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पीएम मोदी के 10 गुरुमंत्र जो हर छात्र को जानने चाहिए, परीक्षा का तनाव होगा दूर, मिलेगी सफलता की राह

Pariksha Pe Charcha 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 6 फरवरी 2026 को परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम का नौवां संस्करण आयोजित किया गया। पीएम आवास पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में देशभर से आए छात्रों ने हिस्सा लिया और पीएम से परीक्षा के तनाव, पढ़ाई की रणनीति, टेक्नोलॉजी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और करियर से जुड़े सवाल पूछे। यह कार्यक्रम बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित हुआ क्योंकि पीएम मोदी ने न केवल परीक्षा बल्कि जीवन और व्यावसायिक कौशल से जुड़े विषयों पर भी मार्गदर्शन दिया। परीक्षा पे चर्चा हर वर्ष लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है।

इस बार भी कार्यक्रम में छात्रों ने ऐसे सवाल पूछे जो हर परीक्षार्थी के मन में होते हैं। पीएम मोदी ने अपने अनुभव और व्यावहारिक ज्ञान से छात्रों को ऐसे गुरुमंत्र दिए जो उनकी परीक्षा की तैयारी को बेहतर बनाने के साथ साथ जीवन में सही दिशा दिखाने में भी सहायक होंगे। आइए जानते हैं पीएम द्वारा दिए गए उन दस महत्वपूर्ण गुरुमंत्रों के बारे में जो हर छात्र के लिए अमूल्य हैं।

पहला गुरुमंत्र: अपना खुद का पैटर्न बनाएं

Pariksha Pe Charcha 2026 - Pm Modi With Students
Pariksha Pe Charcha 2026 – Pm Modi With Students

गुजरात की एक छात्रा सानवी ने पीएम से पूछा कि परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए शिक्षक और माता पिता अलग अलग सलाह देते हैं जिससे समझ नहीं आता कि क्या करना चाहिए। इसके जवाब में पीएम मोदी ने बहुत महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि आपको अपने द्वारा बनाए गए पैटर्न को समझने की कोशिश करनी चाहिए। किसी के बताए गए पैटर्न पर न जाएं बल्कि खुद के लिए आप स्वयं ही पैटर्न बनाएं।

यह तय करें कि आपके लिए कौन सा पैटर्न सबसे बेहतर है। हर छात्र की सीखने की क्षमता और शैली अलग होती है। जो तरीका दूसरों के लिए कारगर है वह आपके लिए उतना प्रभावी नहीं हो सकता। इसलिए अपनी ताकत और कमजोरियों को पहचानें और उसी के अनुसार अपनी पढ़ाई की योजना बनाएं। यह आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास दोनों बढ़ाता है।

दूसरा गुरुमंत्र: पिछले सवालों में न उलझें

एक छात्र ने पूछा कि जब बोर्ड की परीक्षा के पिछले साल के प्रश्न पत्र देखते हैं तो ऐसा लगता है कि ये सवाल बहुत जरूरी हैं। ऐसे में क्या करना चाहिए। पीएम ने बताया कि वह अपने समय से ही यह सुनते आए हैं कि पिछले सालों में पूछे गए प्रश्न जरूरी होते हैं। लेकिन इससे छात्रों के लिए सही विषय पर ध्यान केंद्रित करना कठिन हो जाता है। इसके कारण वे अपने अनुसार तैयारी नहीं कर पाते और पिछले सालों के सवालों में ही उलझे रहते हैं। पीएम ने सलाह दी कि अपनी तैयारी में संतुलन लाएं और अपनी तैयारी को ही सर्वश्रेष्ठ बनाएं। पुराने प्रश्न पत्र देखना बुरा नहीं है लेकिन उन्हीं में सीमित रहना गलत है। पूरे पाठ्यक्रम को समझें और तैयार करें।

तीसरा गुरुमंत्र: पढ़ा हुआ याद रखने की तकनीक

कई छात्रों की समस्या होती है कि वे पढ़ा हुआ भूल जाते हैं। इस सवाल के जवाब में पीएम ने बेहतरीन सलाह दी। उन्होंने कहा कि अगर आप पढ़ा हुआ भूल जाते हैं तो रोजाना अपनी कक्षा के सीनियर्स से किसी विषय पर पांच से दस मिनट बात करें। साथ ही अपने से कमजोर छात्रों को भी उन विषयों के बारे में बताएं जो आपने पढ़ा है। इससे आपको याद भी रहेगा और आपसे कमजोर छात्रों का मन भी खुश होगा। यह तकनीक बहुत प्रभावी है। जब हम किसी को कुछ सिखाते हैं तो खुद भी बेहतर तरीके से समझते और याद रखते हैं। यह दूसरों की मदद करने का भी अच्छा तरीका है।

