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West Bengal: ममता का तीखा हमला, चुनाव आयोग पर BJP के झुकाव का आरोप

West Bengal: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 11 दिसंबर 2025 को कृष्णनगर में एक रैली को संबोधित करते हुए केंद्रीय चुनाव आयोग (ईसीआई) और भाजपा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने वोटर लिस्ट के विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया में पक्षपात का आरोप लगाया। ममता ने कहा कि दिल्ली से भाजपा समर्थक अफसरों को जिलाधिकारियों के काम की निगरानी के लिए भेजा जा रहा है। अगर किसी योग्य वोटर का नाम लिस्ट से हटाया गया, तो वे धरना देंगी। यह बयान राज्य में चुनावी माहौल को गरमा सकता है। रैली में हजारों समर्थक जुटे, जो ममता के पक्ष में नारे लगा रहे थे।

कोलकाता में फूड वेंडर्स पर हमले की निंदा

ममता ने कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड पर 7 दिसंबर को हुई घटना पर गुस्सा जताया। एक भव्य ‘गीता पाठ’ कार्यक्रम के दौरान चिकन पेटी बेचने वाले वेंडर्स पर हमला हुआ था। हमलावरों ने सामान फेंक दिया और मारपीट की। ममता ने कहा, “यह उत्तर प्रदेश नहीं है। हमने कल रात ही सभी को गिरफ्तार कर लिया।” पुलिस ने वायरल वीडियो के आधार पर तीन लोगों को पकड़ा। टॉपशिया और आरंभाग के वेंडर्स की शिकायत पर कार्रवाई हुई। ममता ने जोर देकर कहा कि भाजपा सांप्रदायिक बंटवारे की कोशिश कर रही है। वे चाहते हैं कि लोग बंगाली न बोलें और राज्य को नष्ट करें।

शाकाहारी-मांसाहारी का फैसला BJP का नहीं

ममता ने खान-पान को निजी मामला बताते हुए भाजपा की आलोचना की। उन्होंने कहा, “शाकाहारी या मांसाहारी कौन बनेगा, यह भाजपा तय नहीं कर सकती। यह हर व्यक्ति का अपना चुनाव है।” ‘गीता पाठ’ कार्यक्रम पर तंज कसते हुए पूछा, “हम सब गीता पढ़ते हैं, इसके लिए सभा क्यों?” उन्होंने श्रीकृष्ण का हवाला देकर कहा, “धर्म का मतलब पालन करना है, बांटना नहीं।” ममता ने चेतावनी दी कि केंद्र सरकार सभी बंगालियों को बांग्लादेशी बताकर डिटेंशन कैंप भेज सकती है। उन्होंने अपनी नागरिकता पर सवाल उठाने वालों से पूछा, “क्या मुझे अपनी नागरिकता साबित करनी पड़ेगी?” भाजपा को “दंगाइयों की पार्टी” कहकर खारिज किया।

ममता ने कहा कि वे सभी धर्मों के साथ चलना चाहती हैं। राज्य में शांति बनाए रखने का वादा किया। रैली में वंदे मातरम के नारे गूंजे, लेकिन ममता ने इसे राजनीतिक हथियार बनाने पर रोक लगाई। यह रैली 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के खिलाफ ताकत जुटाने का संकेत देती है। ममता सरकार SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये बयान बंगाल की सियासत को नया मोड़ देंगे।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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