SIR in West Bengal: पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत अब जुलाई 2025 के बाद जारी किए गए डोमिसाइल सर्टिफिकेट चुनाव आयोग की जांच के दायरे में आ गए हैं। आयोग ने BLOs को निर्देश दिया है कि ऐसे सर्टिफिकेट की गहन जांच की जाए। अगर सर्टिफिकेट संदिग्ध पाया गया तो संबंधित वोटर का नाम लिस्ट से हटाया जा सकता है। यह कदम वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा बनाने और अवैध/घुसपैठिए वोटरों को हटाने के लिए उठाया गया है। TMC ने इसे अल्पसंख्यक और गरीब वोटरों को निशाना बनाने की साजिश बताया है।
क्यों जांच के दायरे में डोमिसाइल सर्टिफिकेट?
चुनाव आयोग को शिकायत मिली थी कि कुछ लोग फर्जी या जल्दबाजी में डोमिसाइल सर्टिफिकेट बनवाकर वोटर लिस्ट में नाम जुड़वा रहे हैं। जुलाई 2025 के बाद जारी सर्टिफिकेट पर विशेष नजर रखी जा रही है। BLOs घर-घर जाकर सत्यापन कर रहे हैं।
अगर सर्टिफिकेट में गड़बड़ी पाई गई या व्यक्ति की पहचान संदिग्ध लगी तो नाम कट सकता है। यह प्रक्रिया 27 दिसंबर से शुरू हो चुकी है।
TMC का विरोध
TMC ने आयोग के इस कदम को राजनीतिक साजिश बताया। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि गरीब और अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है। कई लोग सालों से बंगाल में रह रहे हैं, लेकिन उनके सर्टिफिकेट पर सवाल उठाए जा रहे हैं। TMC ने BLOs पर दबाव बनाने का आरोप लगाया।
ममता बनर्जी ने कहा कि यह लोकतंत्र पर हमला है। बंगाल की जनता इसका जवाब देगी।
SIR in West Bengal: भाजपा का समर्थन
भाजपा ने आयोग के फैसले का स्वागत किया। पार्टी ने कहा कि बंगाल में अवैध घुसपैठ बड़ी समस्या है। TMC वोट बैंक के लिए घुसपैठियों को संरक्षण दे रही है। डोमिसाइल सर्टिफिकेट की जांच से सच्चाई सामने आएगी।
भाजपा नेता ने कहा कि वोटर लिस्ट साफ होना जरूरी है। 2026 चुनाव निष्पक्ष होंगे।
SIR की स्थिति
SIR के तहत 32 लाख से ज्यादा वोटरों को नोटिस भेजे गए हैं। सुनवाई चल रही है। कई BLOs अतिरिक्त काम से नाराज हैं। प्रदर्शन भी हो रहे हैं। आयोग ने सिक्योरिटी बढ़ाई है।
बंगाल में वोटर लिस्ट रिवीजन बड़ा विवाद बन गया है। डोमिसाइल सर्टिफिकेट की जांच ने इसे और गरमा दिया है। 2026 चुनाव से पहले यह मुद्दा गरम रहेगा।



