Jharkhand News: झारखंड के पर्यटन मानचित्र पर एक नया और रोमांचक अध्याय जुड़ने जा रहा है। जमशेदपुर के पास स्थित दलमा वन्यप्राणी आश्रयणी में 100 करोड़ रुपये की लागत से राज्य का पहला ग्लास ब्रिज और हैंगिंग रेस्टोरेंट बनाया जाएगा। यह परियोजना दलमा को एक विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करेगी। हरी भरी वादियों और हाथियों के लिए मशहूर दलमा अब रोमांच के शौकीनों का नया ठिकाना बनने जा रहा है। प्रकृति की खामोशी के बीच जल्द ही एडवेंचर की गूंज सुनाई देगी।
दलमा वन विभाग ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की योजना तैयार कर ली है। नए साल 2026 में इस परियोजना को धरातल पर उतारने की तैयारी चल रही है। ग्लास ब्रिज और हैंगिंग रेस्टोरेंट के अलावा यहां 30 नए कॉटेज भी बनाए जाएंगे। यह परियोजना न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। दलमा अब केवल हाथियों का घर नहीं बल्कि रोमांचक अनुभवों का केंद्र बनने वाला है।
दो पहाड़ों को जोड़ेगा कांच का पुल
दलमा के डीवाइजनल फारेस्ट ऑफिसर सबा आलम अंसारी ने इस परियोजना की जानकारी देते हुए बताया कि ग्लास ब्रिज बिहार के राजगीर और चीन के प्रसिद्ध हांग्जो ब्रिज की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। यह पारदर्शी पुल दलमा के टॉप पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर के पास बनाया जाएगा। करीब 200 फीट लंबा यह ब्रिज दो पहाड़ियों को जोड़ेगा और इसके नीचे गहरी खाई होगी।
जब पर्यटक इस पारदर्शी कांच पर कदम रखेंगे तो उन्हें जमीन पर नहीं बल्कि हवा में तैरने का अहसास होगा। पैरों के नीचे गहरी खाई, सिर के ऊपर नीला आसमान और चारों तरफ घना जंगल देखना एक अविस्मरणीय अनुभव होगा। यह संरचना इंजीनियरिंग और प्रकृति का एक अद्भुत संगम होगी। यहां से दलमा की नैसर्गिक सुंदरता का 360 डिग्री विहंगम दृश्य देखा जा सकेगा। पर्यटक इस ब्रिज पर चलते हुए प्रकृति के करीब होने का अनुभव करेंगे।
बादलों के साथ करेंगे भोजन
ग्लास ब्रिज के रोमांच के बाद पर्यटकों के लिए हैंगिंग रेस्टोरेंट यानी झूलता हुआ रेस्तरां आकर्षण का मुख्य केंद्र होगा। यह झारखंड में अपनी तरह का पहला प्रयोग होगा। पहाड़ी की चोटी से सटे हुए ढांचे पर इसे तैयार किया जाएगा। जमीन से करीब 35 से 100 फीट की ऊंचाई पर बने इस रेस्टोरेंट में बैठकर भोजन करना किसी रोमांचक फिल्म का हिस्सा बनने जैसा होगा।
डीएफओ के अनुसार यह लक्जरी डाइनिंग और एडवेंचर का बेहतरीन मिश्रण होगा। पर्यटक यहां न केवल लजीज व्यंजनों का स्वाद लेंगे बल्कि ऊंचाई से जंगल के मनोरम दृश्यों को भी अपनी यादों में कैद कर सकेंगे। बादलों के बीच बैठकर भोजन करने का यह अनुभव पर्यटकों के लिए जीवन भर याद रहने वाला होगा। हैंगिंग रेस्टोरेंट में सुरक्षा के सभी मानकों का पूरा ध्यान रखा जाएगा ताकि पर्यटक बिना किसी डर के इस अनुभव का आनंद ले सकें।
30 नए कॉटेज में मिलेगा ठहरने का मौका
रोमांच के साथ साथ पर्यटकों के आराम का भी पूरा ख्याल रखा गया है। अक्सर पर्यटक दलमा में रात्रि विश्राम की इच्छा रखते हैं लेकिन सुविधाओं की कमी आड़े आती थी। इस समस्या को दूर करने के लिए विभाग ने 30 नए और आधुनिक कॉटेज बनाने का फैसला किया है। इसके लिए 12 करोड़ रुपये की राशि अलग से स्वीकृत हो चुकी है। ये कॉटेज प्रकृति के अनुकूल बनाए जाएंगे।
पर्यटक शहरी शोर शराबे से दूर जंगल की शांति को महसूस कर सकेंगे। इन कॉटेज में सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। सुबह पक्षियों की चहचहाहट के साथ उठना और रात को तारों भरे आसमान के नीचे सोना पर्यटकों के लिए एक खास अनुभव होगा। ये कॉटेज पर्यटकों को प्रकृति के करीब रहने का मौका देंगे। दलमा में रुकने की व्यवस्था होने से पर्यटक यहां ज्यादा समय बिता सकेंगे और इस खूबसूरत जगह को बेहतर तरीके से एक्सप्लोर कर सकेंगे।
