चाईबासा: श्री श्री सरस्वती हरि बोल कमेटी द्वारा चाईबासा स्थित दुर्गा मंदिर के परिसर में आयोजित अखंड हरी कीर्तन के समापन के बाद बंगाल के प्रसिद्ध लोक संगीत “बाउल गीत” का कार्यक्रम बड़े धूमधाम से संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम देर रात तक चला और इसमें पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले के 15 कलाकारों ने अपने अद्भुत प्रदर्शन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम के आयोजक कमेटी के वरिष्ठ सदस्य बापी कुंडू ने जानकारी दी कि इस बाउल गीत कार्यक्रम में कलाकारों ने जीवन, मृत्यु, समाज, परिवार और देश के मुद्दों पर चर्चा करते हुए प्रभु की लीला का भी गुणगान किया। बाउल गीत के माध्यम से शरीर के विभिन्न अंगों के महत्व पर चर्चा करते हुए गीतों ने उपस्थित दर्शकों को जीवन के गहरे पहलुओं से रूबरू कराया।
बाउल संगीत, जो बंगाल का सबसे लोकप्रिय लोक संगीत है, की चर्चा करते हुए कार्यक्रम में भाग लेने वाले कलाकारों ने बताया कि यह संगीत शैली पिछले 530 वर्षों से चली आ रही है और बंगाल की सांस्कृतिक धरोहर का अहम हिस्सा बन चुकी है। कार्यक्रम में केवल गीत ही नहीं, बल्कि नृत्य भी पेश किया गया, जिससे वातावरण और भी रंगीन और उत्साही बन गया। कलाकारों के प्रदर्शन ने दर्शकों के दिलों को छू लिया और हजारों की संख्या में मौजूद लोग तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाते रहे।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में श्री श्री सरस्वती हरि बोल कमेटी के वरिष्ठ सदस्य डॉ. ए के गोस्वामी, वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन दरिपा, अरुण दरिपा, रघु, तरुण दरिपा सहित सभी सदस्यों का योगदान सराहनीय रहा। उन्होंने इस सांस्कृतिक आयोजन को व्यवस्थित और समृद्ध बनाने के लिए कठिन मेहनत की।
समारोह का समापन एक बहुत ही उत्साहवर्धक और सकारात्मक माहौल में हुआ, और इस आयोजन ने न केवल चाईबासा के लोगों को एक अद्भुत सांस्कृतिक अनुभव दिया, बल्कि बंगाल की समृद्ध सांगीतिक परंपरा को भी सम्मानित किया।

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