चौथा गुरुमंत्र: स्किल और मार्क्स में संतुलन

जब एक छात्र ने पूछा कि स्किल ज्यादा जरूरी है या मार्क्स तो पीएम ने संतुलित जवाब दिया। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन के लिए हर चीज जरूरी है। लेकिन आपको हर चीज में संतुलन बनाना आना चाहिए। स्किल दो तरह की होती है – लाइफ स्किल और प्रोफेशनल स्किल। इन दोनों ही स्किल पर ध्यान देना जरूरी है। मार्क्स भी महत्वपूर्ण हैं लेकिन केवल मार्क्स पर्याप्त नहीं हैं। जीवन कौशल जैसे संवाद करना, समस्या समाधान और भावनात्मक बुद्धिमत्ता भी उतनी ही आवश्यक हैं। व्यावसायिक कौशल आपको करियर में आगे बढ़ाते हैं। दोनों का संतुलन सफलता की कुंजी है।

पांचवां गुरुमंत्र: कृत्रिम बुद्धिमत्ता का सही उपयोग

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में पूछे गए सवाल पर पीएम ने कहा कि आपको एआई का उपयोग करना आना चाहिए। आप एआई का इस तरह उपयोग कर सकते हैं जैसे एआई को बताएं कि मेरी उम्र इतनी है और मेरी इस विषय में रुचि है तो मेरी रुचि के अनुसार मुझे कौन सी दस जीवनियां पढ़नी चाहिए। यह आधुनिक तकनीक के सही उपयोग का उदाहरण है। एआई को सहायक के रूप में इस्तेमाल करें न कि उस पर निर्भर हो जाएं। इससे आपकी सीखने की प्रक्रिया बेहतर हो सकती है।

छठा गुरुमंत्र: शिक्षकों की गति से तालमेल

एक छात्र ने पूछा कि अगर कोई शिक्षक तेज गति से पढ़ाता है और हम पीछे रह जाते हैं तो इसे कैसे संभालें। पीएम ने कहा कि एक शिक्षक को छात्र की गति से ही पढ़ाई करवानी चाहिए। साथ ही शिक्षक अगले दिन कक्षा में जो पढ़ाने वाले हैं उसे एक दिन पहले ही छात्रों को बता दें और छात्रों को घर से पढ़कर आने की सलाह दें। इससे छात्र अगले दिन बेहतर ढंग से समझ पाएंगे। यह पूर्व तैयारी की अवधारणा है जो बहुत प्रभावी है।

सातवां गुरुमंत्र: महान लोगों की जीवनियां पढ़ें

किस आदत से सपने पूरे होते हैं इस सवाल पर पीएम ने कहा कि आपको महान लोगों की जीवनियां पढ़नी चाहिए। इससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि जो लोग आज इतने सफल हैं वे भी कभी हमारी तरह ही सामान्य थे। जीवनियां प्रेरणा का स्रोत हैं और बताती हैं कि संघर्ष से सफलता कैसे मिलती है।

आठवां गुरुमंत्र: आत्मविश्वास से डर भगाएं

प्रेजेंटेशन देते समय घबराहट के बारे में पूछे गए सवाल पर पीएम ने कहा कि फुटपाथ पर जब कोई महिला टीवी पर किसी घटना के बारे में बताती है तो वह कितने आत्मविश्वास के साथ बात करती है। क्या उसने अभ्यास किया है। नहीं। इसलिए आप जो भी कर रहे हैं उस पर भरोसा रखें और आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ें।

नौवां गुरुमंत्र: रुचि को करियर बनाएं

गेमिंग में रुचि रखने वाले छात्र को पीएम ने सलाह दी कि आप खुद पंचतंत्र की कहानियों और अभिमन्यु की कहानी पर गेम बनाकर अपनी वेबसाइट पर लॉन्च करो। धीरे धीरे लोग तुम्हारे गेम्स खेलेंगे। यह रचनात्मकता को प्रोत्साहित करता है।

दसवां गुरुमंत्र: सपने देखना और कर्म करना

पीएम ने कहा सपने न देखना गुनाह है। लेकिन केवल सपने देखने से कुछ नहीं होता। अपने सपनों को पूरा करने के लिए कर्म कीजिए। खुद से पूछें मुझे क्या बनना है और इसके लिए क्या पढ़ना चाहिए। यह सबसे महत्वपूर्ण संदेश है।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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