राजगीर और चीन के ब्रिज की तर्ज पर होगा निर्माण
दलमा में बनने वाला ग्लास ब्रिज बिहार के राजगीर में बने ग्लास ब्रिज और चीन के प्रसिद्ध हांग्जो ब्रिज की तर्ज पर बनाया जाएगा। राजगीर का ग्लास ब्रिज पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। वहां रोजाना हजारों की संख्या में पर्यटक आते हैं। इसी तरह चीन के कई ग्लास ब्रिज दुनिया भर में मशहूर हैं। इन्हीं को आदर्श मानकर दलमा में भी विश्व स्तरीय ग्लास ब्रिज बनाया जाएगा।
इस ब्रिज के निर्माण में उच्च गुणवत्ता वाले कांच का इस्तेमाल किया जाएगा जो मजबूत और टिकाऊ होगा। सुरक्षा के सभी मानकों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। इंजीनियरिंग के लिहाज से यह एक चुनौतीपूर्ण काम है लेकिन विभाग इसे सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। विशेषज्ञों की टीम इस परियोजना पर काम करेगी। दलमा का ग्लास ब्रिज झारखंड के पर्यटन को नई ऊंचाई देगा और राज्य को पर्यटन के मानचित्र पर एक अलग पहचान दिलाएगा।
स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार
यह परियोजना केवल पर्यटन को बढ़ावा देने तक सीमित नहीं है बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी साबित होगी। डीएफओ सबा आलम अंसारी ने बताया कि जब पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी तो स्थानीय उत्पादों की मांग भी बढ़ेगी। वर्तमान में यहां के ग्रामीण दोना पत्तल, महुआ का अचार और टी शर्ट बेचकर आजीविका चलाते हैं। विश्व स्तरीय पर्यटन सुविधाएं विकसित होने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
होटल, रेस्टोरेंट, गाइड, ड्राइवर और अन्य सेवाओं में स्थानीय लोगों को नौकरी मिलेगी। उनकी आमदनी में इजाफा होगा और जीवन स्तर सुधरेगा। स्थानीय हस्तशिल्प और उत्पादों की बिक्री बढ़ेगी। यह परियोजना आसपास के गांवों के विकास में भी योगदान देगी। पर्यटन से होने वाली आय का एक हिस्सा स्थानीय समुदाय के विकास में लगाया जाएगा। इस तरह यह परियोजना समग्र विकास का माध्यम बनेगी।
दलमा वन्यप्राणी आश्रयणी की खासियत
दलमा वन्यप्राणी आश्रयणी जमशेदपुर से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह 193 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। दलमा हाथियों के लिए खासतौर से मशहूर है। यहां हाथियों का एक बड़ा झुंड रहता है। मार्च से मई के महीने में हाथी अपने बच्चों के साथ यहां आते हैं। इसके अलावा यहां तेंदुआ, जंगली सुअर, सांभर, चीतल और विभिन्न प्रकार के पक्षी भी पाए जाते हैं।
दलमा की पहाड़ियां बेहद खूबसूरत हैं। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य देखते ही बनता है। घने जंगल, ऊंची पहाड़ियां और शांत वातावरण पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। दलमा की चोटी पर एक प्राचीन शिव मंदिर है जहां हर साल श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है। ट्रैकिंग के शौकीन लोगों के लिए दलमा एक बेहतरीन जगह है। यहां की पगडंडियां साहसिक यात्रा के लिए आदर्श हैं। अब ग्लास ब्रिज और हैंगिंग रेस्टोरेंट बनने से दलमा की लोकप्रियता और बढ़ेगी।
100 करोड़ की परियोजना को मिलेगी मंजूरी
नए साल में दलमा को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है। ग्लास ब्रिज और हैंगिंग रेस्टोरेंट का प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति के लिए मुख्यालय भेजा गया है। 100 करोड़ रुपये की इस परियोजना को मंजूरी मिलते ही धरातल पर उतारने का काम शुरू कर दिया जाएगा। विभाग की कोशिश है कि जल्द से जल्द यह काम शुरू हो जाए।
