Jharkhand Nikay Chunav: झारखंड में फरवरी माह में होने वाले नगर निकाय चुनावों की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। चुनाव आयोग की औपचारिक तैयारियों के साथ-साथ राजनीतिक दलों और स्वतंत्र उम्मीदवारों ने भी मैदान में उतरना शुरू कर दिया है। गोड्डा शहर में अब चुनावी माहौल साफ नजर आने लगा है। सड़कों पर पोस्टर लग रहे हैं और सोशल मीडिया पर भी जमकर बहस हो रही है।
पोस्टर और होर्डिंग से भरी सड़कें
गोड्डा की सड़कों पर अब संभावित उम्मीदवारों के बड़े-बड़े होर्डिंग और पोस्टर लग गए हैं। मुख्य चौक-चौराहों पर कई दावेदारों के पोस्टर दिख रहे हैं। कुछ उम्मीदवार अपनी पार्टी की योजनाओं का प्रचार कर रहे हैं तो कुछ अपनी तस्वीर लगाकर लोगों को शुभकामनाएं दे रहे हैं।
त्योहारी सीजन का फायदा उठाते हुए कई दावेदार बधाई के बहाने अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। एलईडी प्रचार वाहन भी सड़कों पर घूम रहे हैं। कुछ उम्मीदवारों ने तो क्षेत्र में घर-घर जाकर जनसंपर्क भी शुरू कर दिया है। लोगों के सुख-दुख में शामिल होकर और छोटी-छोटी सभाएं करके वे अपनी बात जनता तक पहुंचा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर भी जंग
इंटरनेट और सोशल मीडिया पर भी चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं। संभावित उम्मीदवार अपने सोशल मीडिया हैंडल पर सक्रिय हो गए हैं। कोई बेहतर और विकसित शहर बनाने का वादा कर रहा है तो कोई मौजूदा नेतृत्व को ही दोबारा मौका देने की अपील कर रहा है।
कई दावेदारों ने अपने सोशल मीडिया हैंडल संभालने के लिए विशेष प्रतिनिधि भी रख लिए हैं। पोस्ट और कमेंट में समर्थक अपने-अपने नेताओं के पक्ष में तरह-तरह के तर्क दे रहे हैं। कुछ उम्मीदवार अपनी उपलब्धियां गिना रहे हैं तो कुछ विरोधियों की कमियां निकाल रहे हैं। यह डिजिटल युद्ध धीरे-धीरे तीखा होता जा रहा है।
Jharkhand Nikay Chunav: राजनीतिक दलों की तैयारी
हालांकि नगर निकाय चुनाव दलीय आधार पर नहीं होते, फिर भी भाजपा, कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रीय जनता दल जैसा प्रमुख राजनीतिक दल खुलकर इसमें भाग ले रहे हैं। गोड्डा की राजनीति में इन चारों दलों की मजबूत पकड़ है।
भाजपा ने घोषणा की है कि चौबीस जनवरी को प्रदेश कमेटी निकाय चुनाव की रणनीति तय करेगी। झामुमो भी पूरे दमखम के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में है। कांग्रेस और राजद के कार्यकर्ता भी फीडबैक ले रहे हैं और संभावित उम्मीदवारों की सूची बना रहे हैं।
राज्य की सत्ताधारी पार्टी होने के नाते झामुमो इस बार जीत के लिए पूरी ताकत झोंकना चाहती है। वहीं भाजपा भी पिछली हार का बदला लेने के मूड में है। ऐसे में सभी दल पर्दे के पीछे चुनावी शतरंज की बिसात बिछा रहे हैं।
आरक्षण ने बदली तस्वीर
गोड्डा नगर परिषद में अध्यक्ष का पद बीसी वन यानी पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। वहीं महागामा नगर पंचायत में अध्यक्ष का पद जनजातीय वर्ग के लिए आरक्षित है। आरक्षण की इस घोषणा के बाद कई संभावित उम्मीदवारों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
जो लोग खुद को प्रबल दावेदार मान रहे थे, वे अब अपनी जाति के कारण चुनाव नहीं लड़ सकते। ऐसे में उन्हें अपनी जाति के किसी उम्मीदवार को समर्थन देना होगा। यह स्थिति राजनीतिक समीकरणों को जटिल बना रही है।
गोड्डा नगर परिषद के दावेदार
गोड्डा नगर परिषद अध्यक्ष पद के लिए मौजूदा अध्यक्ष जितेंद्र कुमार उर्फ गुड़्डू मंडल एक बार फिर मैदान में हैं। उन्होंने पोस्टरबाजी और एलईडी प्रचार वाहन के जरिए जोरदार प्रचार शुरू कर दिया है।
इसके अलावा झामुमो नेता राजेश मंडल, चैंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव मोहम्मद कामरान, समाजसेवी मुकेश कुमार, राजद नेत्री नीलम साह, सामाजिक कार्यकर्ता प्रखर मंडल और राजेश साह उर्फ राजू भी दावेदारी में हैं।
नारायण मंडल, प्रितेश नंदन, भाजपा नेता सौरभ सुमन, मौजूदा पार्षद विनोद मंडल, मुन्ना पंडित, जफर सुपाड़ी, छोटे मियां और अनुशंकर मंडल उर्फ काजू के नाम भी चर्चा में हैं। इस तरह दर्जन भर से अधिक लोगों ने अध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी ठोक दी है।
महागामा में एसटी उम्मीदवारों की होड़
महागामा नगर पंचायत में अध्यक्ष पद जनजातीय वर्ग के लिए आरक्षित होने से यहां सिर्फ एसटी उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकते हैं। इस श्रेणी में भाजपा नेता प्रबोध सोरेन, सामाजिक कार्यकर्ता दुर्गा सोरेन, सागर सोरेन और सीमा टुडू के नाम सामने आए हैं।
यहां दलीय समर्थन को लेकर जोड़-तोड़ की राजनीति शुरू हो गई है। हर उम्मीदवार किसी न किसी राजनीतिक दल का समर्थन हासिल करने की कोशिश में जुटा है। समर्थन मिलने से न केवल चुनाव लड़ना आसान हो जाता है बल्कि जीतने की संभावना भी बढ़ जाती है।
माहौल बनाने की कोशिश
राजनीतिक दलों के नेताओं के दौरे और उनके बयान धीरे-धीरे चुनावी माहौल बना रहे हैं। हर मोहल्ले, हर चौराहे पर अब चुनाव की चर्चा होने लगी है। लोग अनुमान लगा रहे हैं कि इस बार कौन जीतेगा।
दावेदार भी चुप नहीं बैठे हैं। वे अपनी दावेदारी पेश करने का कोई मौका नहीं गंवा रहे हैं। कोई अपने विकास कार्यों की चर्चा कर रहा है तो कोई भविष्य की योजनाओं का खाका खींच रहा है।
चाय की दुकानों से लेकर बाजारों तक हर जगह चुनाव की बातें हो रही हैं। युवा सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं जबकि बुजुर्ग आमने-सामने बैठकर चर्चा कर रहे हैं। गोड्डा में चुनावी हवा पूरी तरह बहने लगी है और आने वाले दिनों में यह और तेज होने वाली है।



