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झारखंड की इन वादियों में कैद है ‘अमर प्रेम’ की दास्तां, दिल छू लेंगी ये 4 अनसुनी कहानियां

Jharkhand love stories: झारखंड अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और खनिज संपदा के लिए तो विश्व प्रसिद्ध है ही, लेकिन इस राज्य की मिट्टी में प्रेम और बलिदान की ऐसी कई कहानियां दफन हैं जो आज भी पर्यटकों की आंखों को नम कर देती हैं। यहां के ऊंचे पहाड़, कल-कल करते झरने और शांत वादियां सिर्फ सैलानियों का मन नहीं बहलाते, बल्कि सदियों पुराने उस इश्क की गवाही देते हैं जिसने समाज की बंदिशों को तोड़कर खुद को अमर कर लिया। आइए जानते हैं झारखंड की उन चर्चित प्रेम कहानियों के बारे में जो आज भी यहां की हवाओं में रची-बसी हैं।

Jharkhand love stories: नेतरहाट का मैगनोलिया पॉइंट और वो अधूरी मोहब्बत

लातेहार जिले में स्थित नेतरहाट जिसे ‘छोटानागपुर की रानी’ कहा जाता है, वहां का सनसेट पॉइंट अपनी खूबसूरती के साथ-साथ एक दर्दनाक कहानी के लिए जाना जाता है। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान एक अंग्रेज अधिकारी की बेटी मैगनोलिया को स्थानीय चरवाहे की बांसुरी की धुन से प्यार हो गया था। शाम के वक्त जब चरवाहा अपनी बांसुरी बजाता, तो उसकी गूंज मैगनोलिया के दिल तक पहुंचती थी।

दोनों के बीच पनपते इस प्यार की खबर जब मैगनोलिया के पिता को लगी, तो उन्होंने इसे अपनी प्रतिष्ठा के खिलाफ माना और उस चरवाहे की बेरहमी से हत्या करवा दी। अपने प्रेमी की मौत की खबर सुनकर मैगनोलिया टूट गई और उसने उसी पहाड़ी की चोटी से कूदकर जान दे दी जहां से वे सूर्यास्त देखा करते थे। आज भी इस स्थान को ‘मैगनोलिया पॉइंट’ के नाम से जाना जाता है और लोग यहां की फिजाओं में उस प्रेम की आहट महसूस करते हैं।

Jharkhand love stories: बैजल सोरेन की बांसुरी जिसने अंग्रेजों का दिल जीत लिया

Jharkhand love stories
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गोड्डा जिले के सुंदरपहाड़ी इलाके की यह कहानी किसी फिल्म की पटकथा जैसी लगती है। कल्हाझोर गांव के बैजल सोरेन अपनी जादुई बांसुरी के लिए मशहूर थे। जब उन्होंने गांव के गरीबों के हक के लिए आवाज उठाई, तो अंग्रेजों ने उन्हें कैद कर फांसी की सजा सुना दी। फांसी के तख्ते पर चढ़ने से पहले बैजल ने अपनी आखिरी इच्छा के रूप में बांसुरी बजाने की अनुमति मांगी। उनकी धुन में ऐसा जादू था कि अंग्रेज अफसर मंत्रमुग्ध हो गए और सजा का वक्त निकल गया। कहा जाता है कि एक अंग्रेज अफसर की बेटी बैजल के इस हुनर और व्यक्तित्व पर अपना दिल हार बैठी और उन्हें अपने साथ इंग्लैंड ले गई।

पंचघाघ और दशम फॉल की वो टीस

खूंटी जिले का प्रसिद्ध पंचघाघ जलप्रपात भी एक सामूहिक त्याग की कहानी कहता है। लोक कथाओं के अनुसार, पांच बहनों को एक ही युवक से प्रेम हो गया था। जब उन्हें इस बात का एहसास हुआ कि उनके साथ विश्वासघात हुआ है, तो उन्होंने एकजुट होकर नदी की धारा में छलांग लगा दी। मान्यता है कि तभी से वह जलप्रपात पांच अलग-अलग धाराओं में बंट गया, जो आज भी उन पांच बहनों के टूटे दिल का प्रतीक माना जाता है।

वहीं रांची के पास स्थित दशम फॉल छैला सिंदू और बिंदी के प्रेम का गवाह है। छैला अपनी प्रेमिका से मिलने के लिए रोजाना खतरनाक फॉल को पार करता था। समाज की पाबंदियों ने उनका रास्ता रोकना चाहा और जिस रस्सी के सहारे वह नदी पार करता था, उसे काट दिया गया। छैला की मौत के बाद बिंदी की यादें आज भी उस जलप्रपात के शोर में सुनाई देती हैं। झारखंड के ये पर्यटन स्थल केवल घूमने की जगह नहीं, बल्कि जज्बात और इतिहास का अनूठा संगम हैं।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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