Jharkhand News: झारखंड में कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए आंगनबाड़ी केंद्र अहम भूमिका निभा रहे हैं। राज्य के कई जिलों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बच्चों को पौष्टिक भोजन देकर कुपोषण कम किया है। सरकार की योजनाओं से आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्म भोजन, दूध, अंडे और फल दिए जा रहे हैं। इससे बच्चों का वजन बढ़ा है और स्वास्थ्य सुधरा है। रांची, धनबाद और अन्य जिलों में यह अभियान तेज है।
आंगनबाड़ी में क्या हो रहा?
आंगनबाड़ी केंद्रों में
- 3-6 साल के बच्चों को रोज गर्म भोजन।
- गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को अतिरिक्त पोषण।
- कुपोषित बच्चों की विशेष निगरानी।
- वजन और ऊंचाई की नियमित जांच।
- पोषण शिक्षा और जागरूकता अभियान।
कार्यकर्ताएं घर-घर जाकर माताओं को सिखाती हैं कि सस्ते और स्थानीय सामान से पौष्टिक भोजन बनाएं।
कुपोषण की स्थिति में सुधार
झारखंड में पहले कुपोषण की दर बहुत ऊंची थी। अब आंगनबाड़ी के प्रयास से सुधार हो रहा है। कई बच्चों का वजन सामान्य हो गया है। गंभीर कुपोषित बच्चों की संख्या कम हुई है।
एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने कहा, “बच्चे पहले कमजोर थे। अब भोजन से स्वस्थ हो रहे हैं।”
सरकार की योजनाएं
झारखंड सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों को मजबूत किया है। पोषण अभियान, सुपोषण योजना और अन्य कार्यक्रम चल रहे हैं। केंद्रों में सामग्री समय पर पहुंच रही है। कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग दी जा रही है।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने कहा कि कुपोषण मुक्त झारखंड का लक्ष्य है। आंगनबाड़ी केंद्र मुख्य हथियार हैं।
Jharkhand News: चुनौतियां अभी बाकी
कुछ इलाकों में सामग्री की कमी और जागरूकता की जरूरत है। आदिवासी क्षेत्रों में पहुंच मुश्किल है। लेकिन सरकार प्रयास कर रही है।
झारखंड के आंगनबाड़ी केंद्र कुपोषण से जंग लड़ रहे हैं। बच्चों का भविष्य स्वस्थ हो रहा है। सरकार और कार्यकर्ताओं के प्रयास सराहनीय हैं। उम्मीद है कि जल्द राज्य कुपोषण मुक्त हो जाएगा।



