Jharkhand News: झारखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में मुख्यमंत्री अबुआ आवास योजना पर 4400 करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा की है। राज्य में 22 लाख आवेदनों में से 16 लाख स्वीकृत हो चुके हैं और 6 लाख आवासों का निर्माण जारी है। प्रति आवास 2 लाख रुपये की राशि राज्य सरकार वहन कर रही है। यह योजना उन परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बनी है जिन्हें केंद्रीय योजना का लाभ नहीं मिल सका।
मुख्यमंत्री अबुआ आवास योजना पर 4400 करोड़ रुपये क्यों खर्च किए जा रहे हैं
झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 11वें दिन राज्य की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने प्रश्नकाल के दौरान यह महत्वपूर्ण जानकारी सदन के सामने रखी। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य सरकार मुख्यमंत्री अबुआ आवास योजना पर 4400 करोड़ रुपये की राशि व्यय करेगी।
यह खर्च इसलिए बढ़ा है क्योंकि प्रधानमंत्री आवास योजना की केंद्रीय राशि समय पर नहीं मिल पाई, जिसके कारण राज्य स्तर पर आवास की मांग तेजी से बढ़ी। इस कमी को पूरा करने के लिए अबुआ आवास योजना को व्यापक रूप से लागू किया जा रहा है।
अबुआ आवास योजना के लिए कितने आवेदन आए और कितने स्वीकृत हुए

मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने सदन को बताया कि अब तक अबुआ आवास योजना के लिए करीब 22 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं। इन सभी आवेदनों की विस्तृत समीक्षा की गई और पात्रता जांच के बाद 16 लाख आवेदन स्वीकृत किए गए।
इस प्रक्रिया में यह भी सामने आया कि कुछ अयोग्य लाभार्थियों ने भी आवेदन किए थे। सरकार ने सर्वे के माध्यम से ऐसे आवेदनों की पहचान की और उन्हें अस्वीकृत कर दिया गया। यह पारदर्शिता सुनिश्चित करती है कि सही परिवारों को ही इस योजना का लाभ मिले।
Jharkhand News: झारखंड में अभी कितने आवासों का निर्माण चल रहा है
राज्य में फिलहाल करीब 6 लाख अबुआ आवासों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके अलावा संताल परगना क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास, अबुआ आवास और अंबेडकर आवास जैसी विभिन्न योजनाओं के तहत करीब साढ़े सात लाख आवासों का निर्माण कार्य एक साथ चल रहा है।
आवास विशेषज्ञों के अनुसार इतने बड़े पैमाने पर एकसाथ आवास निर्माण झारखंड के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना है। यह न केवल गरीब परिवारों को छत देगा बल्कि स्थानीय रोजगार और निर्माण उद्योग को भी गति देगा।
प्रति आवास कितनी राशि दी जा रही है और इसका वित्तपोषण कैसे होता है
राज्य सरकार प्रत्येक अबुआ आवास के निर्माण के लिए लाभार्थी को 2 लाख रुपये प्रति यूनिट प्रदान करती है। यह राशि पूरी तरह से राज्य सरकार के खजाने से आती है, केंद्र सरकार की इस योजना में कोई सीधी भागीदारी नहीं है।
इस योजना की यही विशेषता इसे अन्य केंद्र प्रायोजित योजनाओं से अलग करती है। झारखंड सरकार ने यह जिम्मेदारी स्वयं उठाकर यह सिद्ध किया है कि राज्य स्तर पर भी आवास जैसी मूलभूत जरूरत को पूरा किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री आवास योजना की तुलना में अबुआ आवास की मांग क्यों अधिक है
विधायक हेमलाल मुर्मू ने सदन में यह सवाल उठाया था कि क्या प्रधानमंत्री आवास योजना की तुलना में मुख्यमंत्री अबुआ आवास की मांग अधिक हो गई है। मंत्री ने इसका सीधा जवाब देते हुए कहा कि केंद्रीय योजना की राशि नहीं मिलने के कारण अबुआ आवास के लिए आवेदन बढ़े हैं।
