डेस्क: दुनियाभर में तेजी से बढ़ रही बीमारियों के बीच ट्यूमर एक ऐसी समस्या है, जिसके बारे में लोग अक्सर तब सोचते हैं जब शरीर में कोई गाँठ महसूस होती है या लगातार तकलीफ़ बनी रहती है। मेडिकल एक्सपर्ट्स की मानें तो ट्यूमर अपने आप नहीं बनता, बल्कि उसकी जड़ें हमारे शरीर, जीवनशैली और पर्यावरण से गहराई से जुड़ी होती हैं। आमतौर पर लोग ट्यूमर को कैंसर समझ लेते हैं, लेकिन हर ट्यूमर कैंसर नहीं होता। इसी भ्रम को दूर करने और जागरूकता फैलाने के लिए डॉक्टर इसके कारणों को समझना बेहद जरूरी मानते हैं।
ट्यूमर क्या होता है?
डॉक्टर बताते हैं कि ट्यूमर मूल रूप से कोशिकाओं की असामान्य और अनियंत्रित वृद्धि है। हमारा शरीर करोड़ों कोशिकाओं से मिलकर बना है, जिनकी एक निश्चित उम्र और कार्यप्रणाली होती है। जब सेल्स अपनी सामान्य प्रक्रिया से हटकर तेजी से बढ़ने लगते हैं और शरीर उन्हें रोक नहीं पाता, तो वहीं से ट्यूमर की शुरुआत होती है। यह ट्यूमर दो रूपों में हो सकता है— (1) बेनाइन ट्यूमर: जो शरीर में तेजी से नहीं फैलते और अक्सर जानलेवा नहीं होते। (2) मैलिग्नेंट ट्यूमर: जो कैंसर में बदलकर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकते हैं।
जेनेटिक म्यूटेशन
ट्यूमर बनने का सबसे प्रमुख कारण है जेनेटिक म्यूटेशन। डॉक्टरों के अनुसार, हर व्यक्ति का DNA उसकी कोशिकाओं को निर्देशित करता है कि उन्हें कैसे बढ़ना और कब रुकना है। लेकिन जब DNA में छोटी-सी गड़बड़ी होती है, तो कोशिकाएं इस नियंत्रण को खो देती हैं। कई बार यह म्यूटेशन जन्म से मौजूद होता है, जबकि कई बार उम्र, प्रदूषण, रेडिएशन या वायरस के कारण विकसित होता है। यदि परिवार में पहले किसी को कैंसर या ट्यूमर हुआ है, तो संभावना और भी बढ़ जाती है।
खराब जीवनशैली
आधुनिक जीवनशैली ट्यूमर के बढ़ते मामलों का एक बड़ा कारण है। तेज़ी, तनाव और असंतुलित खानपान ने शरीर की प्राकृतिक प्रणाली को प्रभावित किया है। डॉक्टर बताते हैं कि— लगातार जंक फूड और तला-भुना खाना , धूम्रपान और अल्कोहल का सेवन , बॉडी एक्टिविटी की कमी , मीठे, पैक्ड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ , DNA को नुकसान पहुँचाते हैं और सेल्स को असामान्य तरीके से बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। लंबे समय तक अपनाई गई ऐसी आदतें शरीर में ट्यूमर बनने की जमीन तैयार करती हैं।
हार्मोनल असंतुलन
हार्मोन शरीर के कई महत्वपूर्ण कामों को नियंत्रित करते हैं। लेकिन जब इनमें असंतुलन पैदा होता है, तो कोशिकाओं की वृद्धि भी प्रभावित होती है। विशेषकर महिलाओं में थायरॉइड, ब्रेस्ट और ओवरी से जुड़े ट्यूमर हार्मोनल बदलावों की वजह से अधिक पाए जाते हैं।
डॉक्टर कहते हैं कि तनाव, अनियमित नींद, गर्भनिरोधक दवाइयां, मोटापा और PCOS जैसे कारण हार्मोनल बदलाव को बढ़ावा देते हैं, जो आगे चलकर ट्यूमर का रूप ले सकता है।
वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण
कुछ संक्रमण सीधे कोशिकाओं की वृद्धि में हस्तक्षेप करते हैं। जैसे— HPV वायरस: सर्वाइकल ट्यूमर का मुख्य कारण , हेपेटाइटिस B और C: लिवर ट्यूमर का खतरा बढ़ाते हैं , H. pylori बैक्टीरिया: पेट और पाचन तंत्र में ट्यूमर बनने का जोखिम ये वायरस शरीर के DNA को बदलकर सेल्स को असामान्य तरीके से बढ़ने के लिए मजबूर करते हैं।
पर्यावरण का प्रभाव
हम रोजाना जिन चीजों के संपर्क में आते हैं, वे भी ट्यूमर बनने का कारण बन सकती हैं— एयर पॉल्यूशन , प्लास्टिक और केमिकल्स , पेस्टिसाइड्स वाले फल-सब्जियां , रेडिएशन -इन सभी फैक्टर्स का शरीर की कोशिकाओं पर सीधा प्रभाव पड़ता है। लंबे समय तक ऐसे वातावरण में रहने से DNA को नुकसान पहुंच सकता है, और यह जोखिम धीरे-धीरे ट्यूमर में बदल सकता है।
कमजोर इम्यून सिस्टम
इम्यून सिस्टम शरीर का सुरक्षा कवच है। इसका काम है किसी भी असामान्य कोशिका को तेजी से खत्म करना। लेकिन जब प्रतिरक्षा प्रणाली तनाव, बीमारी, उम्र या कुपोषण की वजह से कमजोर हो जाती है, तो वह इन खराब कोशिकाओं को पहचान नहीं पाती। नतीजतन, वे बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर का रूप ले लेती हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
डॉक्टर लगातार इस बात पर जोर देते हैं कि ट्यूमर की समय पर पहचान ही इससे बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
यदि आपको— कोई असामान्य गाँठ – किसी अंग में लगातार दर्द , बार-बार थकान , अचानक वजन घटना , त्वचा पर असामान्य बदलाव
महसूस हों, तो तुरंत जांच करवाना जरूरी है।
निष्कर्ष:
ट्यूमर एक गंभीर समस्या जरूर है, लेकिन इससे डरने के बजाय जागरूक होना जरूरी है। इसके कारणों को समझकर, जीवनशैली में सुधार करके और नियमित हेल्थ चेकअप करवाकर इसे काफी हद तक रोका जा सकता है। विशेषज्ञ भी यही सलाह देते हैं—
“सुरक्षा, जागरूकता और समय पर इलाज—यही ट्यूमर से लड़ने का सबसे असरदार तरीका है।”



