SIR in West Bengal: पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच राजनीतिक जंग का नया दौर शुरू हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के सोमवार को आए एक फैसले के बाद टीएमसी के नेता अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि बीजेपी का SIR का खेल पूरी तरह खत्म हो गया है। टीएमसी इस फैसले को अपनी बड़ी जीत मान रही है जबकि बीजेपी ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा है कि चुनाव आयोग अपना काम सही तरीके से कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाने वाली टीएमसी नेताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण आदेश दिया। अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह हर तालुका के ग्राम पंचायत भवन और ब्लॉक ऑफिस के साथ-साथ वार्ड ऑफिस में लॉजिकल गड़बड़ियों के लिए समन जारी किए गए लोगों के नाम सार्वजनिक करे।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रभावित मतदाताओं को अपने अधिकृत प्रतिनिधि जैसे बूथ लेवल असिस्टेंट के माध्यम से अपने दस्तावेज या आपत्ति जमा करने की अनुमति दी जाए। यह आदेश उन लाखों मतदाताओं के लिए राहत की खबर है जिन्हें लॉजिकल गड़बड़ियों के नाम पर नोटिस भेजे गए थे।
अदालत का यह फैसला SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब प्रभावित मतदाता यह जान सकेंगे कि किन कारणों से उनके नाम पर सवाल उठाए गए हैं और वे अपना पक्ष रखने का मौका पा सकेंगे।
अभिषेक बनर्जी का बड़ा दावा

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने कहा कि बीजेपी की साजिश पूरी तरह से नाकाम हो गई है। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी एक करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटवाना चाहती थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने यह योजना विफल कर दी।
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि आज मैं बहुत खुश हूं। सुप्रीम कोर्ट ने हमारी मांग मान ली है और लॉजिकल गड़बड़ियों की सूची प्रकाशित करने का आदेश जारी किया है। एक बार सूची सार्वजनिक हो जाने के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी। उन्होंने कहा कि बूथ लेवल असिस्टेंट को भी सुनवाई केंद्र में आने की अनुमति मिलेगी जो एक बड़ी राहत है।
टीएमसी नेता ने यह भी कहा कि बीजेपी का SIR खेल पूरी तरह खत्म हो गया है। मतदाता सूची से हटाए जाने वाले एक करोड़ नाम बचा लिए गए हैं और यह जीत बंगाल के लोगों की है। यह मां माटी मानुष और पश्चिम बंगाल के लोगों की उन लोगों पर जीत है जिन्होंने एक करोड़ लोगों को चुनकर उनके नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की।
तृणमूल का आरोप
अभिषेक बनर्जी ने अपने बयान में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उन लोगों के मुंह पर दो जोरदार तमाचे मारे हैं जिन्होंने न केवल पश्चिम बंगाल के लोगों को भूखा रखने की कोशिश की बल्कि उन्हें वोट देने के उनके बुनियादी अधिकार से भी वंचित करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि हमने आज उन्हें अदालत में हरा दिया है और अप्रैल में चुनावों में भी हराएंगे।
तृणमूल नेता ने कहा कि पश्चिम बंगाल उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश या गुजरात नहीं है। इस राज्य ने देश के स्वतंत्रता संग्राम और पुनर्जागरण का रास्ता दिखाया है। हम बाहरी लोगों के सामने सिर नहीं झुकाते।
बता दें कि बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया था कि SIR में एक करोड़ बांग्लादेशियों और रोहिंग्या के नाम काटे जाएंगे। हालांकि जब ड्राफ्ट सूची प्रकाशित हुई तो उसमें लगभग अट्ठावन लाख मतदाताओं के नाम नहीं थे। इस पर टीएमसी ने आरोप लगाया कि बीजेपी झूठे दावे कर रही है और असल में वास्तविक भारतीय मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं।
बीजेपी ने खारिज किया दावा
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस के सभी दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि हम चाहते हैं कि मतदाता सूची साफ और सही हो। जिन्हें वोट देने का अधिकार है उनके नाम सूची में जोड़े जाएं और जिन्हें नहीं है उनके नाम इससे हटा दिए जाएं।
दिलीप घोष ने कहा कि यह प्रक्रिया ठीक से चल रही है लेकिन टीएमसी बार-बार इसमें रुकावट डाल रही है। कभी अदालत जाकर तो कभी चुनाव आयोग को परेशान करके। हालांकि चुनाव आयोग इस बारे में गंभीर है और काम ठीक से हो रहा है।
बीजेपी का तर्क है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को साफ करना है ताकि फर्जी और दोहरे मतदाताओं की पहचान की जा सके। पार्टी का आरोप है कि पश्चिम बंगाल में लाखों बांग्लादेशी घुसपैठिए मतदाता सूची में शामिल हैं और उन्हें हटाना जरूरी है।
SIR in West Bengal: अभिषेक बनर्जी मुख्य चुनाव अधिकारी से मिलेंगे
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात के बाद अब अभिषेक बनर्जी सत्ताईस जनवरी को कोलकाता में राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी से मुलाकात करेंगे। वे दस लोगों के प्रतिनिधिमंडल के साथ मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल से मिलेंगे।
तृणमूल ने मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय में एक आवेदन-ईमेल भेजकर समय मांगा है। सूत्रों के अनुसार तृणमूल ने बंगाल की मतदाता सूची के विशेष संशोधन को ध्यान में रखते हुए इस बैठक की मांग की है।
इससे पहले इकत्तीस दिसंबर को अभिषेक बनर्जी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिले थे। उस बैठक में उन्होंने लॉजिकल विसंगति के नाम पर लोगों को परेशान किए जाने की शिकायत की थी। उनकी मुख्य चुनाव आयुक्त से तीखी बहस भी हुई थी।
SIR प्रक्रिया क्या है?
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR मतदाता सूची को अद्यतन और शुद्ध करने की एक विशेष प्रक्रिया है। इसमें हर मतदाता के विवरण की गहन जांच की जाती है। जन्म तिथि, पता, परिवार के सदस्यों की जानकारी जैसे सभी विवरणों का मिलान किया जाता है।
अगर किसी मतदाता के विवरण में कोई लॉजिकल विसंगति पाई जाती है तो उसे नोटिस भेजा जाता है। उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति की उम्र अठारह साल से कम दिखाई दे रही है या किसी परिवार में सदस्यों की संख्या असामान्य रूप से ज्यादा है तो इसे लॉजिकल विसंगति माना जाता है।
पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया के दौरान लाखों मतदाताओं को नोटिस भेजे गए जिससे बड़ा विवाद खड़ा हो गया। टीएमसी का आरोप है कि यह प्रक्रिया राजनीतिक उद्देश्यों से की जा रही है जबकि बीजेपी का कहना है कि यह मतदाता सूची को साफ करने के लिए जरूरी है।
अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देखना होगा कि वास्तव में कितने मतदाताओं के नाम लॉजिकल विसंगति के आधार पर प्रभावित हुए हैं और इस पूरी प्रक्रिया में कोई राजनीतिक पक्षपात था या नहीं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा बंगाल की राजनीति में और भी गरमाने वाला है।



