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NDA गठबंधन टूटने के संकेत, JDU-LJP-HAM ने बढ़ाई BJP की टेंशन

West Bengal Election: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में दरार के संकेत मिलने लगे हैं। बिहार की तीन प्रमुख सहयोगी पार्टियां जनता दल यूनाइटेड (JDU), लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास (LJPR) और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) ने भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। तीनों दल बंगाल में स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे BJP को बड़ा झटका लग सकता है।

क्या है पूरा मामला

पश्चिम बंगाल में 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। BJP इस चुनाव को ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) के खिलाफ बड़ी लड़ाई के रूप में देख रही है। लेकिन अब NDA के भीतर ही सीट बंटवारे को लेकर विवाद शुरू हो गया है। बिहार की तीनों पार्टियां चाहती हैं कि उन्हें बंगाल में पर्याप्त सीटें दी जाएं, लेकिन BJP इस पर सहमत नहीं दिख रही है।

सूत्रों के अनुसार, JDU, LJPR और HAM ने साफ कर दिया है कि अगर उन्हें उचित सीटें नहीं मिलीं तो वे गठबंधन से अलग होकर अपने दम पर चुनाव लड़ेंगे। यह स्थिति BJP के लिए चिंता का विषय बन गई है।

JDU चाहती है बड़ी हिस्सेदारी

West Bengal Election: Bihar CM Nitish Kumar
West Bengal Election: Bihar CM Nitish Kumar

जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी पश्चिम बंगाल में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराना चाहती है। JDU का मानना है कि बंगाल में बिहारी मतदाताओं की अच्छी संख्या है और पार्टी उनका समर्थन हासिल कर सकती है।

JDU नेताओं ने साफ किया है कि उन्हें कम से कम 40 से 50 सीटों पर चुनाव लड़ने का मौका मिलना चाहिए। लेकिन BJP इतनी सीटें देने को तैयार नहीं है। इससे दोनों दलों के बीच तनाव बढ़ गया है।

नीतीश कुमार का राजनीतिक इतिहास

नीतीश कुमार अपने राजनीतिक करियर में कई बार गठबंधन बदल चुके हैं। 2013 में उन्होंने BJP से नाता तोड़ा था और महागठबंधन के साथ आ गए थे। फिर 2017 में वे दोबारा NDA में लौट आए। 2022 में एक बार फिर उन्होंने BJP छोड़ दी और महागठबंधन के साथ सरकार बनाई। लेकिन 2024 में फिर से वे NDA में वापस आ गए।

इस इतिहास को देखते हुए BJP नेता सतर्क हैं। उन्हें डर है कि कहीं नीतीश कुमार बंगाल चुनाव को लेकर फिर से कोई बड़ा फैसला न ले लें।

पासवान परिवार की राजनीति

लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के अध्यक्ष चिराग पासवान भी पश्चिम बंगाल में अपनी पार्टी का विस्तार करना चाहते हैं। उनका मानना है कि बंगाल में दलित और पिछड़े वर्ग के मतदाता उनका समर्थन करेंगे।

LJPR ने मांग की है कि उन्हें बंगाल में कम से कम 25 से 30 सीटों पर चुनाव लड़ने का अवसर मिले। चिराग पासवान ने संकेत दिया है कि अगर उचित सीटें नहीं मिलीं तो वे स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेंगे।

चिराग का बंगाल कनेक्शन

पासवान परिवार की राजनीति बिहार के अलावा पूर्वी भारत के अन्य राज्यों में भी है। दिवंगत रामविलास पासवान का बंगाल में अच्छा प्रभाव था। चिराग पासवान इस विरासत को आगे बढ़ाना चाहते हैं।

जीतन राम मांझी का दावा

हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी भी पश्चिम बंगाल में अपनी पार्टी की मजबूती चाहते हैं। मांझी का कहना है कि बंगाल में महादलित समुदाय की अच्छी आबादी है और HAM उनका प्रतिनिधित्व कर सकती है।

HAM ने भी मांग की है कि उन्हें 15 से 20 सीटों पर चुनाव लड़ने का मौका मिले। जीतन राम मांझी ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी पार्टी को नजरअंदाज किया गया तो वे अकेले मैदान में उतरेंगे।

बंगाल में महादलित वोट बैंक

पश्चिम बंगाल में महादलित समुदाय की अच्छी संख्या है। यह वोट बैंक किसी भी पार्टी के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। HAM इस वोट बैंक को अपने पक्ष में करना चाहती है।

सीट बंटवारे की चुनौती

भाजपा के सामने अब बड़ी चुनौती है। एक तरफ वह बंगाल में TMC को हराना चाहती है, दूसरी तरफ अपने सहयोगियों को खुश रखना भी जरूरी है। BJP के पास बंगाल की 294 विधानसभा सीटें हैं। अगर वह तीनों सहयोगी दलों को 100 से अधिक सीटें दे देती है तो खुद के लिए कम सीटें बचेंगी।

