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पश्चिम बंगाल में नक्सली समर्थक पोस्टर मिलने से हड़कंप, हिड़मा के समर्थन में लगाए नारे, नक्सलियों की रिहाई की मांग

West Bengal News: पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में नक्सली समर्थक पोस्टर मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया है। तालडांगरा और ओंदा थाना क्षेत्रों में चिपकाए गए इन पोस्टरों में मारे गए नक्सली कमांडर हिड़मा को श्रद्धांजलि अर्पित की गई है और सरकार के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष छेड़ने का आह्वान किया गया है। इसके साथ ही जेल में बंद नक्सलियों की रिहाई की मांग भी की गई है। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पोस्टर फाड़ दिए और पूरे इलाके में सतर्कता बढ़ा दी है।

कहां-कहां मिले नक्सली पोस्टर

West Bengal News
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बांकुड़ा जिले के तालडांगरा और ओंदा थाना क्षेत्र के कई गांवों और सार्वजनिक स्थानों पर रविवार रात या सोमवार तड़के ये पोस्टर चिपकाए गए। स्थानीय लोगों ने सुबह जब इन पोस्टरों को देखा तो तुरंत पुलिस को सूचित किया।

पोस्टर मुख्य रूप से सड़कों के किनारे, बिजली के खंभों, सरकारी इमारतों की दीवारों और पेड़ों पर चिपकाए गए थे। कुछ पोस्टर स्कूलों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के पास भी मिले। पोस्टरों की भाषा बांग्ला और हिंदी दोनों में थी, जिससे साफ है कि इन्हें व्यापक प्रचार के लिए तैयार किया गया था।

पोस्टरों में क्या लिखा था

पोस्टरों में मुख्य रूप से तीन संदेश थे:

1. हिड़मा को श्रद्धांजलि: पोस्टरों में छत्तीसगढ़ के नक्सली कमांडर हिड़मा को “शहीद” बताया गया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। हिड़मा की मौत सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में हुई थी। पोस्टरों में लिखा था, “शहीद हिड़मा को लाल सलाम” और “हिड़मा के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा।”

2. सशस्त्र संघर्ष का आह्वान: पोस्टरों में सरकार के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया गया। “जनता के शत्रुओं को उखाड़ फेंको” और “सशस्त्र क्रांति ही एकमात्र रास्ता है” जैसे नारे लिखे थे। इनमें किसानों, मजदूरों और आदिवासियों को “शोषण के खिलाफ उठ खड़े होने” के लिए कहा गया था।

3. नक्सलियों की रिहाई की मांग: पोस्टरों में जेलों में बंद नक्सलियों को “राजनीतिक कैदी” बताते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की गई। कुछ नक्सली नेताओं के नाम भी लिए गए जिन्हें विभिन्न राज्यों की जेलों में रखा गया है।

पोस्टरों के नीचे CPI (Maoist) के झुंझलाहट प्रादेशिक समिति का नाम लिखा था, हालांकि पुलिस ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है।

पुलिस की तत्काल कार्रवाई

पोस्टरों की सूचना मिलते ही बांकुड़ा पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। पुलिस टीमों ने दोनों थाना क्षेत्रों में जाकर सभी पोस्टर फाड़ डाले। इलाके में सघन गश्त शुरू कर दी गई और सभी नाकों पर सतर्कता बढ़ा दी गई।

बांकुड़ा के पुलिस अधीक्षक ने कहा, “हमने सभी पोस्टर हटा दिए हैं और इस मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। हम उन लोगों को पकड़ने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं जिन्होंने ये पोस्टर लगाए। खुफिया तंत्र को सक्रिय किया गया है और CCTV फुटेज की भी जांच की जा रही है।”

पुलिस ने स्थानीय लोगों से भी पूछताछ शुरू कर दी है। रात के समय किसी संदिग्ध गतिविधि को देखने वाले लोगों से जानकारी ली जा रही है। साइबर सेल को भी मामले में शामिल किया गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या सोशल मीडिया पर भी इस तरह का कोई प्रचार किया गया है।

स्थानीय लोगों में दहशत

इन पोस्टरों से स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई है। कई ग्रामीणों ने कहा कि वे डरे हुए हैं क्योंकि इससे लगता है कि नक्सली गतिविधियां फिर से शुरू हो सकती हैं।

तालडांगरा के एक स्थानीय निवासी ने कहा, “हम सुबह जब उठे तो हर जगह ये पोस्टर चिपके थे। यह बहुत डरावना था। हमने तुरंत पुलिस को फोन किया। हम नहीं चाहते कि हमारे इलाके में नक्सली गतिविधियां शुरू हों।”

एक अन्य ग्रामीण ने कहा, “पिछले कई सालों से यहां शांति थी। अब अचानक ये पोस्टर आना चिंताजनक है। सरकार और पुलिस को इस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।”

