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West Bengal News: आरजी कर आंदोलन के प्रमुख चेहरे अनिकेत महतो ने इस्तीफा देकर लगाया गंभीर आरोप, कहा अलोकतांत्रिक थी प्रक्रिया

West Bengal News: पश्चिम बंगाल के सरकारी आरजी कर अस्पताल में एक प्रशिक्षु महिला डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या के विरोध में हुए आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे अनिकेत महतो ने शुक्रवार को गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए गठित वेस्ट बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फोरम के गठन की प्रक्रिया अलोकतांत्रिक और अनुचित थी। महतो ने आरोप लगाया कि न्यास के सभी सदस्यों को विश्वास में नहीं लिया गया था और यह आरजी कर पीड़िता के परिवार के साथ अन्याय था।

अनिकेत महतो ने वेस्ट बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फोरम के न्यासी मंडल से इस्तीफा दे दिया है। इस फोरम का गठन नौ अगस्त 2024 को महिला डॉक्टर के साथ हुई दरिंदगी की घटना के एक दिन बाद किया गया था। महतो ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि 37 सदस्यीय डब्ल्यूबीजेडीएफ कार्यकारी समिति के गठन को लेकर उनके और अन्य न्यासियों के बीच मतभेद हो गए थे जिसके कारण उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया है।

आंदोलन के प्रमुख नेता ने छोड़ा मंच

अनिकेत महतो आरजी कर आंदोलन के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक थे। उन्होंने इस आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई थी और डॉक्टरों के संघर्ष को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। नौ अगस्त 2024 को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक प्रशिक्षु महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद पूरे बंगाल में डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया था।

इस आंदोलन को दिशा देने के लिए वेस्ट बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फोरम का गठन किया गया था। महतो इस मंच के न्यासी मंडल के सदस्य थे और आंदोलन के दौरान वे सबसे मुखर और सक्रिय नेताओं में शामिल रहे। लेकिन अब उन्होंने इस मंच से इस्तीफा देकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके इस्तीफे ने डॉक्टरों के आंदोलन में एक नया मोड़ ला दिया है। यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर आंदोलन के भीतर क्या हो रहा है।

अलोकतांत्रिक प्रक्रिया का आरोप

महतो ने आरोप लगाया कि डब्ल्यूबीजेडीएफ की कार्यकारी समिति के गठन की प्रक्रिया अलोकतांत्रिक थी। उन्होंने कहा कि जब 37 सदस्यीय कार्यकारी समिति बनाई गई तो सभी न्यासियों को इसमें शामिल नहीं किया गया। कुछ लोगों ने मिलकर फैसले लिए और बाकी सदस्यों को विश्वास में नहीं लिया गया। यह लोकतांत्रिक तरीका नहीं था। जब आंदोलन खुद लोकतंत्र और न्याय के लिए लड़ा जा रहा था तो इसके भीतर अलोकतांत्रिक तरीके से काम करना गलत था।

महतो ने कहा कि उन्होंने कई बार अपनी चिंताएं और विचार व्यक्त किए लेकिन उन पर ध्यान नहीं दिया गया। मंच में उनकी प्रासंगिकता नहीं रह गई थी। जब भी वे कुछ सुझाव देते थे तो उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता था। यह स्थिति लंबे समय तक चली। आखिरकार उन्होंने फैसला किया कि इस तरह के माहौल में काम करना संभव नहीं है और इस्तीफा देना ही बेहतर है।

पीड़िता के परिवार के साथ अन्याय

महतो ने यह भी आरोप लगाया कि यह सब आरजी कर पीड़िता के परिवार के साथ अन्याय था। उन्होंने कहा कि जो आंदोलन उस महिला डॉक्टर को न्याय दिलाने के लिए शुरू किया गया था वह अपने मूल उद्देश्य से भटक गया। जब मंच के भीतर ही लोकतांत्रिक तरीके से काम नहीं हो रहा था तो पीड़िता के परिवार को कैसे न्याय मिल सकता था। यह पूरी प्रक्रिया ही गलत दिशा में चली गई।

पीड़िता का परिवार न्याय की उम्मीद में था। डॉक्टरों का आंदोलन उनके लिए एक सहारा था। लेकिन जब आंदोलन के नेताओं के बीच ही मतभेद होने लगे और अलोकतांत्रिक तरीके अपनाए जाने लगे तो यह परिवार के साथ विश्वासघात जैसा था। महतो का मानना है कि आंदोलन को पीड़िता और उसके परिवार को केंद्र में रखकर चलना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। धीरे धीरे आंदोलन अपने मूल मकसद से दूर होता गया।