यह स्थिति उन लाखों परिवारों की व्यथा को सामने लाती है जो वर्षों से पक्के मकान का इंतजार कर रहे हैं। जब केंद्रीय योजना से राहत नहीं मिली तो राज्य सरकार की योजना ने उनकी उम्मीद जगाई।
पाकुड़ में सड़क निर्माण के लिए नया टेंडर कब और कैसे जारी होगा
सदन में एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा पाकुड़ जिले की सड़क निर्माण परियोजना का भी उठा। मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने बताया कि पीडब्ल्यूडी के अंतर्गत ऊंगरी टोला से बड़ा घघरी जतरा मंडप तक 4.150 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए नया टेंडर जारी किया जाएगा।
इस नए टेंडर को 20 दिनों के भीतर निष्पादित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पूर्व में जारी टेंडर को कार्य प्रगति की समीक्षा के आधार पर रद किया गया था। विधायक हेमलाल मुर्मू ने बार-बार टेंडर रद होने से विकास कार्यों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव का मुद्दा उठाया था।
Jharkhand News: रेलवे ओवरब्रिज और अंडरब्रिज के लिए सरकार क्या कदम उठाएगी
एक अन्य महत्वपूर्ण विषय राज्य में रेलवे क्रासिंग पर अधूरे पड़े ओवरब्रिज और अंडरब्रिज का था। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने सदन को बताया कि इस संबंध में भारत सरकार के रेल मंत्रालय को पत्र लिखा जाएगा।
राज्य सरकार केंद्र से आग्रह करेगी कि इन पुल-पुलियाओं का निर्माण शीघ्र पूरा किया जाए ताकि सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सके और यातायात को सुचारू बनाया जा सके। विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन ने यह मुद्दा उठाते हुए बताया था कि अधूरे आरओबी और आरयूबी के कारण हादसे हो रहे हैं।
इन योजनाओं का झारखंड के गरीब परिवारों पर क्या असर पड़ेगा
झारखंड उन राज्यों में से एक है जहां आवासहीन परिवारों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक रही है। विशेषकर आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में पक्के मकान की कमी एक बड़ी सामाजिक समस्या रही है। सामाजिक विकास से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि पक्का मकान मिलने से न केवल परिवार की सुरक्षा बढ़ती है बल्कि बच्चों की पढ़ाई, महिलाओं की सुरक्षा और परिवार की सम्मान भी सुनिश्चित होती है।
16 लाख परिवारों को स्वीकृति मिलना और 6 लाख आवासों का निर्माण जारी रहना यह संकेत देता है कि यह योजना जमीनी स्तर पर सक्रिय रूप से काम कर रही है। संताल परगना जैसे पिछड़े क्षेत्र में साढ़े सात लाख आवासों का निर्माण इस क्षेत्र की तस्वीर बदल सकता है।
आगे क्या होगा और नागरिकों को क्या जानना चाहिए
जो परिवार अभी तक अबुआ आवास योजना के लिए आवेदन नहीं कर पाए हैं, उन्हें अपने स्थानीय पंचायत कार्यालय या प्रखंड विकास पदाधिकारी के कार्यालय से संपर्क करना चाहिए। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पात्र लाभार्थियों को इस योजना से वंचित नहीं रखा जाएगा।
बजट सत्र में इस विषय पर जो चर्चा हुई वह यह भी दर्शाती है कि राज्य विधानसभा इन योजनाओं की निगरानी कर रही है। आने वाले महीनों में 4400 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग किस प्रकार होता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री अबुआ आवास योजना झारखंड सरकार की उस प्रतिबद्धता का प्रमाण है जो यह सुनिश्चित करती है कि केंद्रीय योजनाओं की देरी का खामियाजा गरीब परिवारों को न भुगतना पड़े। 4400 करोड़ रुपये का बजट, 16 लाख स्वीकृत आवेदन और 6 लाख आवासों का चल रहा निर्माण, ये तीनों आंकड़े मिलकर एक ऐसी तस्वीर पेश करते हैं जो विकास की दिशा में ठोस कदम दर्शाती है।



