Jharkhand News: झारखंड के इतिहास में यह सबसे बड़ा एंटी-नक्सल ऑपरेशन साबित हुआ है। पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में एक करोड़ रुपये के इनामी कुख्यात माओवादी नेता अनल सहित 16 माओवादियों को मार गिराया गया है। यह झारखंड राज्य के 25 वर्षों के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा सुरक्षा अभियान है जिसमें इतनी बड़ी संख्या में एक साथ माओवादी मारे गए हैं।
कुख्यात माओवादी नेता अनल का सफाया
मारा गया अनल भाकपा (माओवादी) संगठन का सेंट्रल कमेटी सदस्य था और लंबे समय से सुरक्षा बलों की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था। अनल उर्फ तुफान, उर्फ पतिराम मांझी, उर्फ पतिराम मराण्डी, उर्फ रमेश, पिता टोटो मराण्डी उर्फ तारू मांझी, निवासी ग्राम झरहाबाले, थाना पीरटांड, जिला गिरिडीह का था। वह लंबे समय से सारंडा और गिरिडीह के जंगलों में सक्रिय रहा।
अनल के विरुद्ध हत्या, विस्फोट, हथियार और लूट जैसे अनेक गंभीर अपराधों के मामले विभिन्न पुलिस थानों में पंजीकृत थे। उसकी रणनीतिक सूझबूझ और सक्रियता के कारण राज्य सुरक्षा एजेंसियों ने उसे अत्यंत खतरनाक माना था। अनल न केवल माओवादी गतिविधियों में संलग्न था, बल्कि कई अवसरों पर पुलिस और सीआरपीएफ के अभियानों से बच निकलने में भी सफल रहा था।
कोबरा-209 बटालियन का सफल अभियान

यह निर्णायक मुठभेड़ छोटानगरा पुलिस थाना क्षेत्र के सारंडा जंगल में हुई। अनल के दस्ते की सीधी मुठभेड़ कोबरा-209 बटालियन से हुई जो अत्यंत प्रशिक्षित विशेष बल है। इस भीषण मुठभेड़ में कुल 16 माओवादी मारे गए हैं। सुरक्षा बलों द्वारा इलाके में सघन खोजी अभियान चलाया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार यह ऑपरेशन पूर्व नियोजित गुप्त सूचना के आधार पर संचालित किया गया था। सुरक्षा बलों को सूचना मिली थी कि सारंडा के घने जंगलों में माओवादियों की एक बड़ी बैठक होने वाली है जिसमें कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। इस सूचना के आधार पर कोबरा बटालियन ने सुनियोजित तरीके से अभियान की योजना बनाई।
सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
मुठभेड़ के पश्चात संपूर्ण क्षेत्र में उच्च सतर्कता घोषित कर दी गई है और अतिरिक्त बलों को घटनास्थल पर भेजा गया है। स्थानीय निवासियों और अधिकारियों के अनुसार सारंडा जंगल में माओवादी गतिविधियां दीर्घकाल से चिंता का विषय रही हैं। अनल के मारे जाने के पश्चात सुरक्षा बलों ने क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी है और निकटवर्ती गांवों में गश्त और खोजी अभियान तेज कर दिए हैं।
पश्चिमी सिंहभूम जिले के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि पूरे क्षेत्र को घेर लिया गया है और कोई भी माओवादी बचकर निकल न सके इसके लिए व्यापक प्रबंध किए गए हैं। आसपास के सभी संभावित पलायन मार्गों पर सुरक्षा बलों की टुकड़ियां तैनात कर दी गई हैं।
झारखंड में माओवादी नेतृत्व पर प्रहार
यह मुठभेड़ झारखंड में माओवादी नेतृत्व पर लगातार हो रहे प्रहारों की श्रृंखला में नवीनतम है। इससे पूर्व भी कई बड़े माओवादी नेताओं को या तो मार गिराया गया या गिरफ्तार किया गया:
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एक करोड़ का इनामी माओवादियों का पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस सरायकेला-खरसावां में पकड़ा गया था।
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एक करोड़ का इनामी सेंट्रल कमेटी सदस्य माओवादी सुधाकर झारखंड से पलायन कर तेलंगाना सरकार के समक्ष आत्मसमर्पण कर चुका है।
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अप्रैल 2025 में एक करोड़ का इनामी सेंट्रल कमेटी सदस्य प्रयाग मांझी उर्फ विवेक मुठभेड़ में मारा गया था।
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हजारीबाग में एक करोड़ का इनामी माओवादियों का सेंट्रल कमेटी सदस्य अनुज उर्फ सहदेव सोरेन उर्फ प्रवेश उर्फ अमलेश गत वर्ष सितंबर में मुठभेड़ में मारा गया था।
Jharkhand News: झारखंड में माओवाद पर निर्णायक प्रहार
इस अभियान के पश्चात झारखंड में बड़े पदाधिकारी माओवादी नगण्य रह गए हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह राज्य में माओवादी आंदोलन के लिए एक बड़ा झटका है। अनल जैसे वरिष्ठ नेता की मृत्यु से माओवादी संगठन की कमांड संरचना गंभीर रूप से प्रभावित होगी।
राज्य सरकार ने इस सफलता की सराहना की है और सुरक्षा बलों को बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह झारखंड को माओवादी हिंसा से मुक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सुरक्षा बलों का मनोबल इस सफलता से और बढ़ेगा और वे माओवादियों के विरुद्ध अभियान और तेज करेंगे।
यह ऑपरेशन निश्चित रूप से झारखंड के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा।