सरकार पर प्रतिशोध का आरोप

अनिकेत महतो ने पश्चिम बंगाल सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह आरजी कर पीड़िता की दुष्कर्म के बाद हत्या हुई उसी तरह राज्य सरकार राजनीतिक प्रतिशोध के लिए उनके चिकित्सा पेशे को खत्म करने की कोशिश कर रही है। महतो ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि वे इस राज्य के अधीन काम कर सकते हैं। सरकार उन सभी लोगों को निशाना बना रही है जिन्होंने आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

महतो का आरोप है कि सत्तारूढ़ दल और प्रतिष्ठान प्रतिशोध की भावना रखते हैं। जो लोग न्याय आंदोलन में अहम भूमिका निभाते हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। यह एक तरह का डर का माहौल बनाया जा रहा है ताकि कोई आवाज न उठाए। सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों तथा अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में धमकी भरा माहौल है। डॉक्टर और छात्र डर के साए में काम कर रहे हैं।

30 लाख रुपये की जमानत राशि का मामला

अनिकेत महतो ने बताया कि सरकार को एसआर शिप बांड छोड़ने के लिए उन्हें 30 लाख रुपये देने होंगे। एसआर शिप बांड वह समझौता है जो मेडिकल छात्र सरकारी खर्च पर शिक्षा पूरी करने के बाद एक निश्चित अवधि तक सरकारी सेवा में काम करने के लिए करते हैं। अगर कोई छात्र इस समझौते को तोड़ना चाहता है तो उसे एक बड़ी रकम देनी होती है।

महतो ने आम जनता से इस 30 लाख रुपये की राशि जुटाने में मदद करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि वे अब पश्चिम बंगाल सरकार के अधीन काम नहीं कर सकते। इसलिए उन्हें यह रकम चुकानी होगी। लेकिन इतनी बड़ी रकम जुटाना आसान नहीं है। उन्होंने लोगों से अनुरोध किया है कि वे इसमें उनकी मदद करें। उनका कहना है कि यह सिर्फ उनका नहीं बल्कि सच्चाई के लिए लड़ने वालों का संघर्ष है।

आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे

महतो ने स्पष्ट कर दिया है कि जूनियर डॉक्टर्स फोरम छोड़ने के बाद भी वे आंदोलन और अपने रुख से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि भले ही वे अब इस मंच का हिस्सा नहीं हैं लेकिन न्याय के लिए लड़ाई जारी रखेंगे। पीड़िता को न्याय दिलाना और डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनका लक्ष्य है। यह लक्ष्य किसी एक मंच तक सीमित नहीं है।

महतो का मानना है कि आंदोलन अपने शुरुआती संघर्ष की गति को बरकरार नहीं रख सका। जब आंदोलन शुरू हुआ था तब एक जोश था और सभी एकजुट थे। लेकिन समय के साथ मतभेद बढ़ने लगे और आंदोलन की धार कमजोर पड़ गई। महतो चाहते हैं कि फिर से उसी जोश और एकता के साथ संघर्ष को आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि वे अकेले भी लड़ सकते हैं और जरूरत पड़ने पर नए तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।

सुबूतों को नष्ट करने का आरोप

महतो ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि महिला चिकित्सक के साथ दरिंदगी की घटना के सुबूत नष्ट कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि घटना के बाद जो सबूत मौजूद थे उन्हें जानबूझकर नष्ट किया गया ताकि असली अपराधियों को बचाया जा सके। यह एक बड़ी साजिश का हिस्सा है। जब सुबूत ही नहीं रहेंगे तो न्याय कैसे मिलेगा। यह पूरा मामला एक षड्यंत्र है जिसमें कई लोग शामिल हैं।

इस आरोप से यह सवाल खड़े होते हैं कि आखिर जांच में क्या हो रहा है। अगर सचमुच सुबूत नष्ट किए गए हैं तो यह बेहद चिंताजनक है। पीड़िता के परिवार को न्याय कैसे मिलेगा। महतो का मानना है कि इसीलिए आंदोलन को और मजबूती से आगे बढ़ाने की जरूरत है। सच्चाई को सामने लाना होगा और जिम्मेदार लोगों को सजा दिलानी होगी। यह केवल एक महिला डॉक्टर की घटना नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था का सवाल है।

आंदोलन की शुरुआत और विकास

आरजी कर आंदोलन नौ अगस्त 2024 को शुरू हुआ था जब कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक प्रशिक्षु महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना सामने आई। यह घटना इतनी भयावह और दर्दनाक थी कि पूरे बंगाल में डॉक्टरों और आम लोगों में आक्रोश फैल गया। डॉक्टरों ने काम बंद कर दिया और सड़कों पर उतर आए।

आंदोलन तेजी से फैला और पूरे राज्य में डॉक्टर विरोध प्रदर्शन करने लगे। उन्होंने पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग की। साथ ही डॉक्टरों की सुरक्षा और बेहतर कार्य वातावरण की भी मांग उठाई। इस आंदोलन को संगठित करने के लिए वेस्ट बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फोरम का गठन किया गया। अनिकेत महतो इस मंच के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। उन्होंने दिन रात मेहनत करके आंदोलन को आगे बढ़ाया।

