंसॉल्वेंसी का शिकार
2005 में शुरू। मुंबई-अहमदाबाद से घरेलू उड़ानें। 2018-19 में अंतरराष्ट्रीय। लेकिन PW इंजन समस्या से कैंसिलेशन, घाटा। मई 2023 में इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस, जनवरी 2025 में NCLT ने लिक्विडेशन ऑर्डर दिया। संपत्ति बेचकर कर्ज चुकाया।
8 विस्तारा: टाटा का फुल-सर्विस मॉडल समाप्त
2015 में टाटा और सिंगापुर एयरलाइंस का जॉइंट वेंचर। फुल-सर्विस मॉडल। मई 2024 में क्रू कमी से 100+ उड़ानें कैंसल। नवंबर 2024 में एयर इंडिया में मर्जर। भारत में एक ही फुल-सर्विस एयरलाइन बची।
9 एआईएक्स कनेक्ट्स (पहले एयरएशिया इंडिया)
2014 में शुरू। टाटा का लो-कॉस्ट मॉडल। 2024 में एयर इंडिया एक्सप्रेस में मर्जर। संचालन और विमान ट्रांसफर हो गए।
यह सूची बताती है कि भारतीय विमानन में प्रतिस्पर्धा और लागत ने कई दिग्गजों को लील लिया। लेकिन इंडिगो जैसी कंपनियां बाजार को संभाल रही हैं।



