रांची: गुरुद्वारा श्री गुरु नानक सत्संग सभा द्वारा इस उपलक्ष में आज सजाए गए तीसरे और अंतिम दीवान की शुरुआत सुबह 11:00 बजे हुई स्त्री सत्संग सभा की शीतल मुंजाल द्वारा ” खालसा मेरो रूप है…..” एवं ” तहीं परकाश हमारा भयो पटना शहर विखे भव लयो…” शबद गायन से हुई. हजूरी रागी जत्था भाई महिपाल सिंह जी ने “राजन के राजा महाराजन के महाराजा…..” एवं ” ” वाहो वाहो गोबिंद सिंह जी कलगीयां वाले गोबिंद सिंह जी……” शबद गायन कर साथ संगत को निहाल किया.
गुरुद्वारा के हेड ग्रंथी ज्ञानी जिवेंदर सिंह जी ने कथा वाचन द्वारा श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज की महिमा पर प्रकाश डालते हुए साध संगत को उनके परिवार के बलिदान की कथा विस्तार से सुनाई और कहा कि इसी बलिदान के कारण उन्हें सरवंश दानी कहा जाता है. समागम में विशेष रूप से शिरकत करने पहुंचे सिख पंथ के प्रसिद्ध कीर्तनी जत्था भाई गुरमन प्रीत सिंह जी दिल्ली वाले ने ” इन्हीं की कृपा से सजे हम हैं, नहीं मो सो गरीब करोर पड़े हैं……” एवं ” ..….” एवं ” ओहना के मुख सदा उजले ओहना नु सब जगत करे नमस्कार….” तथा ” मितर प्यारे नु हाल मुरीदां दा कहना….” जैसे कई शबद गायन कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया.सत्संग सभा के प्रधान द्वारका दास मुंजाल एवं सचिव अर्जुन देव मिढ़ा ने भाई गुरमन प्रीत सिंह जी एवं साथियों को गुरु घर का सरोपा ओढ़ाकर सम्मानित किया.श्री अनंद साहिब जी के पाठ,अरदास,हुकुमनामा एवं कढ़ाह प्रशाद वितरण के साथ दीवान की समाप्ति दोपहर तीन बजे हुई.सत्संग सभा के सचिव अर्जुन देव मिढ़ा ने प्रकाश पर्व के सफल समापन के लिए स्त्री सत्संग सभा द्वारा की जाने वाली सेवा की विशेषकर प्रशंसा की और कहा कि स्त्री सत्संग सभा की सभी सदस्य दिन हो या रात गुरुघर की हर सेवा में तन मन और पूरे सेवा भाव से जुड़ी रहती है,उन्होंने लंगर सेवा,जोड़े की सेवा और लंगर वरताने की सेवा में जुड़े सभी सेवादारों का भी आभार जताया.मंच संचालन मनीष मिढ़ा ने किया.आज के कार्यक्रम का गुरु घर के सेवक पवनजीत सिंह खत्री द्वारा यूट्यूब चैनल मेरे साहेब पर सीधा प्रसारण किया गया.
इस मौके पर गुरु नानक सेवक जत्था द्वारा गुरुद्वारा साहिब के बेसमेंट में सुबह 11:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक रक्तदान शिविर लगाया गया,जिसमें 9 महिलाओं समेत कुल 29 लोगों ने स्वैच्छिक रक्तदान किया.रक्तदान शिविर में सदर अस्पताल ब्लड बैंक के सहयोग से आयोजित किया गया.शिविर के आयोजन में सूरज झंडई, करण अरोड़ा,पीयूष मिढ़ा,जयंत मुंजाल,वंश डावरा,इनिश काठपाल,अमन सचदेवा,संदीप पपनेजा,ऋषभ शर्मा की सक्रिय भूमिका रही. दो दिवसीय समागम की लंगर सेवा में अशोक गेरा,सुरेश मिढ़ा,ललित गखड़,हरीश मिढ़ा,विनोद सुखीजा,मोहन काठपाल,नानक चंद अरोड़ा,राजकुमार सुखीजा,महेंद्र अरोड़ा तथा जोड़े की सेवा में बसंत काठपाल,प्रेम मिढ़ा,पुरुषोत्तम सरदाना,गरिमा पपनेजा की विशेष भागीदारी रही.

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