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Nimesulide Ban: सरकार ने निमेसुलाइड 100 mg ओरल टैबलेट पर लगाई रोक, स्वास्थ्य के लिए खतरा बताया, जानिए पूरी वजह

Nimesulide Ban: केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण और स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत जरूरी फैसला लेते हुए लोकप्रिय दर्द निवारक दवा निमेसुलाइड की 100 mg ओरल टैबलेट पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार ने इसे मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताते हुए इसका निर्माण, बिक्री, वितरण और स्टॉक रखना तुरंत प्रभाव से गैरकानूनी घोषित कर दिया है। यह दवा पिछले कई दशकों से बुखार, दर्द, सूजन और जोड़ों के दर्द में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की जाती रही है। खासकर बच्चों को बुखार आने पर डॉक्टर और अभिभावक इसे देते थे क्योंकि यह पैरासिटामॉल से ज्यादा तेज असर करती थी।

लेकिन अब स्वास्थ्य मंत्रालय और ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने कई अध्ययनों, रिपोर्ट्स और गंभीर साइड इफेक्ट के मामलों के आधार पर यह कदम उठाया है। मुख्य वजह है लिवर को होने वाला गंभीर नुकसान। कई मामलों में यह दवा लिवर फेलियर का कारण बनी है। दुनिया के कई देशों में यह दवा पहले से ही बैन है। भारत में भी लंबे समय से इस पर बहस चल रही थी। आखिरकार सरकार ने जनता की सेहत को प्राथमिकता देते हुए यह सख्त फैसला लिया। आइए, समझते हैं कि निमेसुलाइड क्यों बैन हुई, इसके साइड इफेक्ट क्या हैं, इसका असर मरीजों पर क्या पड़ेगा और अब दर्द-बुखार में कौन सी दवाएं सुरक्षित विकल्प हैं।

निमेसुलाइड क्या है और क्यों थी इतनी लोकप्रिय?

निमेसुलाइड एक नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इन्फ्लेमेटरी ड्रग (NSAID) है। यह दर्द, सूजन और बुखार को कम करने में बहुत तेज काम करती है। 1980 के दशक में यह दवा बाजार में आई और जल्दी ही लोकप्रिय हो गई क्योंकि

  • पैरासिटामॉल से ज्यादा तेज बुखार उतारती है।
  • जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों के दर्द, सिरदर्द, दांत दर्द और पीरियड्स दर्द में राहत देती है।
  • सूजन कम करने में बहुत असरदार है।

भारत में इसके कई ब्रांड नाम हैं जैसे निमुलिड, नाइज, सुमो, निसुलाइड आदि। 100 mg टैबलेट सबसे आम थी। सिरप (सस्पेंशन) रूप में बच्चों को दी जाती थी। डॉक्टर इसे लिखते थे क्योंकि यह तेज असर करती थी। मेडिकल स्टोर पर बिना प्रिस्क्रिप्शन के भी मिल जाती थी। यही वजह है कि इसका इस्तेमाल बहुत ज्यादा हो गया था।

लेकिन तेज असर के साथ इसके गंभीर साइड इफेक्ट भी सामने आने लगे। खासकर लिवर पर भारी पड़ना। कई मामलों में बच्चों और बड़ों में लिवर फेलियर तक हुआ। इसके बाद दुनिया भर में इस पर सवाल उठने लगे।

बैन की मुख्य वजहें क्या हैं?

सरकार ने निमेसुलाइड 100 mg टैबलेट को स्वास्थ्य के लिए खतरा बताते हुए बैन किया है। मुख्य कारण

  1. लिवर को गंभीर नुकसान: यह दवा लिवर पर बहुत भारी पड़ती है। लिवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। कई मामलों में हेपेटोटॉक्सिसिटी (लिवर टॉक्सिसिटी) हुई। कुछ में लिवर फेलियर तक हो गया, जिससे मौत भी हुई
  2. बच्चों में ज्यादा जोखिम: बच्चों का लिवर नाजुक होता है। निमेसुलाइड से रेये सिंड्रोम जैसी दुर्लभ लेकिन घातक स्थिति हो सकती है।
  3. किडनी पर असर: लंबे समय या ज्यादा डोज में किडनी खराब हो सकती है।
  4. अन्य साइड इफेक्ट: पेट में अल्सर, एसिडिटी, ब्लड प्रेशर बढ़ना, एलर्जी, स्किन रैश, सांस की तकलीफ आदि।
  5. विश्व स्तर पर चेतावनी: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे खतरनाक बताया। फिनलैंड, स्पेन, आयरलैंड, सिंगापुर जैसे कई देशों में पूरी तरह बैन है। अमेरिका और ब्रिटेन में कभी अप्रूव ही नहीं हुई।

