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अंगुलिमाल और बुद्ध की वो मुलाकात – जिसने खूंखार डाकू को संत बना दिया

डेस्क: जंगल में एक खूंखार डाकू घूमता था – गले में 999 उंगलियों की माला। एक और उंगली चाहिए थी – हजार पूरे करने को। एक दिन उसने देखा – एक बूढ़ा साधु चुपचाप आ रहा है। उसने तलवार निकाली, पर 5 मिनट बाद तलवार ज़मीन पर थी – और डाकू रो रहा था।

2500 साल पहले की घटना आज भी हर उस इंसान को आईना दिखाती है जो गुस्से, बदले या हिंसा में डूबा हुआ है। न्यूरोसाइंस भी कहती है – गुस्सा अमिग्डाला को हाईजैक कर लेता है, पर करुणा उसे 30 सेकंड में शांत कर सकती है। बुद्ध ने यही किया – बिना एक शब्द बोले।

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जंगल में सन्नाटा था। अंगुलिमाल की तलवार चमक रही थी, गले में ९९९ उंगलियों की माला हिल रही थी। उसने देखा, सामने एक बूढ़ा साधु बिना डरे, बिना तेज़ चलते हुए आ रहा था। अंगुलिमाल दौड़ा, चिल्लाया – “रुक!” साधु रुके नहीं। अंगुलिमाल और तेज़ दौड़ा, हाँफते हुए पास पहुँचा तो साधु ने मुस्कुराकर कहा – “मैं तो रुक गया हूँ भाई, तू कब रुकेगा?” बस यही एक वाक्य। तलवार हाथ से गिर गई। डाकू ज़मीन पर बैठकर रोने लगा।

बुद्ध ने सिर्फ़ एक सवाल पूछा था – “तू कब रुकेगा?” ये सवाल हिंसा करने वाले से नहीं, हिंसा के अंदर लिए चलने वाले से था। आज भी जब हम गुस्से में फ़ोन पटकते हैं, किसी को ब्लॉक करते हैं, बदला लेने की प्लानिंग करते हैं – वही सवाल हमारे सामने आ खड़ा होता है – “तू कब रुकेगा?” रुकना कमज़ोरी नहीं, सबसे बड़ी ताकत है। क्योंकि जो रुक जाता है, वही बदल जाता है।

आज कोई तुमसे चिल्लाए, ट्रैफ़िक में कोई काट दे, घर में कोई ताना मारे – बस 5 सेकंड रुकना। मुँह खोलने से पहले एक बार सोचना – “मैं तो रुक गया हूँ, तू कब रुकेगा?” फिर देखना – तुम्हारा गुस्सा पिघल जाएगा, और सामने वाला शर्मिंदा होकर चुप हो जाएगा। एक बार ये करके देखो – अंगुलिमाल जैसा खूंखार इंसान भी बदल गया था, तुम तो फिर भी इंसान हो।

7 कड़वी सच्चाइयाँ जो अंगुलिमाल की कहानी सिखाती है:

नंबर अंगुलिमाल ने क्या किया बुद्ध ने क्या किया आज का सबक
1 गुस्से में 999 हत्याएँ शांति से चलते रहे गुस्सा तुम्हें चलाता है, तुम गुस्से को नहीं
2 बुद्ध को देखकर दौड़ा रुके, मुस्कुराए डर का जवाब डर से नहीं – शांति से दो
3 चिल्लाया – “रुक!” बोले – “मैं तो रुक गया, तू कब रुकेगा?” सबसे बड़ा सवाल खुद से पूछो
4 तलवार उठाई हाथ जोड़े खड़े रहे कमज़ोर वो नहीं जो हाथ जोड़ता है
5 पूछा – “तू डरता नहीं?” बोले – “डरता तो तू है, जो मारने दौड़ रहा है” हिंसा डर की निशानी है
6 रोते हुए घुटनों पर गिरा हाथ रखकर उठाया करुणा में ताकत होती है
7 नाम अंगुलिमाल से अहिंसक भिक्षु जीवन बदल गया कोई भी बदल सकता है – बस एक मुलाकात चाहिए
अभी क्या करें – 5 स्टेप्स:
  1. आज किसी से गुस्सा आए तो 10 सेकंड रुकें – बस चुप रहें
  2. उस इंसान को मन ही मन कहें – “तू भी दुखा है, बस तरीक़ा ग़लत है”
  3. रोज़ 5 मिनट किसी की बात बिना जजमेंट सुने
  4. जब कोई आप पर चिल्लाए – मुस्कुराकर कहें “मैं तो रुक गया, तू कब रुकेगा?”
  5. एक बार किसी को माफ़ करके देखें – करुणा की ताकत खुद महसूस होगी

निष्कर्ष:

अंगुलिमाल ने 999 लोगों को मारा – बुद्ध ने एक वाक्य से उसे बचा लिया। हम रोज़ किसी न किसी अंगुलिमाल से मिलते हैं – गुस्से में, चिढ़ में, ट्रैफ़िक में, घर में। बस एक बार बुद्ध बनकर देखो – शांति से, मुस्कुराकर, बिना डरे। आज रात सोने से पहले किसी एक इंसान को मन ही मन माफ़ कर दो। और देखो – तुम्हारा अंगुलिमाल कैसे बदल जाता है।

“जो हिंसा करता है, वो सबसे ज़्यादा डरा हुआ होता है। जो शांत रहता है – वही सबसे ताकतवर।”

PRAGATI DIXIT
Author: PRAGATI DIXIT

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