- अर्जुन बनाम रघुवर,
जमशेदपुर।राजनीति में दोस्त कम और प्रतिद्वंद्वी ज्यादा होते हैं—झारखंड के दो कद्दावर नेता, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और रघुवर दास, इसका जीता-जागता उदाहरण हैं। दोनों एक ही दिन जन्मे, दोनों एक ही पार्टी में, और दोनों का लक्ष्य एक ही—झारखंड में भाजपा की सियासी बागडोर दोबारा संभालना और दोनों ही एक शहर यानी जमशेदपुर के रहने वाले है।
पर्दे के पीछे कटुता भले हो, लेकिन जन्मदिन के मौके पर दोनों को बधाईयों की बौछार हुई
3 मई को झारखंड की राजनीति के दो अहम चेहरे—पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और रघुवर दास—का जन्मदिन है। दोनों भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं और राज्य की सत्ता की बागडोर संभाल चुके हैं। इस खास मौके पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने दोनों को बधाई दी, साथ ही कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने भी शुभकामनाएं दीं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भले ही दोनों अब विधायक नहीं हैं, लेकिन भाजपा आलाकमान की नजरों में दोनों अब भी प्रासंगिक हैं। पार्टी के भीतर यह माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में इन दोनों नेताओं में से कोई एक फिर से मोर्चा संभाल सकता है।
रघुवर दास, जो 1955 में जन्मे थे, उम्र में अर्जुन मुंडा (जन्म: 1968) से 13 साल बड़े हैं। रघुवर दास ने झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में पूर्णकालिक कार्यकाल दिया, जबकि बाद में ओडिशा के राज्यपाल भी बने। वहीं अर्जुन मुंडा तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और फिलहाल केंद्र सरकार में मंत्री हैं।
गोलमुरी निवासी रघुवर दास और घोड़ाबांधा निवासी अर्जुन मुंडा के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा हमेशा से चर्चा में रही है। पार्टी के भीतर दोनों खेमों के समर्थक भी अपनी-अपनी लाइन खींचे रहते हैं। हालांकि सार्वजनिक मंचों पर दोनों एकता का दिखावा करते हैं, मगर अंदरखाने समीकरण कुछ और ही कहते हैं।
झारखंड की राजनीति में दोनों की सक्रियता यह संकेत दे रही है कि आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भाजपा अपने पुराने चेहरों को फिर से आगे ला सकती है—या शायद किसी एक को चुनकर सियासी संतुलन साध सकती है।

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