मध्यप्रदेश: अब तक आपने कई ऐसे बाबाओं के बारे में सुना या देखा होगा, जो आए दिन किसी न किसी तरह के चमत्कार दिखाते रहते हैं, लेकिन आज हम आपको एक ऐसे प्रसिद्ध बाबा के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनकी कहानी सुनने के बाद आपको भी यकीन नहीं होगा.
कड़ाके की ठंड हो या बरसात ये बाबा सिर्फ एक लंगोटी में रहते थे. लोग देश-विदेश से इनके दर्शन करने भी पहुंचते थे. आइए जानते हैं कौन थे ये बाबा और क्या हैं इनके चमत्कार?
जानिए कौन थे ये बाबा
दरअसल, खरगोन जिले के प्रसिद्ध संत सियाराम बाबा का निधन हो गया है. बाबा खरगोन जिले के नर्मदा नदी के घाट पर स्थित भट्याण आश्रम के संत थे और यहीं रहते थे. बाबा की वास्तविक उम्र किसी को नहीं पता है. कुछ लोगों का कहना है कि बाबा की उम्र 130 साल है, तो कुछ का कहना है कि यह 110 साल के थे.
चमत्कार की बात यह है कि इस उम्र में भी संत सियाराम बाबा रोज बिना चश्मे के 17 से 18 घंटे रामायण का पाठ करते थे. बताया जाता है कि इतनी लंबी उम्र होने के बावजूद भी वो अपना सारा काम खुद कर लेते थे और अपना भोजन भी खुद ही पकाते थे.
10 साल तक 1 पैर फर खड़े होकर किए थे तप
संत सियाराम बाबा के बारे में कई कथाएं प्रचलित हैं. इनके बारे में ऐसा बताया जाता है कि वे 10 सालों तक एक पैर पर खड़े होकर तप किए थे. संत सियाराम बाबा 7वीं क्लास की पढ़ाई के बाद किसी संत के संपर्क में आएं, उसके बाद उन्होंने घर और परिवार छोड़ दिया.
जिसके बाद वह तपस्या करने के लिए हिमालय चले गए. उन्होंने करीब 12 वर्षों तक मौन व्रत धारण किया. उम्र के साथ-साथ इनके जन्मस्थानों को लेकर भी स्थानीय लोगों में मतभेद है. कुछ लोग कहते हैं कि बाबा का जन्म महाराष्ट्र के आसपास किसी जिले में हुआ है.हनुमान जी के उपासक थे बाबा
संत सियाराम बाबा हनुमान जी के परम भक्त थे. वे हमेशा रामचरित मानस का ही पाठ करते रहते थे. भीषण गर्मी हो, कड़ाके की ठंड हो या फिर भीषण बरसात बाबा केवल एक लंगोट में ही रहते थे. ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने ध्यान-साधना से अपने शरीर को मौसम के अनुकूल बना लिया था. बाबा के शरीर की संरचना को देखकर ही यह अंदाजा लगाया जा सकता था कि वह कोई दिव्य पुरुष हैं.
दान में लेते थे सिर्फ 10 रुपये
संत सियाराम बाबा मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के नर्मदा नदी के घाट पर स्थित भट्याण आश्रम के संत थे, वे यहीं पर रहते थे और बहुत कम बोलते थे. बाबा के दर्शन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु आते थे. सबसे खास बात यह है कि ये बाबा अपने भक्तों दान में सिर्फ 10 रुपये ही लेते थे.
अगर कोई भक्त 10 रुपये से अधिक दान में देता था तो उसे 10 रुपये लेकर बाकी के पैसे लौटा देते थे. सबसे खास बात यह है कि यह 10 रुपये भी वे समाज के कल्याण में लगा देते थे. बताया जाता है कि संत सियाराम बाबा नर्मदा नदी के घाट पर मरम्मत के लिए करीब 2 करोड़ 57 लाख रुपए दान किए थे.
नहीं रहे संत सियाराम बाबा
बता दें कि संत सियाराम बाबा को निमोनिया था. उनका एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था. लेकिन आज उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया. उन्होंने भट्टयान बुजुर्ग आश्रम में सुबह 6 बजे अंतिम सांस ली.
मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के कसरावद क्षेत्र में भट्टयान आश्रम में रहने वाले निमाड़ के प्रसिद्ध संत सियाराम बाबा के दुनियाभर में लाखों भक्त हैं। पिछले कुछ दिनों से वे बीमार चल रहे थे। बीते तीन दिन से आश्रम में एकत्र भक्त उनके स्वास्थ्य के लिए जाप कर रहे थे और भजन गा रहे थे।
मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश के बाद डाक्टरों की टीम उनके स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी रखे हुए थी। उनके निधन की खबर के बाद बड़ी संख्या में भक्तों के आश्रम पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। प्रशासन ने अपील की है कि अंतिम दर्शन के लिए धैर्य बनाए रखें।
कड़ी ठंड में भी एक लंगोट में रहे
चाहे कड़ाके की सर्दी हो या फिर झुलसा देने वाली गर्मी बाबा हमेशा सिर्फ एक लंगोट में ही रहते थे। भक्तों का कहना है कि, उन्होंने कभी भी बाबा को लंगोट के अलावा किसी और कपड़े में नहीं देखा।
कहा जाता है कि बाबा ने 12 सालों तक खड़े होकर तपस्या की और योग साधना के दम पर खुद को हर मौसम के अनुकूल ढाल लिया है। अलसुबह नर्मदा नदी में जाकर पूजा करना और दिनभर रामायण की चौपाई का पाठ करना उनकी दिनचर्या थी।
कई चमत्कार हुए
सियाराम बाबा का चाय और केतली वाला किस्सा लोगों के बीच काफी प्रसिद्ध है। भक्तों का कहना है कि बाबा जब भी लोगों को चाय देते हैं तो उनकी केतली की चाय कभी खत्म नहीं होती। कुछ साल पहले सोशल मीडिया पर बाबा के चमत्कार का एक वीडियो जमकर वायरल हुआ था जिसमें वे बिना माचीस के ही दीपक जलाते हुए दिखाई दे रहे थे।सियाराम बाबा को लेकर यह बात भी प्रचलित है कि बाबा लगातार 21 घंटों तक रामायण की चौपाई पढ़ते हैं। हैरानी की बात ये है कि इन चमत्कारी संत की उम्र 100 साल से भी ज्यादा है लेकिन फिर भी बिना चश्मे के बाबा 21 घंटों तक रामायण का पाठ करते हैं।

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