Jharkhand News: झारखंड में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए एक महत्वाकांक्षी पहल शुरू की जा रही है। राज्य सरकार ने पीएम श्री स्कूलों को मॉडल शिक्षण संस्थानों के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत प्रत्येक जिले के तीन तीन पीएम श्री स्कूलों को मेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा गठित राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई यानी स्टेट पीएमयू द्वारा राज्य के 24 जिलों से कुल 144 उच्च प्रदर्शन वाले स्कूलों की पहचान की जाएगी।
यह पहल न केवल चयनित विद्यालयों के बुनियादी ढांचे में सुधार लाएगी बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता को भी उच्च मानकों तक पहुंचाने का काम करेगी। इन मेंटर स्कूलों का उद्देश्य अन्य पीएम श्री स्कूलों के लिए एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करना होगा जिससे पूरे राज्य में शैक्षिक मानकों में व्यापक सुधार संभव हो सके।
चयन प्रक्रिया और मानदंड
राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई द्वारा प्रत्येक जिले में उच्च प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों की सूची तैयार की जाएगी। इस सूची में विभिन्न मापदंडों के आधार पर स्कूलों का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद प्रत्येक जिले को अपने जिले के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले तीन स्कूलों का चयन करना होगा। यह चयन राज्य पीएमयू द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली सूची के आधार पर किया जाएगा।
चयन के मानदंडों में शैक्षणिक परिणाम, बुनियादी ढांचे की स्थिति, शिक्षकों की गुणवत्ता, छात्र उपस्थिति दर, नवाचारी शिक्षण विधियां और सामुदायिक भागीदारी जैसे विभिन्न पहलुओं को शामिल किया जाएगा। केवल वे विद्यालय चुने जाएंगे जो इन सभी मापदंडों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हों। यह सुनिश्चित करने के लिए कि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी हो, एक विशेष समिति गठित की जाएगी जो सभी आंकड़ों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करेगी।
चयनित स्कूलों को विशेष सहायता
सभी जिलों से कुल 72 विद्यालयों का चयन करने के बाद उन्हें गहन निगरानी, सतत मार्गदर्शन एवं मेंटरिंग प्रदान की जाएगी। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चयनित विद्यालय अन्य पीएम श्री स्कूलों के लिए सीखने और अपनाने योग्य मानक के साथ मेंटर स्कूल बन सकें। इन विद्यालयों को विशेष संसाधन, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
चयनित मेंटर स्कूलों को नियमित रूप से शैक्षणिक विशेषज्ञों, प्रशिक्षकों और शिक्षा अधिकारियों के दल भेजे जाएंगे जो विद्यालय के समग्र विकास में सहायता करेंगे। इन स्कूलों में शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे जिनमें आधुनिक शिक्षण विधियां, प्रौद्योगिकी का उपयोग, छात्र केंद्रित शिक्षा और समावेशी शिक्षा जैसे विषयों पर ध्यान दिया जाएगा।
बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए इन विद्यालयों को प्राथमिकता के आधार पर वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी, विज्ञान प्रयोगशालाएं, खेल सुविधाएं और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इसके अलावा शिक्षण सामग्री, पुस्तकें और डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
नियमित निगरानी और मूल्यांकन
इन स्कूलों की प्रगति की नियमित निगरानी की जाएगी ताकि गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। एक व्यापक निगरानी तंत्र स्थापित किया जाएगा जिसमें मासिक समीक्षा बैठकें, त्रैमासिक मूल्यांकन और वार्षिक प्रदर्शन रिपोर्ट शामिल होंगी। प्रत्येक मेंटर स्कूल को निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करना होगा और नियमित रूप से अपनी प्रगति रिपोर्ट जमा करनी होगी।
निगरानी प्रक्रिया में शैक्षणिक प्रदर्शन, बुनियादी ढांचे का उपयोग, शिक्षक उपस्थिति, छात्र संतुष्टि और अभिभावक प्रतिक्रिया जैसे विभिन्न पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा। यदि कोई स्कूल अपेक्षित प्रगति नहीं कर रहा है तो उसे अतिरिक्त सहायता प्रदान की जाएगी और यदि आवश्यक हो तो सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी।
डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी निगरानी की जाएगी जहां सभी डेटा रीयल टाइम में अपडेट किए जाएंगे। इससे समस्याओं की शीघ्र पहचान और समाधान संभव हो सकेगा। राज्य स्तर पर एक डैशबोर्ड विकसित किया जाएगा जो सभी 72 मेंटर स्कूलों के प्रदर्शन की तुलनात्मक जानकारी प्रदान करेगा।
पीएम श्री योजना का उद्देश्य

झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के निदेशक शशि रंजन के अनुसार पीएम श्री का उद्देश्य केवल स्कूलों को अपग्रेड करना नहीं है बल्कि ऐसे मॉडल स्कूल विकसित करना है जहां बच्चों को उत्कृष्ट, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा सके। इसी स्पष्ट सोच के साथ पीएम श्री आदर्श विद्यालय पहल शुरू की गई है।
