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Jharkhand News: वर्दी की शर्मनाक हरकत, मूक नाबालिग को थाने ले जाने के बजाय अपने घर ले गया पुलिसकर्मी, मां ने लगाए गंभीर आरोप

Jharkhand News: राजधानी रांची में खाकी का एक ऐसा चेहरा सामने आया है जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीआईटी ओपी क्षेत्र में एक मूक नाबालिग लड़की को पेट्रोलिंग टीम द्वारा रेस्क्यू किया गया था, लेकिन उसे सुरक्षित स्थान या थाने पर ले जाने के बजाय एक पुलिस जमादार उसे अपने निजी घर ले गया। हैरानी की बात यह है कि जब अधिकारियों ने लड़की के बारे में पूछताछ की, तो उसे बीच रास्ते कचहरी चौक पर छोड़ दिया गया। सबसे डरावना पहलू यह है कि जब लड़की को दोबारा बरामद किया गया, तो उसके कपड़े बदले हुए थे।

Jharkhand News: क्या था पूरा मामला और पुलिस की लापरवाही

घटना की शुरुआत तब हुई जब पेट्रोलिंग के दौरान पुलिस टीम को एक सुनसान जगह पर मूक नाबालिग लड़की अकेली मिली। नियमानुसार, किसी भी नाबालिग, विशेषकर जो अपनी बात कहने में असमर्थ हो, उसे तुरंत महिला थाना या बाल संरक्षण गृह यानी प्रेमाश्रय ले जाना चाहिए था। लेकिन यहां प्रक्रिया का पालन करने के बजाय जमादार ने अपनी मर्जी चलाई। उसने नाबालिग को सरकारी सुरक्षा कवच देने के बजाय सीधे अपने घर पहुंचा दिया। यह हरकत न केवल विभागीय नियमों के खिलाफ है, बल्कि एक अबोध बच्ची की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ भी है।

जब अधिकारियों ने पूछा तो कचहरी चौक पर छोड़ी बच्ची

सच्चाई तब खुलकर सामने आई जब वरीय अधिकारियों को इस नाबालिग के बारे में भनक लगी। सूत्रों के अनुसार, जब अधिकारियों ने जमादार से लड़की के ठिकाने के बारे में कड़ा सवाल किया, तो बचने के लिए उसे आनन फानन में शहर के व्यस्त कचहरी चौक पर छोड़ दिया गया। एक ऐसी लड़की जो बोल नहीं सकती, उसे भीड़भाड़ वाले इलाके में अकेला छोड़ना उसकी जान को जोखिम में डालने जैसा था। बाद में महिला थाना पुलिस की टीम वहां पहुंची और उसे अपनी कस्टडी में लिया, जिसके बाद उसे प्रेमाश्रय भेजा जा सका।

मां का सवाल, बेटी के कपड़े कैसे बदले

इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक और रहस्यमयी पहलू कपड़ों का बदलना है। नाबालिग की मां ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जब उनकी बेटी पुलिस के संरक्षण में थी, तो उसके कपड़े कैसे बदले गए? यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब पुलिस प्रशासन को देना ही होगा। क्या बच्ची के साथ कोई अनहोनी हुई या यह महज लापरवाही का परिणाम है, इन बिंदुओं पर अब लोग सवाल उठा रहे हैं। मां का दर्द साफ है कि अगर पुलिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता, तो फिर आम आदमी अपनी बेटियों की सुरक्षा के लिए किसके पास जाए।

नियमों की धज्जियां और कानूनी पेच

कानून के जानकार बताते हैं कि किशोर न्याय अधिनियम यानी जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत ऐसे मामलों में पुलिस की भूमिका अत्यंत संवेदनशील होती है। पुलिस को बच्चे को सुरक्षित रखने के साथ ही तुरंत बाल कल्याण समिति को सूचित करना होता है। यहां उस प्रक्रिया का पालन तो दूर, उसे एक निजी घर ले जाकर उसे एक संदिग्ध स्थिति में डाल दिया गया। बीआईटी थाना प्रभारी अजय कुमार दास का कहना है कि पेट्रोलिंग के दौरान लड़की मिली थी और वह बोल नहीं पा रही थी, लेकिन इस स्पष्टीकरण से यह साबित नहीं होता कि उसे घर क्यों ले जाया गया।

Jharkhand News: पुलिस प्रशासन पर उठते सवाल

रांची के थानों में अक्सर ऐसी खबरें आती हैं, लेकिन यह घटना पुलिस की संवेदनशीलता पर बहुत बड़ा बदनुमा दाग है। जनता के बीच पुलिस की छवि रक्षक की होती है। जब रक्षक ही भक्षक की तरह व्यवहार करने लगे, तो समाज में डर का माहौल बनना स्वाभाविक है। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर लोग इस जमादार के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। आम लोगों का मानना है कि केवल सस्पेंशन ही काफी नहीं है, बल्कि इस मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि उस दौरान बच्ची के साथ घर के अंदर क्या हुआ।

Jharkhand News: अब आगे की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

इस मामले में अब हर किसी की नजर वरिष्ठ अधिकारियों की अगली कार्रवाई पर टिकी है। क्या विभाग अपने ही कर्मी को बचाने की कोशिश करेगा या फिर एक मिसाल कायम करते हुए उसे नौकरी से बाहर का रास्ता दिखाएगा? घटना के बाद से पुलिस मुख्यालय में भी हड़कंप मचा है। यह मामला केवल एक अनुशासनहीनता का नहीं, बल्कि मानव तस्करी या किसी बड़ी अनहोनी के डर से भी जुड़ा है। शहर के बुद्धिजीवियों का कहना है कि यदि मामले की जांच में हीलाहवाली हुई, तो पुलिस के प्रति जनता का जो थोड़ा बहुत भरोसा बचा है, वह भी खत्म हो जाएगा।

एक नाबालिग, जो अपनी पीड़ा बयां करने में सक्षम नहीं है, वह आज न्याय की गुहार लगा रही है। पुलिस की जिस वर्दी को उसे सुरक्षा देनी थी, उसी वर्दी ने उसे एक अनिश्चित भविष्य के मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। यह घटना आईना दिखाती है कि कैसे कुछ लापरवाह अधिकारियों के कारण पूरे विभाग को बदनामी झेलनी पड़ती है। अब वक्त आ गया है कि रांची पुलिस इस मामले में पारदर्शिता दिखाए और दोषियों को सख्त सजा दे, ताकि भविष्य में कोई भी पुलिसकर्मी किसी अबोध की सुरक्षा से इस तरह का खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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