Vehicle Scrappage Policy: भारत सरकार पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से सड़कों से हटाने के लिए वाहन स्क्रैपेज नीति को बढ़ावा दे रही है।
इसका मकसद पुराने वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के साथ-साथ ऑटोमोबाइल सेक्टर में नए वाहनों की मांग बढ़ाना और पुराने वाहनों के सुरक्षित एवं वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण को बढ़ावा देना है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इसके लिए Registered Vehicle Scrapping Facility यानी RVSF और Automated Testing Station यानी ATS की व्यवस्था विकसित की है।
लेकिन सवाल यह है कि इस नीति का फायदा बिहार और झारखंड के आम वाहन मालिकों को कितना मिल रहा है? खासकर 15 साल या उससे अधिक पुराने वाहन रखने वाले लोगों के सामने स्क्रैपिंग सेंटर की उपलब्धता, फिटनेस टेस्ट, दस्तावेज और सही स्क्रैप वैल्यू जैसे सवाल अब भी महत्वपूर्ण हैं।
15 साल पुरानी गाड़ी का क्या होगा?
सबसे पहले एक जरूरी बात समझना जरूरी है। 15 साल पूरा होने का मतलब यह नहीं है कि हर निजी कार या बाइक को उसी दिन अनिवार्य रूप से स्क्रैप कर दिया जाएगा। वाहन की फिटनेस और लागू नियम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पुराने वाहनों के लिए फिटनेस टेस्टिंग और स्क्रैपिंग की प्रक्रिया अलग-अलग श्रेणियों के वाहनों पर लागू होती है। अगर कोई वाहन निर्धारित मानकों के अनुसार फिटनेस में असफल होता है और उसे End-of-Life Vehicle के रूप में निर्धारित किया जाता है, तो उसे अधिकृत स्क्रैपिंग सुविधा में भेजा जा सकता है।
बिहार-झारखंड में सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
जमीनी स्तर पर सबसे बड़ी चुनौती पर्याप्त RVSF यानी Registered Vehicle Scrapping Facility और टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता है।
केंद्रीय दिशानिर्देशों में भी राज्यों में पर्याप्त RVSF इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की जरूरत बताई गई है, ताकि छोटे दोपहिया वाहनों से लेकर बड़े वाणिज्यिक वाहनों तक को वैज्ञानिक तरीके से स्क्रैप किया जा सके।
बिहार और झारखंड के छोटे शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले वाहन मालिकों के लिए नजदीकी अधिकृत सुविधा तक पहुंच एक महत्वपूर्ण मुद्दा हो सकता है। ऐसे में कई लोग स्थानीय कबाड़ कारोबारियों का रुख करते हैं। लेकिन अनधिकृत कबाड़ विक्रेता से वाहन स्क्रैप कराने पर सरकारी प्रक्रिया से मिलने वाले दस्तावेज और लाभों का सवाल खड़ा हो सकता है।
पुरानी गाड़ी बेचने और स्क्रैप कराने में क्या अंतर है?
पुरानी गाड़ी को सामान्य तरीके से कबाड़ी को बेच देना और सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त RVSF में वाहन स्क्रैप कराना एक जैसी प्रक्रिया नहीं है।
अधिकृत RVSF में वाहन की पहचान, दस्तावेज और स्क्रैपिंग प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत होती है। वाहन मालिक को Certificate of Deposit (CoD) यानी जमा प्रमाणपत्र मिलता है। यही दस्तावेज आगे नए वाहन की खरीद पर उपलब्ध संबंधित लाभों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
इसलिए केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि कबाड़ी पुरानी कार के बदले कितने रुपये दे रहा है। वाहन मालिक को यह भी देखना चाहिए कि उसे वैध स्क्रैपिंग दस्तावेज मिल रहे हैं या नहीं।
नए वाहन पर कितना फायदा मिल सकता है?
केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के Rule 51A के तहत Certificate of Vehicle Scrapping प्रस्तुत करने पर नए वाहन के मोटर-व्हीकल टैक्स में नॉन-ट्रांसपोर्ट वाहनों के लिए 25% तक और ट्रांसपोर्ट वाहनों के लिए 15% तक की रियायत का प्रावधान है। हालांकि वास्तविक छूट और उसकी शर्तें संबंधित राज्य सरकार की व्यवस्था पर निर्भर करती हैं।
यानी बिहार या झारखंड में वाहन मालिक को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि केंद्र में निर्धारित अधिकतम सीमा के बराबर छूट हर स्थिति में स्वतः मिल जाएगी। उसे अपने राज्य के परिवहन विभाग के मौजूदा नियमों की जांच करनी चाहिए।
इसके अलावा कुछ वाहन निर्माता अपने स्तर पर पुराने वाहन को स्क्रैप करने पर नए वाहन की खरीद के समय अतिरिक्त लाभ या डिस्काउंट दे सकते हैं। यह निर्माता और मॉडल के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
क्या पुरानी गाड़ी का सही दाम मिल रहा है?
यही इस पूरी नीति का सबसे अहम सवाल है।
पुरानी कार की स्क्रैप वैल्यू मुख्य रूप से उसके वजन, धातु की कीमत, मॉडल, पुर्जों की स्थिति और स्क्रैपिंग सुविधा की मूल्यांकन प्रक्रिया पर निर्भर करती है। इसलिए किसी वाहन के लिए एक समान ‘सरकारी स्क्रैप रेट’ मान लेना सही नहीं होगा।
वाहन मालिक को स्क्रैपिंग से पहले कम से कम यह जरूर जांचना चाहिए कि:
- RVSF अधिकृत है या नहीं।
- वाहन के बदले मिलने वाली स्क्रैप वैल्यू कितनी है।
- Certificate of Deposit मिलेगा या नहीं।
- वाहन का RC और स्क्रैपिंग रिकॉर्ड सही तरीके से अपडेट होगा या नहीं।
- नए वाहन पर मिलने वाली टैक्स छूट की राज्य में क्या व्यवस्था है।
Vehicle Scrap-page Policy में बिहार-झारखंड के लिए आगे की चुनौती
बिहार और झारखंड में नीति का फायदा बढ़ाने के लिए केवल पुराने वाहनों को स्क्रैप घोषित करना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए राज्य स्तर पर RVSF नेटवर्क, Automated Testing Stations, डिजिटल प्रक्रिया और वाहन मालिकों के बीच जागरूकता बढ़ाना जरूरी है।
MoRTH के आधिकारिक वाहन स्क्रैपिंग पोर्टल पर RVSF और स्क्रैपिंग से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध हैं। वाहन मालिक आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से प्रक्रिया और संबंधित सुविधाओं की जानकारी ले सकते हैं।
वाहन मालिक क्या करें?
अगर आपकी कार या बाइक पुरानी हो चुकी है और आप उसे स्क्रैप कराने की सोच रहे हैं, तो सबसे पहले किसी स्थानीय कबाड़ी को वाहन सौंपने के बजाय अधिकृत RVSF की जानकारी लें। अपने वाहन के दस्तावेज, RC और फिटनेस की स्थिति जांचें। स्क्रैपिंग के बाद मिलने वाले Certificate of Deposit को सुरक्षित रखें, क्योंकि नए वाहन पर उपलब्ध संभावित सरकारी लाभ के लिए यह जरूरी दस्तावेज हो सकता है।
निष्कर्ष: Vehicle Scrappage Policy का उद्देश्य सिर्फ पुरानी गाड़ी हटाना नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित तरीके से रिसाइकिल कराना और वाहन मालिक को औपचारिक प्रक्रिया से जोड़ना है। बिहार और झारखंड में इसका पूरा फायदा तभी मिलेगा, जब अधिकृत स्क्रैपिंग और टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर आम वाहन मालिक की पहुंच में हो और उन्हें सही प्रक्रिया की जानकारी मिले।