पश्चिम बंगाल में नक्सली गतिविधियों का इतिहास

पश्चिम बंगाल में नक्सली आंदोलन की जड़ें गहरी हैं। 1960 और 1970 के दशक में नक्सलबाड़ी आंदोलन यहीं से शुरू हुआ था। जुंगलमहल क्षेत्र, जिसमें बांकुड़ा, पुरुलिया, पश्चिम मिदनापुर जैसे जिले आते हैं, लंबे समय तक नक्सली गतिविधियों का केंद्र रहा है।

2000 के दशक में जुंगलमहल में नक्सली हिंसा अपने चरम पर थी। सुरक्षा बलों के साथ लगातार मुठभेड़ें होती थीं। लेकिन 2011 के बाद जब ममता बनर्जी सत्ता में आईं, तो राज्य सरकार ने “विकास के साथ सुरक्षा” का मॉडल अपनाया। इसके तहत इन इलाकों में विकास कार्य तेज किए गए और साथ ही सुरक्षा बलों की तैनाती भी बढ़ाई गई।

पिछले कुछ सालों में जुंगलमहल में नक्सली गतिविधियां काफी कम हो गई थीं। कई नक्सली आत्मसमर्पण भी कर चुके हैं। लेकिन अब ये पोस्टर मिलना चिंता का विषय बना हुआ है।

झारखंड-छत्तीसगढ़ से संबंध की आशंका

खुफिया सूत्रों के अनुसार, ये पोस्टर पश्चिम बंगाल के नक्सली संगठनों के बजाय झारखंड या छत्तीसगढ़ के नक्सली गुटों द्वारा लगाए गए हो सकते हैं। हिड़मा छत्तीसगढ़ का नक्सली कमांडर था, इसलिए यह संभावना है कि उसके समर्थक पश्चिम बंगाल में भी सक्रिय हो सकते हैं।

बांकुड़ा जिला झारखंड की सीमा से लगा हुआ है। झारखंड के कुछ हिस्सों में अभी भी नक्सली गतिविधियां जारी हैं। खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि झारखंड के नक्सली अपना प्रभाव क्षेत्र बढ़ाने के लिए पश्चिम बंगाल में घुसपैठ की कोशिश कर सकते हैं।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “हम झारखंड और छत्तीसगढ़ पुलिस के संपर्क में हैं। हम मिलकर इस मामले की जांच कर रहे हैं। यह देखना होगा कि ये पोस्टर किसने और क्यों लगाए।”

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

पश्चिम बंगाल में नक्सली पोस्टर मिलने पर राजनीतिक दलों ने भी प्रतिक्रियाएं दी हैं। विपक्ष ने राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था विफल होने का आरोप लगाया है।

भाजपा के एक नेता ने कहा, “यह ममता सरकार की विफलता है। नक्सली फिर से सिर उठा रहे हैं और सरकार सो रही है। यह राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा है।”

कांग्रेस ने भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार को इस मामले में तत्काल और कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। एक तृणमूल नेता ने कहा, “यह कुछ असामाजिक तत्वों की करतूत हो सकती है जो शांति भंग करना चाहते हैं। हमारी पुलिस पूरी तरह सतर्क है और जल्द ही दोषियों को पकड़ लिया जाएगा।”

सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई

पोस्टर मिलने के बाद पूरे जुंगलमहल क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। सभी थानों को अलर्ट पर रखा गया है। ग्रामीण इलाकों में गश्त की संख्या बढ़ाई गई है।

पुलिस ने स्थानीय सूचनादाताओं को सक्रिय कर दिया है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने के लिए ग्रामीणों से अपील की गई है। सीमावर्ती इलाकों में विशेष रूप से निगरानी बढ़ाई गई है।

एसपी ने कहा, “हम किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हमारे जवान पूरी सतर्कता से काम कर रहे हैं। जनता को घबराने की कोई जरूरत नहीं है।”

West Bengal News: निष्कर्ष

पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में नक्सली समर्थक पोस्टरों का मिलना एक चिंताजनक घटना है। हालांकि पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की है, लेकिन यह घटना इस बात का संकेत है कि नक्सली फिर से अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर सकते हैं।

जुंगलमहल में पिछले कुछ सालों में मिली शांति को बनाए रखने के लिए सरकार और सुरक्षा बलों को सतर्क रहना होगा। साथ ही, विकास कार्यों को भी तेज करना होगा ताकि युवाओं को रोजगार मिले और वे नक्सली प्रभाव से दूर रहें।

यह देखना होगा कि पुलिस की जांच में क्या सामने आता है और क्या इन पोस्टरों के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं है। फिलहाल पूरा इलाका सुरक्षा बलों की सतर्क निगरानी में है।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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