Jharkhand News: झारखंड उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपने राजस्व लक्ष्य में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है। वर्तमान में विभाग का राजस्व संग्रह लक्ष्य 3885.11 करोड़ रुपये है, जिसमें अब वृद्धि की जाएगी। इस निर्णय को देखते हुए आयुक्त उत्पाद ने प्रदेश के सभी जिलों के सहायक आयुक्त उत्पाद और अधीक्षक उत्पाद को पत्र लिखकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
7 फरवरी तक जमा करनी होगी लाइसेंस फी
राजस्व वृद्धि के मद्देनजर सभी जिलों के सहायक आयुक्त उत्पाद और अधीक्षक उत्पाद को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्र के उत्पाद दुकानों के लाइसेंस फी, अग्रिम उत्पाद परिवहन कर और जमानत की अंतर राशि ऑनलाइन विधि या बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से 7 फरवरी 2026 तक प्राप्त करें। इन राशियों को जमा करने के बाद संबंधित अधिकारियों को आयुक्त उत्पाद को इसकी सूचना देनी होगी।
ई-बैंक गारंटी जमा करने की समयसीमा
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर कोई लाइसेंसधारी अंतर राशि जमा करने के बाद ई-बैंक गारंटी जमा करना चाहता है, तो उसे 30 अप्रैल 2026 से पहले यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी। यह समयसीमा सभी लाइसेंसधारकों के लिए अनिवार्य है और इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
निजी हाथों में शराब की खुदरा बिक्री

झारखंड में शराब की खुदरा बिक्री निजी हाथों में है। राज्य सरकार को इससे नियमित राजस्व की प्राप्ति हो रही है। हालांकि, राजस्व संग्रह में सुधार के बावजूद अधिकांश दुकानदारों ने शराब की बिक्री से हो रहे लाभ के प्रति असंतोष जताया है। कई दुकानदारों का कहना है कि उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है और व्यवसाय चलाना मुश्किल हो रहा है।
दुकानदारों में बढ़ता असंतोष
शराब की खुदरा दुकानों के संचालकों में बढ़ते असंतोष की खबरें आ रही हैं। कई दुकानदारों ने अपनी दुकान सरेंडर करने तक का मन बना लिया है। उनका कहना है कि ऊंची लाइसेंस फीस, परिवहन कर और अन्य खर्चों को देखते हुए मुनाफा बहुत कम रह जाता है। कुछ क्षेत्रों में बिक्री भी उम्मीद के मुताबिक नहीं है, जिससे दुकानदारों की परेशानी बढ़ गई है।
उत्पाद अधिकारियों का आश्वासन
असंतुष्ट दुकानदारों को उत्पाद विभाग के अधिकारी दिलासा दे रहे हैं। उनका कहना है कि आने वाले समय में शराब की बिक्री में वृद्धि होगी, इसलिए दुकानदार निश्चिंत रहें और धैर्य बनाए रखें। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि सरकार दुकानदारों की समस्याओं को समझती है और उचित समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
शराब कारोबारी संघ की बैठक की योजना
दुकानदारों की बढ़ती समस्याओं को देखते हुए खुदरा शराब दुकानदार संघ ने कार्रवाई करने का फैसला किया है। बहुत जल्द ही संघ का एक प्रतिनिधिमंडल उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के सचिव से मुलाकात करेगा। इस बैठक में दुकानदार अपनी परेशानियां विस्तार से बताएंगे और उचित समाधान की मांग करेंगे।
राजस्व लक्ष्य में वृद्धि की आवश्यकता क्यों
राज्य सरकार के लिए उत्पाद विभाग राजस्व का एक प्रमुख स्रोत है। विकास कार्यों और विभिन्न योजनाओं के लिए बढ़ती वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए राजस्व संग्रह में वृद्धि जरूरी है। यही कारण है कि विभाग ने अगले वित्तीय वर्ष के लिए 10 प्रतिशत की वृद्धि का लक्ष्य रखा है।
दुकानदारों पर बढ़ता वित्तीय बोझ
राजस्व लक्ष्य में 10 प्रतिशत की वृद्धि का सीधा असर दुकानदारों पर पड़ेगा। उन्हें अधिक लाइसेंस फीस और अन्य शुल्क चुकाने होंगे। यह उन दुकानदारों के लिए चिंता का विषय है जो पहले से ही कम मुनाफे की शिकायत कर रहे हैं। कई दुकानदार मानते हैं कि इससे उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो सकती है।
ऑनलाइन और बैंक ड्राफ्ट से भुगतान
विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी फीस और करों का भुगतान ऑनलाइन विधि या बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से ही किया जाना चाहिए। इससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और वित्तीय लेन-देन का उचित रिकॉर्ड बना रहेगा। नकद भुगतान स्वीकार नहीं किया जाएगा।
विभाग की निगरानी व्यवस्था
उत्पाद विभाग ने सभी जिलों में सख्त निगरानी व्यवस्था लागू की है। सहायक आयुक्त और अधीक्षक को निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित रूप से दुकानों का निरीक्षण करें और राजस्व संग्रह की स्थिति की निगरानी करें। किसी भी तरह की अनियमितता या चोरी पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
समय पर भुगतान न करने के परिणाम
जो लाइसेंसधारी निर्धारित समय सीमा तक फीस और अन्य राशियां जमा नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की सकती है। इसमें जुर्माना लगाना या चरम स्थिति में लाइसेंस रद्द करना भी शामिल हो सकता है। इसलिए सभी दुकानदारों को समय पर भुगतान करने की सलाह दी जा रही है।
राज्य के वित्तीय लक्ष्य
झारखंड सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए महत्वाकांक्षी वित्तीय लक्ष्य रखे हैं। इन लक्ष्यों को पूरा करने में उत्पाद विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण है। राज्य के समग्र विकास और कल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त राजस्व संग्रह आवश्यक है।
Jharkhand News: दुकानदारों और सरकार के बीच संतुलन
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को राजस्व बढ़ाने और दुकानदारों की व्यावसायिक व्यवहार्यता के बीच संतुलन बनाना होगा। अगर दुकानदारों पर अत्यधिक बोझ पड़ेगा तो कई लोग व्यवसाय छोड़ सकते हैं, जिससे अंततः राजस्व संग्रह पर ही नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
उत्पाद विभाग के इस निर्णय से अगले कुछ महीनों में स्थिति स्पष्ट होगी। दुकानदारों और सरकार के बीच बातचीत से उम्मीद है कि एक संतुलित समाधान निकल सकेगा।