डीएफओ सबा आलम अंसारी ने कहा कि हमारा प्रयास है कि पर्यटक यहां से एक अविस्मरणीय याद लेकर लौटें। इस परियोजना से दलमा झारखंड का प्रमुख पर्यटन स्थल बन जाएगा। राज्य सरकार भी पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो अगले साल के अंत तक या 2027 की शुरुआत में यह परियोजना पूरी हो सकती है। तब दलमा में पर्यटकों की भीड़ उमड़ पड़ेगी।
झारखंड के पर्यटन को मिलेगी नई पहचान
झारखंड प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर राज्य है लेकिन पर्यटन के क्षेत्र में अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। दलमा में ग्लास ब्रिज और हैंगिंग रेस्टोरेंट बनना झारखंड के पर्यटन के लिए एक बड़ा कदम होगा। यह परियोजना राज्य को पर्यटन के मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाएगी। जब पर्यटक दलमा के बारे में सुनेंगे तो उन्हें यहां आने की इच्छा होगी।
राजगीर के ग्लास ब्रिज की तरह दलमा का ग्लास ब्रिज भी सोशल मीडिया पर वायरल होगा। लोग अपनी तस्वीरें और वीडियो शेयर करेंगे जिससे दलमा की प्रसिद्धि बढ़ेगी। यह झारखंड के अन्य पर्यटन स्थलों के लिए भी फायदेमंद होगा। जब लोग दलमा आएंगे तो वे राज्य के अन्य खूबसूरत जगहों पर भी जाएंगे। इससे पूरे राज्य में पर्यटन का विकास होगा। सरकार को भी राजस्व मिलेगा जिसे विकास कार्यों में लगाया जा सकेगा।
सुरक्षा पर विशेष ध्यान
ग्लास ब्रिज और हैंगिंग रेस्टोरेंट जैसी एडवेंचर परियोजनाओं में सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। विभाग ने इस पर विशेष ध्यान देने का आश्वासन दिया है। ब्रिज और रेस्टोरेंट के निर्माण में अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन किया जाएगा। सबसे मजबूत और उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री का इस्तेमाल होगा। नियमित रूप से सुरक्षा जांच की जाएगी। पर्यटकों के लिए सुरक्षा निर्देश तैयार किए जाएंगे।
एक बार में कितने लोग ब्रिज या रेस्टोरेंट में जा सकते हैं इसकी सीमा तय की जाएगी। प्रशिक्षित स्टाफ तैनात किया जाएगा जो पर्यटकों की मदद करेगा। आपातकालीन स्थिति के लिए पूरी तैयारी रहेगी। सुरक्षा उपकरण और एंबुलेंस की व्यवस्था होगी। विभाग का कहना है कि पर्यटकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सुरक्षित और रोमांचक अनुभव देना ही उनका लक्ष्य है।
पर्यावरण संरक्षण भी जरूरी
दलमा एक वन्यप्राणी आश्रयणी है इसलिए यहां पर्यावरण संरक्षण बेहद जरूरी है। परियोजना को इस तरह से विकसित किया जाएगा कि पर्यावरण को कोई नुकसान न हो। पेड़ों की अनावश्यक कटाई नहीं की जाएगी। वन्यजीवों के आवास को प्रभावित नहीं किया जाएगा। कचरा प्रबंधन की उचित व्यवस्था होगी। पर्यटकों को भी पर्यावरण के प्रति जागरूक किया जाएगा।
इको फ्रेंडली पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। पर्यावरण विशेषज्ञों से सलाह लेकर परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा। वन विभाग का कहना है कि विकास और संरक्षण दोनों साथ साथ चलेंगे। पर्यटन से होने वाली आय का एक हिस्सा वन संरक्षण में लगाया जाएगा। इस तरह यह परियोजना सतत विकास का एक उदाहरण बनेगी। दलमा की प्राकृतिक सुंदरता को बचाते हुए पर्यटन का विकास करना ही मुख्य लक्ष्य है।
Jharkhand News: पर्यटकों के लिए एक सपना सच होगा
दलमा में ग्लास ब्रिज और हैंगिंग रेस्टोरेंट बनना रोमांच के शौकीन पर्यटकों के लिए एक सपना सच होने जैसा होगा। अब तक ऐसी सुविधाओं के लिए लोगों को दूसरे राज्यों या देशों में जाना पड़ता था। अब झारखंड में ही यह अनुभव मिल सकेगा। यह परियोजना राज्य के लिए गर्व की बात होगी। आने वाले समय में दलमा देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शुमार होगा और झारखंड की पहचान नए सिरे से बनेगी।



