UP News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज तीन घंटे के संक्षिप्त लेकिन बेहद अहम दौरे पर कानपुर पहुंचे। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) में आयोजित प्राकृतिक खेती प्रदर्शनी के दौरान उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए देश के बदलते स्वरूप पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते 12 वर्षों में भारत ने एक ऐसी विकास यात्रा तय की है जो बिना रुके और बिना थके आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि आज हमारा देश अपनी विरासत को सहेजते हुए आधुनिकता के मार्ग पर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
UP News: किसानों से सीधा संवाद और प्राकृतिक खेती पर जोर
सीएम योगी ने अपने संबोधन में खेती के बदलते तौर तरीकों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों में किसानों को वह समर्थन और सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज किसान, व्यापारी और आधी आबादी यानी महिलाओं पर विश्वास जताना ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि रसायनों के अत्यधिक उपयोग ने हमारी धरती की उर्वरा शक्ति को कमजोर कर दिया है, जिससे न केवल मिट्टी प्रदूषित हो रही है बल्कि लोगों की सेहत पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आज शुगर, ब्लड प्रेशर और लिवर से जुड़ी बीमारियां आम हो गई हैं, जिसका मुख्य कारण हमारा खानपान है। सिस्टम में जहर घुल चुका है, जिसे प्राकृतिक खेती के जरिए ही ठीक किया जा सकता है। योगी ने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि प्रदेश के 34 जिलों में अब गो आधारित खेती ने जोर पकड़ा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार कृषि मंडियों में प्राकृतिक रूप से तैयार उत्पादों के लिए विशेष शोरूम बनाने की दिशा में काम कर रही है, ताकि किसानों को उनके उत्पादों का सही दाम मिल सके।
गाय और खेती का अटूट रिश्ता
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देते हुए मुख्यमंत्री ने गाय को भारतीय जीवन दर्शन का हिस्सा बताया। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि जब तक हम गोमाता को नहीं अपनाएंगे, तब तक खेती का वास्तविक लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क पर गायों के घूमने की समस्या तब तक बनी रहेगी जब तक किसान उन्हें अपने खेती के तंत्र का हिस्सा नहीं बनाएंगे। सीएम ने कहा कि गोमाता को कटने नहीं दिया जाएगा और यह हमारा जन्म जन्मांतर का नाता है।
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के 10 प्रगतिशील किसानों को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया। छोटे लाला, राजेश कुमार त्रिपाठी, आशीष कुमार, सुनील सिंह कटियार और फूल सिंह यादव जैसे किसानों को सम्मानित होते देख वहां मौजूद अन्य किसानों का उत्साह भी देखते ही बनता था। यह सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने वाले उन किसानों के हौसले की सराहना थी जो रसायनों से दूर रहकर शुद्ध अन्न पैदा कर रहे हैं।
सड़क निर्माण परियोजनाओं की समीक्षा
प्राकृतिक खेती के कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री का काफिला एचबीटीयू (HBTU) परिसर पहुंचा। यहां उन्होंने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों के साथ मंडलीय समीक्षा बैठक की। कानपुर मंडल में चल रही तमाम सड़क परियोजनाओं, पुलों के निर्माण और बुनियादी ढांचे से जुड़े कामों पर उन्होंने कड़ा रुख अपनाया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि परियोजनाओं में देरी कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और प्रभारी मंत्री योगेंद्र उपाध्याय भी उपस्थित थे। योगी आदित्यनाथ ने हर एक प्रोजेक्ट की बारीकी से समीक्षा की। जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री का प्रवास भले ही तीन घंटे का था, लेकिन उन्होंने एक एक विकास कार्य पर बारीकी से चर्चा की है। सड़कों की गुणवत्ता और जनता के आवागमन में सुधार सरकार की प्राथमिकता में है।
प्रशासनिक तैयारियों का असर
कानपुर के दौरे के लिए जिला प्रशासन और पुलिस ने सुबह से ही चाक चौबंद इंतजाम किए थे। सीएसए के हेलीपैड पर दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर सीएम का हेलीकॉप्टर उतरते ही पूरा प्रशासनिक अमला अलर्ट मोड पर आ गया था। शहर की सड़कों पर सुरक्षा का कड़ा पहरा रहा ताकि आम जनता को कम से कम असुविधा हो। मुख्यमंत्री के इस दौरे से कानपुर मंडल के विकास कार्यों को एक नई गति मिलने की उम्मीद है, क्योंकि लोक निर्माण विभाग को समय सीमा के भीतर काम पूरा करने की सख्त हिदायत मिली है।
UP News: राजनीतिक और सामाजिक संदेश
सीएम योगी का यह दौरा केवल विकास कार्यों तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने राजनीतिक संदेश भी दिए। उन्होंने पुरानी सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले किसानों के पास सामर्थ्य था, लेकिन उन्हें सही नेतृत्व नहीं मिला। उन्होंने 14 साल पहले की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि तब लागत ज्यादा और आमदनी कम होने के कारण किसान आत्महत्या करने को मजबूर थे। आज के दौर में पीएम फसल बीमा योजना और किसान सम्मान निधि ने उन्हें एक सुरक्षा चक्र प्रदान किया है।
मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया कि उत्तर प्रदेश अब रुकने वाला नहीं है। बुंदेलखंड के सात जिलों में गो आधारित खेती में आई क्रांति इसका बड़ा सबूत है। उन्होंने कानपुर के लोगों और किसानों से आह्वान किया कि वे अपनी पुरानी परंपराओं की ओर लौटें और जहर मुक्त खेती को अपनाएं। यह दौरा एक बार फिर साबित कर गया कि राज्य सरकार का पूरा ध्यान जमीनी स्तर के विकास और लोगों की सेहत पर है। अब देखना यह है कि पीडब्ल्यूडी की समीक्षा बैठक के बाद सड़कों की सूरत में कितना बदलाव आता है और किसान प्राकृतिक खेती को कितनी तेजी से अपनाते हैं।
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