मंच के भीतर मतभेद

समय के साथ डॉक्टर्स फोरम के भीतर मतभेद बढ़ने लगे। शुरुआत में सभी एकजुट थे और एक ही उद्देश्य के लिए लड़ रहे थे। लेकिन जैसे जैसे आंदोलन आगे बढ़ा, विभिन्न मुद्दों पर असहमति होने लगी। कुछ लोग चाहते थे कि आंदोलन को और तीखा किया जाए। कुछ लोग मानते थे कि अब बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए। कुछ लोग संगठन को एक तरीके से चलाना चाहते थे तो कुछ दूसरे तरीके से।

37 सदस्यीय कार्यकारी समिति के गठन को लेकर विवाद चरम पर पहुंच गया। महतो और कुछ अन्य न्यासियों ने आपत्ति जताई कि इस समिति के गठन में उन्हें शामिल नहीं किया गया। कुछ लोगों ने मिलकर फैसले ले लिए और बाकी को सूचित भी नहीं किया। यह लोकतांत्रिक तरीका नहीं था। महतो ने इसका विरोध किया लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। आखिरकार उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया।

सरकारी दबाव और धमकी का माहौल

महतो ने जो आरोप लगाए हैं उनसे यह भी पता चलता है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों में एक धमकी भरा माहौल है। जो लोग आवाज उठाते हैं उन्हें निशाना बनाया जाता है। उनके करियर को खतरे में डाला जाता है। उन पर विभिन्न तरह के दबाव बनाए जाते हैं। यह स्थिति न केवल डॉक्टरों के लिए बल्कि पूरी शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए खतरनाक है।

जब डॉक्टर और छात्र डर के साए में रहेंगे तो वे अपना काम ठीक से नहीं कर पाएंगे। अगर किसी गलत चीज को देखकर भी वे चुप रहेंगे तो व्यवस्था कैसे सुधरेगी। महतो का कहना है कि यही कारण है कि उन्होंने आवाज उठाने का फैसला किया। भले ही उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़े लेकिन वे सच को सामने लाना चाहते हैं। उनका मानना है कि अगर सभी मिलकर इस माहौल के खिलाफ खड़े होंगे तो बदलाव लाया जा सकता है।

आंदोलन का भविष्य और चुनौतियां

अनिकेत महतो के इस्तीफे के बाद आरजी कर आंदोलन के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। एक प्रमुख नेता के जाने से आंदोलन की धार कमजोर हो सकती है। लेकिन दूसरी ओर यह भी संभव है कि महतो अपने तरीके से संघर्ष जारी रखें और आंदोलन को एक नई दिशा दें। उन्होंने साफ कर दिया है कि वे पीछे नहीं हटेंगे। वे जनता के बीच जाकर अपनी बात रखेंगे और समर्थन जुटाएंगे।

डॉक्टर्स फोरम के सामने अब यह चुनौती है कि वह अपनी एकता बनाए रखे और आंदोलन को जारी रखे। महतो के आरोपों का जवाब देना होगा। मंच के भीतर जो मतभेद हैं उन्हें दूर करना होगा। सबसे जरूरी यह है कि आंदोलन अपने मूल उद्देश्य पर केंद्रित रहे। पीड़िता को न्याय दिलाना और डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना ही असली लक्ष्य है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।

West Bengal News: जनता की राय और समर्थन

आरजी कर आंदोलन को शुरू से ही आम जनता का व्यापक समर्थन मिला था। लोगों ने डॉक्टरों के संघर्ष को अपना संघर्ष माना। महिलाओं की सुरक्षा और न्याय का यह सवाल केवल डॉक्टरों का नहीं बल्कि पूरे समाज का था। इसलिए लाखों लोगों ने विभिन्न तरीकों से आंदोलन का समर्थन किया। अब महतो ने जनता से 30 लाख रुपये की मदद मांगी है। देखना होगा कि लोग उनकी इस अपील का कैसा जवाब देते हैं।

महतो के आरोपों ने एक बहस छेड़ दी है। कुछ लोग उनके साथ हैं और मानते हैं कि उन्होंने सही समय पर सही बात कही। लेकिन कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि इस तरह आंदोलन के भीतर मतभेद खुलेआम व्यक्त करना ठीक नहीं है। इससे आंदोलन कमजोर हो सकता है। जो भी हो, यह पूरा मामला बहुत जटिल हो गया है और इसका समाधान निकालना आसान नहीं होगा। आने वाले दिनों में देखना होगा कि आरजी कर आंदोलन किस दिशा में जाता है।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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