डेस्क – साल 2025 एक तरफ खुशियों और उपलब्धियों का साल रहा, तो दूसरी तरफ कई महान हस्तियों के निधन ने सबको दुखी कर दिया। धर्म के क्षेत्र से लेकर साहित्य, कला, संगीत और समाजसेवा तक, कई ऐसे लोग हमसे बिछड़ गए जिन्होंने अपने काम से समाज को नई दिशा दी। इनकी यादें हमेशा हमारे साथ रहेंगी। इस लेख में हम उन प्रमुख हस्तियों को याद करते हैं जो इस साल हमें छोड़कर गए।
धर्म क्षेत्र की प्रमुख हस्तियां
2025 में धर्म और आध्यात्मिक जगत को बड़ा झटका लगा। वरिष्ठ आरएसएस प्रचारक डॉ. शंकर राव तत्ववादी का मार्च में 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे आरएसएस के अंतरराष्ट्रीय समन्वयक रहे और हिंदू धर्म के प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा, हिंदू धार्मिक नेता राम विलास वेदांती का भी निधन हुआ, जो पूर्व सांसद थे और अयोध्या आंदोलन से जुड़े रहे। इन हस्तियों ने धर्म को समाज सेवा से जोड़कर लाखों लोगों को प्रेरित किया। उनकी कमी धर्म जगत में हमेशा महसूस की जाएगी।
साहित्य जगत की खोई हुई रत्न
साहित्य के क्षेत्र में इस साल कई बड़े नाम हमसे दूर हो गए। प्रसिद्ध कवि, चित्रकार और पत्रकार पृतिश नंदी का जनवरी में हृदयाघात से निधन हो गया। वे 74 वर्ष के थे और अपनी कविताओं, फिल्मों तथा जानवरों के अधिकारों के लिए काम करने के लिए जाने जाते थे। ओडिया साहित्य के दिग्गज रामकांत रथ का भी निधन हुआ, जिन्हें साहित्य अकादमी फेलोशिप मिली थी। उनकी रचनाएं जैसे ‘श्री राधा’ और ‘श्रेष्ठ कविता’ आज भी पढ़ी जाती हैं। इन लेखकों ने हिंदी और क्षेत्रीय साहित्य को समृद्ध किया। उनके जाने से साहित्य की दुनिया सूनी हो गई।
कला और संगीत की चमकती सितारे जो बुझ गए
कला और संगीत के क्षेत्र में 2025 सबसे दुखद साल रहा। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र का नवंबर में 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे ‘ही-मैन’ के नाम से मशहूर थे और फिल्मों जैसे ‘शोले’ में अपनी भूमिका से अमर हो गए। ‘भारत कुमार’ कहे जाने वाले मनोज कुमार का अप्रैल में 87 वर्ष की उम्र में देहांत हुआ। उनकी देशभक्ति वाली फिल्में जैसे ‘उपकार’ और ‘पूराब और पश्चिम’ आज भी प्रेरणा देती हैं। कॉमेडी के राजा गोवर्धन असरानी (असरानी) का अक्टूबर में 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। ‘शोले’ में जेलर की भूमिका से वे घर-घर प्रसिद्ध हुए। गायक जुबीन गर्ग का सितंबर में सिंगापुर में 52 वर्ष की आयु में निधन हो गया, जो असमिया और बॉलीवुड संगीत के बड़े नाम थे। बंगाली गायक-गीतकार प्रतुल मुखोपाध्याय का फरवरी में कैंसर से निधन हुआ। कार्टूनिस्ट हरीश चंद्र शुक्ल ‘काक’ और मूर्तिकार हिम्मत शाह जैसे कलाकारों का भी जाना कला जगत के लिए बड़ा नुकसान है। इन कलाकारों ने अपनी कला से लाखों दिलों को छुआ।
समाजसेवा और अन्य क्षेत्रों के योद्धा
समाजसेवा के क्षेत्र में बाबा आढ़व का दिसंबर में 95 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे मजदूरों और गरीबों के अधिकारों के लिए जीवनभर लड़ते रहे। उनकी प्रेरणा से कई सामाजिक आंदोलन चले। इसके अलावा, परमाणु वैज्ञानिक राजगोपाल चिदंबरम का जनवरी में निधन हुआ, जिन्होंने पोखरण-2 परीक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पूर्व मुख्यमंत्री वी.एस. अच्युतानंदन का जुलाई में 101 वर्ष की आयु में देहांत हुआ। वे केरल की राजनीति और समाजसेवा के प्रतीक थे। ये हस्तियां समाज को बेहतर बनाने के लिए समर्पित रहीं। उनके काम से आज भी कई लोग प्रेरित होते हैं।
निष्कर्ष :
साल 2025 हमें सिखाता है कि जीवन कितना अनमोल और क्षणभंगुर है। इन महान हस्तियों ने धर्म, साहित्य, कला और समाजसेवा में जो योगदान दिया, वह आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करेगा। वे भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी रचनाएं, फिल्में, गाने और काम हमेशा जीवित रहेंगे। इन सभी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि। उनकी आत्मा को शांति मिले और हम उनके दिखाए रास्ते पर चलें।



