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स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन पर सियासत तेज, TDP ने चुनाव आयोग को सौंपा ज्ञापन

बिहार में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। चुनाव आयोग के इस विशेष अभियान के तहत राज्य में 88% कार्य सोमवार तक पूरा किया जा चुका है। हालांकि, अब एनडीए के ही घटक दल तेलुगू देशम पार्टी (TDP) ने इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं।

TDP ने आयोग को सौंपा ज्ञापन

टीडीपी संसदीय दल के नेता लावु श्री कृष्ण देवरायलु ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र भेजकर आयोग से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के उद्देश्य और प्रक्रिया को स्पष्ट करने की मांग की है। पत्र में उन्होंने लिखा है कि, “SIR का उद्देश्य केवल मतदाता सूची के शुद्धिकरण तक सीमित होना चाहिए और यह प्रक्रिया नागरिकता प्रमाणन से जुड़ी नहीं होनी चाहिए, जब तक किसी खास व्यक्ति के खिलाफ शिकायत न हो।”

बिहार का नाम नहीं, लेकिन इशारा साफ

हालांकि टीडीपी के ज्ञापन में सीधे तौर पर बिहार का उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन जिस समय और पैमाने पर बिहार में यह प्रक्रिया हो रही है, उससे स्पष्ट है कि पार्टी की चिंता उसी से जुड़ी है। गौरतलब है कि बिहार में यह पुनरीक्षण प्रक्रिया करीब दो दशकों बाद इतनी व्यापक स्तर पर हो रही है, और वह भी राज्य विधानसभा चुनावों से पहले, जिससे सियासी बहस गर्मा गई है।

विपक्ष का आरोप – “NRC की छाया”

बिहार में महागठबंधन समेत तमाम विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के ज़रिए दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और गरीब वर्गों के मताधिकार पर हमला किया जा रहा है। उनका कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के नाम पर एनआरसी (NRC) जैसी प्रणाली को छिपे तौर पर लागू किया जा रहा है, जिसमें नागरिकता से जुड़े दस्तावेज मांगे जा रहे हैं।

आंध्र प्रदेश में TDP की मांग

टीडीपी नेता देवरायलु ने यह भी कहा कि अगर आंध्र प्रदेश में 2029 में होने वाले चुनावों के लिए SIR कराना है तो इसे जल्द शुरू किया जाना चाहिए, जिससे मतदाताओं को पूरा समय मिल सके। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब किसी राज्य में आगामी वर्षों में चुनाव नहीं होने हैं, वहां SIR को समय रहते और पारदर्शी तरीके से किया जाना चाहिए।

चुनाव आयोग की भूमिका पर निगाहें

राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब सबकी निगाहें चुनाव आयोग पर टिक गई हैं कि वह इस मुद्दे पर क्या स्थिति स्पष्ट करता है। खासकर तब, जब खुद एनडीए के एक प्रमुख सहयोगी दल ने ही गंभीर आपत्ति जताई है।

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