Noida Protest: नोएडा के औद्योगिक इलाकों में सोमवार को वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर हजारों मजदूर सड़कों पर उतर आए। यह प्रदर्शन धीरे-धीरे इतना उग्र हो गया कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की दो गाड़ियों सहित कुल पांच वाहनों को आग लगा दी। जगह-जगह पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आईं। हालात बिगड़ते देख दिल्ली पुलिस ने भी हाई अलर्ट जारी कर दिया और दिल्ली-नोएडा सीमा पर सुरक्षा कड़ी कर दी।
कैसे शुरू हुआ नोएडा में मजदूरों का प्रदर्शन
सोमवार की सुबह नोएडा के फेज-2 और सेक्टर-60 के आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूर इकट्ठा होने लगे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, विभिन्न फैक्ट्रियों और कंपनियों के कर्मचारी लंबे समय से लंबित वेतन संशोधन की मांग को लेकर एक जगह जमा हुए। शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और मजदूर नारेबाजी करते हुए अपनी बात रख रहे थे।
लेकिन दोपहर होते-होते स्थिति बदल गई। भीड़ में कुछ अराजक तत्व शामिल हो गए और माहौल हिंसक हो गया। नोएडा के फेज-2 के हाजरी कॉम्प्लेक्स में जो भी फैक्ट्री खुली मिली, उसमें घुसकर तोड़फोड़ की गई। भाजपा नेता संजय बाली की फैक्ट्री भी इस हिंसा की चपेट में आई, जहां प्रदर्शनकारी अंदर घुस गए और नुकसान पहुंचाया।
पुलिस की गाड़ियां जलाईं, पत्थरबाजी भी हुई

प्रदर्शन का सबसे चिंताजनक पहलू वाहनों में आगजनी था। भड़की हुई भीड़ ने पुलिस की दो जीप सहित कुल पांच गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। नोएडा के कई चौराहों और सड़कों पर पत्थरबाजी की घटनाएं भी हुईं। फेज-2 और सेक्टर-60 क्षेत्र इस हिंसा का सबसे बड़ा केंद्र रहे।
पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और मजदूरों को शांत करने की कोशिश करते रहे। वरिष्ठ पुलिस अफसर खुद प्रदर्शनकारियों से बात कर उन्हें शांति से धरना देने की सलाह देते नजर आए, लेकिन स्थिति को काबू में करना आसान नहीं था। प्रदर्शनकारियों की संख्या करीब 50 हजार बताई जा रही है, जो नोएडा के इतिहास में एक बड़ा आंकड़ा है।
दिल्ली पुलिस हाई अलर्ट पर, सीमा पर कड़ी चौकसी
नोएडा की हिंसक घटनाओं को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने भी फौरन एक्शन लिया। दिल्ली-नोएडा सीमा पर सभी प्रमुख एंट्री पॉइंट्स पर बैरिकेडिंग बढ़ा दी गई। रैपिड रिस्पॉन्स टीमें और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया ताकि किसी भी अनहोनी पर तुरंत कार्रवाई हो सके।
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली को नोएडा से जोड़ने वाली हर मोटरेबल सड़क पर पुलिस की टीमें खड़ी हैं। वाहनों की गहन जांच की जा रही है ताकि कोई भी असामाजिक तत्व प्रदर्शन की आड़ में दिल्ली में न घुस सके। उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ भी लगातार तालमेल बनाए रखा जा रहा है।
भारी ट्रैफिक जाम में फंसे लोग, घंटों बर्बाद हुए
मजदूरों के इस उग्र प्रदर्शन का सीधा असर आम जनता पर पड़ा। नोएडा के प्रमुख चौराहों पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं। दिल्ली के कई इलाकों में भी ट्रैफिक की रफ्तार थम सी गई। सोमवार को ऑफिस जाने वाले लोगों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ा।
कई सड़कों पर हालात इतने खराब हो गए कि लोगों को गाड़ी छोड़कर पैदल चलना पड़ा। दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर सुरक्षा चेकिंग की वजह से भी रास्ते धीमे पड़ गए। सोशल मीडिया पर लोगों ने जाम की तस्वीरें और वीडियो शेयर किए और प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप की मांग की।
सीएम योगी ने दिए सख्त निर्देश
इस पूरे मामले पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी संज्ञान लिया। उन्होंने औद्योगिक इकाइयों को निर्देश दिए कि श्रमिकों को सम्मानजनक वेतन मिले, काम की जगह सुरक्षित हो और उनकी समस्याओं का समय पर समाधान किया जाए। मुख्यमंत्री के इस बयान को प्रदर्शनकारी मजदूरों ने एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा है।
प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कानून व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है और इसमें किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।
क्या है मजदूरों की असली मांग
नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूर काफी समय से वेतन बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि महंगाई के इस दौर में उनका वेतन बेहद कम है और इसमें संशोधन किया जाना जरूरी है। इसके अलावा बेहतर काम के हालात, समय पर वेतन भुगतान और कर्मचारियों की सुरक्षा जैसी मांगें भी उनकी सूची में शामिल हैं।
मजदूर नेताओं का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रबंधन और प्रशासन से बात करने की कोशिश की लेकिन उनकी बातें अनसुनी की जाती रहीं। इसीलिए मजबूर होकर उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा। हालांकि, हिंसा और तोड़फोड़ को लेकर कई मजदूर नेताओं ने खुद कहा कि यह उनके आंदोलन का हिस्सा नहीं था और अराजक तत्वों ने उनके शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बदनाम करने की कोशिश की।
आगे क्या होगा, सबकी नजर प्रशासन पर
फिलहाल स्थिति नाजुक बनी हुई है। नोएडा और दिल्ली दोनों जगह पुलिस बल मुस्तैद है। प्रशासन की कोशिश है कि मजदूरों और कंपनी प्रबंधन के बीच जल्द से जल्द बातचीत हो और मांगों का समाधान निकाला जाए। अगर यह नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में आंदोलन और बड़ा हो सकता है।
यह घटना एक बार फिर इस बात को सामने लाती है कि औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों की जायज मांगों को नजरअंदाज करने की कीमत कितनी बड़ी हो सकती है। न सिर्फ संपत्ति को नुकसान होता है, बल्कि पूरे इलाके का माहौल बिगड़ जाता है और आम लोगों की जिंदगी भी प्रभावित होती है।
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