डेस्क: हाल ही में WHO ग्लोबल समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की पारंपरिक औषधियों और आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से अश्वगंधा का जिक्र किया और बताया कि यह औषधि मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए बेहद लाभकारी है। मोदी जी ने कहा कि अश्वगंधा को दुनिया में स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण औषधि के रूप में अपनाया जा सकता है।
अश्वगंधा क्या है?
अश्वगंधा, जिसे विज्ञान की भाषा में Withania somnifera कहा जाता है, आयुर्वेद में दशकों से इस्तेमाल होती आ रही है। इसे ‘भारतीय जिनसेंग’ भी कहा जाता है। यह जड़ी-बूटी तनाव कम करने, इम्यून सिस्टम मजबूत करने और शरीर की सहनशीलता बढ़ाने के लिए जानी जाती है।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद
अश्वगंधा का सबसे बड़ा लाभ मानसिक स्वास्थ्य में देखा जाता है। यह तनाव और चिंता को कम करने में मदद करती है। नियमित सेवन से नींद बेहतर होती है और मूड में सुधार आता है। कई रिसर्च बताते हैं कि अश्वगंधा कोर्टिसोल हार्मोन को नियंत्रित करके स्ट्रेस से लड़ने की क्षमता बढ़ाती है।
शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी
शारीरिक सेहत के लिए भी अश्वगंधा फायदेमंद है। यह शरीर की सहनशीलता और ऊर्जा बढ़ाती है। थकान, कमजोरी और मांसपेशियों में दर्द जैसी समस्याओं में राहत दिलाती है। इसके अलावा यह ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में भी मदद कर सकती है।
इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाए
अश्वगंधा का सेवन इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है। यह शरीर को बीमारियों से लड़ने में मदद करती है और संक्रमण का खतरा कम करती है। सर्दियों और बदलते मौसम में इसे अपने आहार में शामिल करना फायदेमंद माना जाता है।
सही तरीके से अश्वगंधा का सेवन
अश्वगंधा को पाउडर, कैप्सूल या चाय के रूप में लिया जा सकता है। आयुर्वेद में इसे दूध या पानी के साथ लेने की सलाह दी जाती है। हालांकि, इसका सेवन हमेशा संतुलित मात्रा में करना चाहिए। ज्यादा मात्रा में लेने से पेट में हल्की परेशानी या एलर्जी हो सकती है।
किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए
अगर किसी को थायरॉइड की समस्या, प्रेग्नेंसी या किसी गंभीर बीमारी है, तो अश्वगंधा का सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। बच्चों में इसका इस्तेमाल सीमित मात्रा में ही किया जाना चाहिए।
निष्कर्ष:
अश्वगंधा एक प्राकृतिक औषधि है, जो मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभकारी है। WHO ग्लोबल समिट में पीएम मोदी द्वारा इसका जिक्र यह दर्शाता है कि दुनिया में इसे स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली जड़ी-बूटी के रूप में अपनाया जा सकता है। सही मात्रा और नियमित सेवन से यह औषधि आपके शरीर और मन को मजबूत बनाने में मदद कर सकती है।