यह योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका लक्ष्य ऐसे स्कूल बनाना है जो न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता में बल्कि व्यक्तित्व विकास, जीवन कौशल, नैतिक मूल्यों और नागरिक जिम्मेदारियों में भी अग्रणी हों। ये स्कूल बच्चों को 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करेंगे।
पीएम श्री स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सभी प्रमुख तत्वों को लागू किया जाएगा। इनमें प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा, बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता, बहुभाषी शिक्षा, कला एकीकृत शिक्षा, खेल एकीकृत शिक्षा, अनुभवात्मक शिक्षा, कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा जैसे पहलू शामिल होंगे।
समावेशी शिक्षा पर विशेष जोर
मेंटर स्कूलों में समावेशी शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चे, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के बच्चों को समान गुणवत्ता की शिक्षा मिले। इसके लिए विशेष शिक्षकों की नियुक्ति, सहायक उपकरणों की व्यवस्था और बाधा मुक्त वातावरण का निर्माण किया जाएगा।
लड़कियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जाएंगे। सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित किया जाएगा जिससे अधिक से अधिक लड़कियां विद्यालय में नामांकन लें और अपनी शिक्षा पूरी करें। महिला शिक्षकों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा।
आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम और शिक्षण विधियों में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और भाषाओं को शिक्षा में समुचित स्थान दिया जाएगा। इससे बच्चे अपनी जड़ों से जुड़े रहेंगे और साथ ही आधुनिक ज्ञान भी प्राप्त करेंगे।
मेंटर स्कूल की भूमिका
चयनित मेंटर स्कूल अन्य पीएम श्री स्कूलों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का केंद्र बनेंगे। इन स्कूलों में विकसित की गई सर्वोत्तम प्रथाओं को दूसरे स्कूलों में दोहराया जाएगा। मेंटर स्कूल के शिक्षक और प्रधानाचार्य अन्य स्कूलों के साथ अपने अनुभव और ज्ञान साझा करेंगे।
नियमित रूप से इन मेंटर स्कूलों में अन्य स्कूलों के शिक्षकों और प्रबंधकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में प्रतिभागी वास्तविक कक्षा वातावरण में सीख सकेंगे और प्रभावी शिक्षण तकनीकों को देख सकेंगे। मेंटर स्कूल एक जीवंत प्रयोगशाला के रूप में कार्य करेंगे जहां नए विचारों का परीक्षण और कार्यान्वयन किया जाएगा।
इन स्कूलों में शैक्षिक नवाचारों को प्रोत्साहित किया जाएगा। शिक्षकों को रचनात्मक और अभिनव शिक्षण विधियां विकसित करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। सफल प्रयोगों को दस्तावेजीकृत किया जाएगा और राज्य भर में प्रसारित किया जाएगा।
सामुदायिक भागीदारी
मेंटर स्कूलों के विकास में समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। अभिभावक शिक्षक संघ, स्कूल प्रबंधन समिति और ग्राम शिक्षा समिति को सशक्त बनाया जाएगा। स्थानीय समुदाय के सदस्यों को स्कूल के विकास में सार्थक योगदान देने के अवसर प्रदान किए जाएंगे।
समुदाय के सदस्य अपने कौशल और विशेषज्ञता को स्कूल में साझा कर सकेंगे। स्थानीय कारीगर, कलाकार, किसान और व्यवसायी छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान कर सकेंगे। यह बच्चों को वास्तविक दुनिया की समझ विकसित करने में मदद करेगा।
अभिभावकों को नियमित रूप से स्कूल की गतिविधियों में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। अभिभावक शिक्षक बैठकें, खुली कक्षाएं और अभिभावक कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इससे घर और स्कूल के बीच मजबूत संबंध स्थापित होंगे।
Jharkhand News: दीर्घकालीन प्रभाव और लाभ
इस पहल के माध्यम से पीएम श्री स्कूल केवल ढांचागत उन्नयन नहीं बल्कि पूरे राज्य के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का मानक बन सकेंगे। जब 72 मेंटर स्कूल उत्कृष्टता के स्तर तक पहुंचेंगे तो उनका प्रभाव धीरे धीरे अन्य स्कूलों में भी फैलेगा। यह एक श्रृंखला प्रतिक्रिया की तरह काम करेगा जो पूरे राज्य की शिक्षा व्यवस्था को बदल देगी।
बेहतर शिक्षा से राज्य के युवाओं में कौशल और क्षमता का विकास होगा। वे रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त कर सकेंगे या अपना खुद का उद्यम शुरू कर सकेंगे। शिक्षित युवा समाज में सकारात्मक बदलाव के वाहक बनेंगे।
लंबे समय में यह पहल झारखंड के समग्र विकास में योगदान देगी। शिक्षा गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य सुधार और सामाजिक न्याय का सबसे प्रभावी साधन है। जब राज्य का हर बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करेगा तो समाज में समानता और समृद्धि आएगी।
शिक्षा क्रांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम
झारखंड में पीएम श्री मेंटर स्कूलों की यह पहल राज्य में शिक्षा क्रांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 72 विद्यालयों को मॉडल के रूप में विकसित कर पूरे राज्य में शैक्षिक उत्कृष्टता के नए मानक स्थापित किए जाएंगे। यह योजना न केवल चयनित स्कूलों बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था को बदलने की क्षमता रखती है। सभी हितधारकों को इस पहल को सफल बनाने के लिए मिलकर काम करना होगा ताकि झारखंड का हर बच्चा बेहतर शिक्षा और उज्जवल भविष्य प्राप्त कर सके।



