Railways News: बिहार और झारखंड के सीमावर्ती इलाकों के सामाजिक और आर्थिक विकास को रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक बुनियादी ढांचा परियोजना को हरी झंडी दे दी है। गया पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेलखंड पर स्थित परैया स्टेशन से लेकर झारखंड के चतरा जिले तक बनने वाली नई रेललाइन परियोजना को केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है। लगभग 2500 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना को लेकर भारत सरकार के आधिकारिक राजपत्र (गजट) में अधिसूचना भी प्रकाशित की जा रही है। इस नए रेल लिंक के बन जाने से न केवल अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल बोधगया को पहली बार सीधा रेल संपर्क मिलेगा, बल्कि दोनों राज्यों के बीच माल ढुलाई और व्यापार के नए रास्ते खुलेंगे।
Railways News: परैया बाजार और ग्रामीण इलाकों में जश्न का माहौल
रेल मंत्रालय द्वारा अधिसूचना जारी होने की खबर जैसे ही गया के परैया बाजार और आसपास के ग्रामीण इलाकों में पहुंची, स्थानीय लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। दशकों पुरानी मांग पूरी होने की खुशी में लोगों ने एक-दूसरे को बधाइयां दीं। इस परियोजना के रूट को लेकर जो खाका खींचा गया है, उसके तहत यह नई रेललाइन परैया स्टेशन से शुरू होकर विश्व प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थस्थल बोधगया और अनुमंडल मुख्यालय शेरघाटी के रास्ते झारखंड के नक्सल प्रभावित रहे चतरा जिले तक जाएगी।
चतरा और शेरघाटी जैसे इलाके जो आजादी के बाद से अब तक मुख्य रेल नेटवर्क से पूरी तरह कटे हुए थे, वहां ट्रेन की सीटी गूंजना एक बड़े आर्थिक बदलाव का संकेत है। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, इस रेललाइन के सर्वे का काम पहले ही पूरा किया जा चुका है और अब बजटीय मंजूरी मिलने के बाद भूमि अधिग्रहण की प्रशासनिक प्रक्रिया को गति दी जा रही है। इस परियोजना के धरातल पर उतरने से दक्षिण बिहार और उत्तरी झारखंड की एक बहुत बड़ी आबादी का परिवहन परिदृश्य पूरी तरह बदल जाएगा।
बिहार और झारखंड के बीच कोयला, खनिज और खाद्यान्न व्यापार को मिलेगा नया आधार
इस रेल परियोजना का सबसे बड़ा फायदा दोनों राज्यों के औद्योगिक और व्यापारिक समीकरणों को होने वाला है। अजमतगंज पंचायत के मुखिया सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि परैया चतरा रेललाइन की आधिकारिक स्वीकृति इस पिछड़े क्षेत्र के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इससे स्थानीय स्तर पर छोटे उद्योगों, कुटीर उद्योगों और कृषि उत्पादों के विपणन को एक नया और बड़ा बाजार मिलेगा, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के रास्ते खुलेंगे।
क्षेत्र के प्रमुख सीमेंट व्यवसायी पवन कुमार ने वाणिज्यिक लाभ का जिक्र करते हुए कहा कि वर्तमान में झारखंड से बिहार के विभिन्न जिलों में कोयला, लोहा, पत्थर और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों को ट्रकों के जरिए सड़क मार्ग से लाया जाता है, जो काफी खर्चीला और समय लेने वाला होता है। इस नई रेललाइन के चालू होने से कोयला और खनिज पदार्थों के साथ-साथ खाद्यान्न का परिवहन बहुत सस्ता, सुरक्षित और त्वरित गति से हो सकेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में परैया स्टेशन एक बड़े जंक्शन के रूप में तब्दील हो जाएगा, जिससे यहां से गुजरने वाली लंबी दूरी की मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव का रास्ता साफ होगा। स्टेशन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित होने से होटल, लॉज, रेस्टोरेंट, स्थानीय परिवहन और खुदरा व्यापार को भारी बूस्ट मिलेगा।
शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के मोर्चे पर युवाओं के लिए खुलेंगे नए क्षितिज
ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं और प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि यह रेल परियोजना महज पटरियां बिछाने और ट्रेन चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस पूरे क्षेत्र के शैक्षणिक और सामाजिक पिछड़ेपन को दूर करने का एक बड़ा माध्यम बनेगी। स्थानीय ग्रामीण कृष्णा ठाकुर ने बताया कि चतरा और शेरघाटी के युवाओं को उच्च शिक्षा, तकनीकी पढ़ाई या बेहतर इलाज के लिए गया या पटना आने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सड़क मार्ग से सफर न केवल थकाऊ होता है बल्कि आर्थिक रूप से भी बोझ डालता है।
ट्रेन सेवा शुरू होने से छात्र-छात्राएं बेहद कम किराए में गया के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों तक रोजाना सफर कर सकेंगे। इसके साथ ही, गंभीर रूप से बीमार मरीजों को गया के मगध मेडिकल कॉलेज या बड़े अस्पतालों तक पहुंचाना बेहद आसान हो जाएगा। इस परियोजना से दोनों क्षेत्रों की सदियों पुरानी सभ्यता और लोक संस्कृति का आदान-प्रदान बढ़ेगा। गया का तिलकुट, पत्थरशिल्प और झारखंड के ग्रामीण उत्पाद एक-दूसरे के बाजारों में आसानी से उपलब्ध होंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगी।
अगले चरण की प्रशासनिक तैयारी और भूमि अधिग्रहण की रूपरेखा
रेल मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद अब इस परियोजना के अगले चरण की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। पूर्व मध्य रेलवे (इसीआर) के हाजीपुर मुख्यालय और धनबाद रेल मंडल के अधिकारी संयुक्त रूप से इस परियोजना के निर्माण कार्य की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। इस रेललाइन के निर्माण के लिए गया और चतरा जिलों के दर्जनों गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया जाना है, जिसके लिए जिला प्रशासन के सहयोग से बहुत जल्द रैयतों की सूची तैयार कर मुआवजा वितरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
रेलवे का लक्ष्य है कि इस 2500 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि का उपयोग आधुनिक तकनीक से ट्रैक बिछाने, मजबूत पुल-पुलियों के निर्माण और स्टेशनों पर अत्याधुनिक यात्री सुविधाएं विकसित करने में किया जाए। इस परियोजना में पर्यावरण के मानकों का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है ताकि वन क्षेत्रों को कम से कम नुकसान हो। दोनों राज्यों की सरकारें भी इस प्रोजेक्ट को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं और प्रशासनिक स्तर पर हर संभव मदद का भरोसा दिया गया है। आने वाले तीन से चार सालों में जब इस रूट पर पहली पैसेंजर ट्रेन दौड़ेगी, तो यह पूर्वी भारत के विकास पथ पर एक मील का पत्थर साबित होगी।
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