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नीतीश कुमार का दिल्ली प्लान तैयार: समृद्धि यात्रा खत्म, MLC से इस्तीफा तय, 14 अप्रैल के बाद बिहार को मिलेगा नया मुख्यमंत्री

Nitish Kumar Delhi plan: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा गुरुवार को नालंदा और पटना में संपन्न हुई और इसके साथ ही इस यात्रा का आधिकारिक समापन हो गया। इस यात्रा के जरिए नीतीश कुमार ने बिहार के कई जिलों का दौरा किया और राज्य में विकास कार्यों का जायजा लिया।

यात्रा खत्म होने के बाद अब नीतीश कुमार का पूरा ध्यान दिल्ली की तैयारी पर केंद्रित हो जाएगा। राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद उन्हें अगले महीने की 10 तारीख तक राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेनी है। यह एक कानूनी जरूरत है जिसे तय समय सीमा के भीतर पूरा करना जरूरी है।

MLC से इस्तीफा देना कानूनी जरूरत

नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं। ऐसे में संवैधानिक नियमों के मुताबिक वे एक साथ विधान परिषद और राज्यसभा दोनों के सदस्य नहीं रह सकते। इसलिए यह तय है कि वे अगले पांच दिनों के भीतर बिहार विधान परिषद की सदस्यता से अपना त्यागपत्र दे देंगे।

हालांकि एमएलसी पद से इस्तीफा देने के बाद भी नीतीश कुमार मुख्यमंत्री के पद पर बने रह सकते हैं क्योंकि जब तक नई व्यवस्था नहीं हो जाती तब तक वे कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में काम देखते रहेंगे। यानी बिहार का शासन तंत्र इस बदलाव के दौर में भी बिना किसी रुकावट के चलता रहेगा।

Nitish Kumar Delhi plan: शनिवार से शुरू होंगी जदयू की बैठकें

Nitish Kumar Delhi plan

नीतीश कुमार के आगे के कार्यक्रमों की रूपरेखा लगभग तय हो चुकी है। शुक्रवार को वे रामनवमी के धार्मिक आयोजन में शामिल होंगे। इसके बाद शनिवार से उनकी मौजूदगी में जनता दल यूनाइटेड यानी जदयू की कई बैठकों का सिलसिला शुरू होगा।

सबसे पहले जदयू की प्रदेश इकाई की बैठक होगी जिसमें पार्टी के प्रदेश स्तर के पदाधिकारी शामिल होंगे। यह बैठक मुख्यमंत्री आवास या फिर जदयू के प्रदेश कार्यालय में आयोजित की जाएगी। इसके बाद जदयू की कोर कमेटी की बैठक होगी जिसमें नई सरकार के गठन और उसके स्वरूप पर विस्तार से चर्चा होगी।

विधानसभा अध्यक्ष पद पर जदयू की नजर

इस बार की सरकार में जदयू की दावेदारी सिर्फ मुख्यमंत्री पद तक सीमित नहीं है। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक जदयू की नजर बिहार विधानसभा के अध्यक्ष पद पर भी है। यह एक अहम संवैधानिक पद है और इस पर जदयू का दावा मजबूत माना जा रहा है।

जदयू की कोर कमेटी की बैठक में इस विषय पर भी सहमति बनानी होगी। एनडीए के सहयोगी दलों के साथ इस पर बातचीत होगी और तय किया जाएगा कि विधानसभा अध्यक्ष का पद किसे मिलेगा। यह पूरा समीकरण एनडीए की आंतरिक सियासत का हिस्सा है।

क्या निशांत कुमार बनेंगे उपमुख्यमंत्री?

बिहार की नई सरकार में उपमुख्यमंत्री पद को लेकर भी काफी चर्चा है। राजनीतिक गलियारों में यह बात जोर-शोर से उठ रही है कि निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। हालांकि इस पर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

जानकारों के मुताबिक यह फैसला भी अगले चार से पांच दिनों के भीतर हो जाएगा। जदयू की आंतरिक बैठकों के बाद जब एनडीए की बैठक होगी तब इस पर अंतिम मुहर लगेगी। एनडीए की बैठक में ही यह भी तय होगा कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा और नई सरकार का स्वरूप कैसा होगा।

14 अप्रैल के बाद मिलेगा बिहार को नया मुख्यमंत्री

बिहार की राजनीति में इस वक्त सबसे बड़ा सवाल यही है कि नया मुख्यमंत्री कब और कौन होगा। इस पर राजनीतिक गलियारों में जो चर्चा है उसके मुताबिक नई सरकार का गठन 14 अप्रैल से पहले होने की संभावना बेहद कम है।

इसकी एक बड़ी वजह है खरमास। हिंदू परंपरा में खरमास के दौरान कोई भी शुभ कार्य जैसे शपथ ग्रहण, गृह प्रवेश या विवाह नहीं किया जाता। इस बार खरमास 14 अप्रैल तक चलेगा। इसलिए राजनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह 14 अप्रैल के बाद ही होगा।

तब तक नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर सभी जरूरी काम और फैसले करते रहेंगे। यानी राज्य की प्रशासनिक मशीनरी बिना किसी रुकावट के चलती रहेगी।

नीतीश का दिल्ली जाना क्या मायने रखता है?

नीतीश कुमार का राज्यसभा सदस्य बनना और दिल्ली जाना बिहार की सियासत के लिए एक बड़ा बदलाव है। वे लंबे समय से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे हैं और उनके दिल्ली जाने के बाद राज्य की सत्ता की कमान नए हाथों में होगी।

राष्ट्रीय स्तर पर नीतीश कुमार की भूमिका अब और बड़ी होगी। राज्यसभा में उनकी मौजूदगी से एनडीए को मजबूती मिलेगी और जदयू का केंद्र की राजनीति में असर भी बढ़ेगा। दिल्ली में रहकर वे केंद्र सरकार के साथ बिहार के हितों को लेकर और असरदार तरीके से काम कर सकेंगे।

जदयू के लिए यह बदलाव कितना अहम?

जदयू के लिए यह पूरा बदलाव बेहद महत्वपूर्ण है। पार्टी को एक साथ कई मोर्चों पर काम करना होगा। एक तरफ नए मुख्यमंत्री का चेहरा तय करना है तो दूसरी तरफ एनडीए के सहयोगी दलों के साथ तालमेल बनाए रखना भी जरूरी है। विधानसभा अध्यक्ष पद और उपमुख्यमंत्री पद पर भी सहमति बनानी है।

जदयू की आने वाले दिनों में होने वाली बैठकें यह तय करेंगी कि पार्टी इन सभी मुद्दों पर किस दिशा में आगे बढ़ती है। पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की नजरें अब इन्हीं बैठकों पर टिकी हैं।

आगे क्या होगा?

फिलहाल जो तस्वीर सामने है उसके मुताबिक अगले कुछ दिन बिहार की राजनीति के लिए बेहद अहम रहेंगे। नीतीश कुमार एमएलसी पद से इस्तीफा देंगे, जदयू और एनडीए की बैठकें होंगी, नए मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चा होगी और 14 अप्रैल के बाद शपथ ग्रहण की संभावना है।

बिहार की जनता की नजरें इस पूरी प्रक्रिया पर लगी हैं। नया मुख्यमंत्री कौन होगा और नई सरकार की प्राथमिकताएं क्या होंगी यह सवाल अभी अनुत्तरित हैं। लेकिन इतना तय है कि बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होने वाला है।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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