2021 के चुनाव का अनुभव

2021 के विधानसभा चुनाव में BJP ने 77 सीटें जीती थीं लेकिन सरकार नहीं बना पाई। TMC ने 213 सीटों पर जीत हासिल की थी। इस बार BJP पूर्ण बहुमत चाहती है और इसके लिए वह ज्यादा से ज्यादा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारना चाहती है।

गठबंधन टूटने का खतरा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर BJP ने अपने सहयोगियों की मांगों को नजरअंदाज किया तो NDA में दरार पड़ सकती है। यह स्थिति न केवल बंगाल बल्कि बिहार की राजनीति को भी प्रभावित करेगी।

ममता बनर्जी की रणनीति

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी NDA में इस उठापटक से खुश हैं। TMC का मानना है कि अगर विपक्ष में फूट पड़ती है तो उन्हें फायदा होगा। ममता बनर्जी पहले से ही BJP को हराने के लिए जोरदार तैयारी कर रही हैं।

विपक्ष की एकता का सवाल

अगर JDU, LJPR और HAM अलग-अलग चुनाव लड़ती हैं तो विपक्षी वोट बंट जाएंगे। इससे TMC को सीधा लाभ मिलेगा। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि विपक्षी एकता के बिना बंगाल में TMC को हराना मुश्किल है।

कांग्रेस भी चाहती है सीटें

NDA के अलावा INDIA गठबंधन में भी सीट बंटवारे को लेकर तनाव है। कांग्रेस चाहती है कि TMC उसे कुछ सीटें दे लेकिन ममता बनर्जी इसके लिए तैयार नहीं हैं। 2021 में कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत खराब रहा था।

वाम दलों की स्थिति

CPI(M) और अन्य वाम दल भी बंगाल में अपनी जमीन वापस पाना चाहते हैं। एक समय बंगाल में वाम दलों का 34 साल का शासन था। लेकिन 2011 के बाद से उनका प्रभाव लगातार कम हो रहा है।

बिहार में भी उठापटक संभव

पश्चिम बंगाल के सीट बंटवारे का असर बिहार की राजनीति पर भी पड़ सकता है। अगर JDU, LJPR या HAM में से कोई भी दल बंगाल में NDA से अलग होता है तो बिहार में भी समीकरण बदल सकते हैं।

2025 बिहार चुनाव की तैयारी

बिहार में 2025 में विधानसभा चुनाव होने हैं। NDA में अगर दरार पड़ती है तो इसका सीधा असर बिहार चुनाव पर पड़ेगा। नीतीश कुमार, चिराग पासवान और जीतन राम मांझी तीनों बिहार की राजनीति के महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं।

राजनीतिक विश्लेषण

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि BJP को अपने सहयोगियों के साथ समझौता करना होगा। अगर गठबंधन टूटता है तो इसका नुकसान सभी को होगा। बंगाल में TMC को हराने के लिए विपक्ष की एकता बेहद जरूरी है।

सीट शेयरिंग फॉर्मूला

विशेषज्ञों का सुझाव है कि BJP को 200 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहिए और बाकी 94 सीटें सहयोगी दलों में बांट देनी चाहिए। इससे सभी दलों को संतुष्ट किया जा सकता है।

West Bengal Election: एनडीए गठबंधन में बातचीत जारी

फिलहाल NDA के शीर्ष नेताओं के बीच बातचीत जारी है। BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेता सहयोगी दलों को मनाने की कोशिश कर रहे हैं। अगले कुछ हफ्तों में सीट बंटवारे को लेकर कोई फैसला हो सकता है।

चुनाव आयोग का ऐलान

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मध्य में होने की संभावना है। चुनाव आयोग जल्द ही तारीखों की घोषणा कर सकता है। चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो जाएंगी।

NDA गठबंधन में दरार के संकेत

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले NDA गठबंधन में दरार के संकेत चिंताजनक हैं। JDU, LJPR और HAM की मांगें BJP के लिए बड़ी चुनौती बन गई हैं। सीट बंटवारे को लेकर विवाद अगर सुलझ गया तो NDA मजबूत होकर TMC के सामने खड़ी हो सकती है। लेकिन अगर गठबंधन टूटता है तो इसका सबसे बड़ा फायदा ममता बनर्जी को होगा।

बिहार की तीनों पार्टियों ने साफ कर दिया है कि वे सम्मानजनक सीट शेयरिंग चाहती हैं। BJP को अब फैसला करना होगा कि वह अपने सहयोगियों को साथ रखना चाहती है या अकेले चुनाव लड़ने का जोखिम उठाना चाहती है। आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। यह चुनाव न केवल बंगाल बल्कि पूरे देश की राजनीति को प्रभावित करेगा।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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