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अमेरिका में उथल-पुथल: ट्रंप ने 29 राजदूतों को दिखाया बाहर का रास्ता, वजह चौंकाने वाली

डेस्क – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में विदेश नीति को नई दिशा देने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। ट्रंप प्रशासन ने करीब 29 देशों में तैनात अपने करियर राजदूतों और वरिष्ठ दूतावास अधिकारियों को वापस बुलाने का फैसला किया है। ये राजदूत ज्यादातर बाइडेन प्रशासन के समय नियुक्त किए गए थे। इस फैसले से अमेरिका की विदेश नीति में ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडे को मजबूत करने की कोशिश साफ दिख रही है। आइए जानते हैं इसकी पूरी वजह और असर।

क्या हुआ exactly?

ट्रंप प्रशासन ने पिछले हफ्ते इन राजदूतों को नोटिस भेजा कि जनवरी 2026 तक उनका कार्यकाल खत्म हो जाएगा। ये राजदूत करियर डिप्लोमैट हैं, यानी वे पेशेवर राजनयिक जो सालों से विदेश सेवा में हैं। आमतौर पर नए राष्ट्रपति राजनीतिक नियुक्तियों वाले राजदूतों को बदलते हैं, लेकिन करियर राजदूतों को रखा जाता है क्योंकि वे किसी भी प्रशासन की नीतियों को लागू करते हैं। लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इस बार करियर राजदूतों को भी निशाना बनाया है। स्टेट डिपार्टमेंट के दो अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि ये बदलाव अमेरिका की विदेशी मुद्रा को फिर से आकार देने के लिए हैं। प्रभावित राजदूतों को नौकरी से नहीं निकाला जा रहा, बल्कि वे वाशिंगटन लौटकर अन्य जिम्मेदारियां संभाल सकते हैं।

सबसे ज्यादा असर अफ्रीका पर

इस बदलाव से अफ्रीका महाद्वीप सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। यहां 13 देशों से राजदूत वापस बुलाए जा रहे हैं। इनमें शामिल हैं: बुरुंडी, कैमरून, केप वर्डे,गैबॉन, मेडागास्कर, मॉरीशस, नाइजर,नाइजीरिया. रवांडा. सेनेगल. सोमालिया. युगांडा

इसके अलावा एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के 6 देश प्रभावित हैं, जैसे फिलीपींस, वियतनाम, पापुआ न्यू गिनी आदि। यूरोप में आर्मेनिया, स्लोवाकिया, मोंटेनेग्रो और मैसेडोनिया जैसे देश शामिल हैं। मध्य पूर्व में अल्जीरिया और मिस्र, दक्षिण एशिया में नेपाल और श्रीलंका, तथा पश्चिमी गोलार्ध में ग्वाटेमाला और सूरीनाम से भी राजदूत वापस आ रहे हैं।

वजह क्या है?Image result for ट्रंप ने 29 राजदूतों को दिखाया बाहर का रास्ता,

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि राजदूत राष्ट्रपति का व्यक्तिगत प्रतिनिधि होता है। इसलिए ऐसे लोग चाहिए जो पूरी तरह से ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडे को आगे बढ़ाएं। स्टेट डिपार्टमेंट ने इसे किसी भी प्रशासन की सामान्य प्रक्रिया बताया। उन्होंने कहा, “यह राष्ट्रपति का अधिकार है कि वे ऐसे व्यक्ति चुनें जो उनके एजेंडे को लागू करें।” ट्रंप का ‘अमेरिका फर्स्ट’ मतलब है कि अमेरिका की अपनी हितों को सबसे ऊपर रखना। पहले कार्यकाल में भी ट्रंप ने विदेश नीति में बड़े बदलाव किए थे, जैसे कई अंतरराष्ट्रीय समझौतों से बाहर निकलना। अब दूसरे कार्यकाल में वे पुरानी बाइडेन नीतियों से पूरी तरह छुटकारा चाहते हैं। ये राजदूत बाइडेन के समय नियुक्त हुए थे, इसलिए उन्हें हटाकर ट्रंप अपने वफादार लोगों को जगह देना चाहते हैं।

विवाद क्यों?

यह फैसला विवादों में है क्योंकि करियर राजदूतों को आमतौर पर नहीं हटाया जाता। अमेरिकी राजनयिकों के यूनियन और कुछ सांसदों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे अमेरिकी कूटनीति में स्थिरता प्रभावित होगी। राजदूत देशों के बीच संबंध बनाए रखते हैं, स्वास्थ्य, मानवीय मदद और वीजा जैसे काम संभालते हैं। अचानक बदलाव से इन कामों में देरी हो सकती है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अमेरिका की विश्वसनीयता पर असर पड़ेगा। नए राजदूतों की नियुक्ति में समय लगेगा, और अगर राजनीतिक लोग आए तो अनुभव की कमी हो सकती है।

भारत पर क्या असर?

भारत से कोई राजदूत वापस नहीं बुलाया गया है। अमेरिका-भारत संबंध ट्रंप के कार्यकाल में मजबूत रहे हैं। ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी की अच्छी दोस्ती जगजाहिर है। हालांकि, ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति से व्यापार और आव्रजन जैसे मुद्दों पर भारत को सतर्क रहना होगा। लेकिन इस खास फैसले से भारत सीधे प्रभावित नहीं है।

निष्कर्ष :

ट्रंप का यह कदम उनकी विदेश नीति की नई शुरुआत है। वे अमेरिका को पहले की तरह मजबूत और स्वतंत्र बनाना चाहते हैं। यह बदलाव दिखाता है कि ट्रंप पुरानी व्यवस्था से पूरी तरह ब्रेक लेना चाहते हैं। हालांकि इससे कुछ समय के लिए अमेरिकी दूतावासों में खालीपन आ सकता है, लेकिन लंबे समय में ट्रंप को उम्मीद है कि इससे उनकी नीतियां तेजी से लागू होंगी। दुनिया भर के देश इस पर नजर रखे हुए हैं, क्योंकि अमेरिका की विदेश नीति से वैश्विक मामलों पर बड़ा असर पड़ता है। क्या यह उलटफेर सफल होगा या विवाद बढ़ाएगा, यह आने वाला समय बताएगा।

PRAGATI DIXIT
Author: PRAGATI DIXIT

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