भारत में भी कोहली कमिटी (2004) ने बच्चों में इसके इस्तेमाल पर रोक की सिफारिश की थी। 2011 में 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बैन किया गया था। लेकिन 100 mg टैबलेट बड़ों में चलती रही। अब सभी अध्ययनों के बाद पूरी तरह बैन कर दिया गया है।

सरकार ने कैसे फैसला लिया?

  • स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्रग टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) से सलाह ली।
  • कई स्वतंत्र अध्ययन और रिपोर्ट्स की समीक्षा हुई।
  • लिवर फेलियर और मौत के मामले सामने आए।
  • विदेशी एजेंसियों की चेतावनी पर गौर किया।
  • अंत में DCGI ने नोटिफिकेशन जारी किया।
  • सभी राज्य ड्रग कंट्रोलर को सख्त निर्देश दिए गए कि दवा बाजार से हटाई जाए।

यह रोक सिर्फ 100 mg ओरल टैबलेट पर है। अन्य फॉर्म जैसे सिरप या इंजेक्शन पर अभी नहीं, लेकिन उन पर भी सख्त निगरानी है।

मरीजों, डॉक्टरों और फार्मासिस्ट पर क्या असर?

  • मरीज: जो लोग नियमित निमेसुलाइड लेते थे, उन्हें अब विकल्प ढूंढना होगा। शुरुआत में थोड़ी परेशानी हो सकती है, लेकिन स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए जरूरी।
  • डॉक्टर: कई डॉक्टर पहले से ही निमेसुलाइड कम लिखते थे। अब पैरासिटामॉल, इबुप्रोफेन जैसे सुरक्षित विकल्प ज्यादा प्रिस्क्राइब करेंगे।
  • फार्मासिस्ट और कंपनियां: स्टॉक वापस करना पड़ेगा। नई दवा बनाने वाली कंपनियों को नुकसान होगा।

अब दर्द और बुखार में क्या लें? सुरक्षित विकल्प

सरकार और डॉक्टरों ने कई सुरक्षित विकल्प सुझाए हैं

  • पैरासिटामॉल (Paracetamol): बुखार और हल्के दर्द में सबसे सुरक्षित। बच्चों को भी दी जा सकती है। ब्रांड: कैलपॉल, क्रोसिन, डोलो आदि।
  • इबुप्रोफेन (Ibuprofen): दर्द और सूजन में अच्छा। बच्चों और बड़ों दोनों के लिए। ब्रांड: ब्रूफेन, इबूसिन।
  • मेफेनामिक एसिड: पीरियड्स दर्द और बुखार में।
  • डिक्लोफेनाक: जोड़ों के गंभीर दर्द में (डॉक्टर की सलाह से)।
  • एस्पिरिन: कुछ मामलों में, लेकिन बच्चों को नहीं।

बच्चों को कभी खुद दवा न दें। डॉक्टर से पूछें। ज्यादा दवा या लंबे समय तक न लें।

सावधानियां और सलाह

  • पुरानी निमेसुलाइड टैबलेट घर से फेंक दें।
  • दवा हमेशा डॉक्टर की सलाह से लें।
  • लिवर या किडनी की समस्या हो तो NSAID दवाएं सावधानी से।
  • बच्चों को पैरासिटामॉल ही दें।
  • ओवरडोज से बचें।
  • अगर कोई साइड इफेक्ट दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।

यह बैन स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए है। इससे कई जानें बच सकती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि तेज असर वाली दवा हमेशा अच्छी नहीं होती। सुरक्षित दवा ही बेहतर है।

Nimesulide Ban: स्वास्थ्य सबसे कीमती है

सरकार ने निमेसुलाइड 100 mg टैबलेट पर रोक लगाकर जनता की सेहत को प्राथमिकता दी है। यह दवा लिवर और किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचाती थी। अब सुरक्षित विकल्पों का इस्तेमाल करें। डॉक्टर की सलाह सबसे जरूरी है। खुद दवा लेकर जोखिम न लें।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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