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सावधान! प्रदूषण से जल रही आंखें – ये 8 गलतियाँ भूलकर भी न करें, वरना हो जाएगा गंभीर इन्फेक्शन

दिल्ली – एनसीआर समेत कई शहरों में वायु प्रदूषण चरम पर है। स्मॉग की मोटी चादर ने लोगों की आंखों को सबसे ज्यादा निशाना बनाया है। डॉक्टरों के अनुसार, प्रदूषण के कारण आंखों में जलन, लालिमा, खुजली और पानी आने की शिकायतें 50-60 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। हवा में मौजूद पीएम 2.5, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड जैसे जहरीले कण आंखों की नाजुक सतह पर हमला करते हैं, जिससे ड्राई आई सिंड्रोम, एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस और यहां तक कि संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। अगर सही समय पर सावधानी न बरती जाए, तो ये समस्या लंबे समय तक परेशान कर सकती है। इस लेख में हम बताएंगे कि प्रदूषण के समय आंखों की देखभाल में लोग अक्सर कौन-सी 8 गलतियां करते हैं, जिनसे बचना जरूरी है।

प्रदूषण आंखों को कैसे प्रभावित करता है?

वायु प्रदूषण सिर्फ सांस की तकलीफ ही नहीं पैदा करता, बल्कि आंखें सीधे हवा के संपर्क में होने से सबसे पहले प्रभावित होती हैं। हवा में मौजूद बारीक कण आंखों की आंसू की परत को खराब कर देते हैं, जिससे आंखें सूखी हो जाती हैं। इससे जलन, चुभन और लालिमा होती है। लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से क्रॉनिक एलर्जी, ड्राई आई और यहां तक कि कॉर्निया को नुकसान पहुंच सकता है। अध्ययनों के अनुसार, प्रदूषित इलाकों में रहने वाले लोगों में आंखों की बीमारियां चार गुना ज्यादा होती हैं।

आंखों में खुजली होने पर उन्हें रगड़ना

ये सबसे आम गलती है। खुजली या जलन होने पर लोग आंखें रगड़ते हैं, लेकिन इससे हाथों पर चिपके प्रदूषक कण आंखों में चले जाते हैं। इससे जलन बढ़ती है और बैक्टीरियल इन्फेक्शन का खतरा कई गुना हो जाता है। इसके बजाय ठंडे पानी से आंखें धोएं या डॉक्टर की सलाह से लुब्रिकेटिंग ड्रॉप्स डालें।

बाहर निकलते समय चश्मा या सनग्लासेस न पहनना

प्रदूषण के समय बाहर जाते हुए आंखों को खुला छोड़ना बड़ी भूल है। धूल-मिट्टी और जहरीले कण सीधे आंखों में घुस जाते हैं। हमेशा प्रोटेक्टिव चश्मा या रैप-अराउंड सनग्लासेस पहनें। ये एक सुरक्षा कवच की तरह काम करते हैं और कणों को आंखों तक पहुंचने से रोकते हैं।

कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल जारी रखना

प्रदूषण में कॉन्टैक्ट लेंस पहनना खतरनाक है। लेंस कणों को फंसा लेते हैं, जिससे जलन और इन्फेक्शन बढ़ता है। ऐसे दिनों में चश्मे का इस्तेमाल करें। अगर जरूरी हो तो लेंस निकालकर आंखों को आराम दें।

आंखों का मेकअप न हटाना या इस्तेमाल करना

मेकअप के कण प्रदूषण के साथ मिलकर आंखों में जलन पैदा करते हैं। रात को सोने से पहले मेकअप पूरी तरह साफ करें। प्रदूषण ज्यादा होने पर आई मेकअप बिलकुल न करें, वरना इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाएगा।

ज्यादा देर तक स्क्रीन के सामने बैठना

प्रदूषण पहले से आंखों को थका रहा होता है, ऊपर से मोबाइल या कंप्यूटर की स्क्रीन देखते रहने से ब्लिंकिंग कम हो जाती है और आंखें और सूखी हो जाती हैं। हर 20 मिनट में 20 सेकंड दूर देखें और स्क्रीन टाइम कम करें।

पानी कम पीना

शरीर में पानी की कमी से आंसू कम बनते हैं, जिससे प्रदूषक कण आसानी से आंखों में चिपक जाते हैं। दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं। इससे आंसू की परत मजबूत रहती है और आंखें सुरक्षित रहती हैं।

घर के अंदर खिड़कियां-दरवाजे खोलकर रखना

प्रदूषण बाहर ही नहीं, घर के अंदर भी घुस जाता है। खिड़कियां खोलने से स्मॉग अंदर आता है। प्रदूषण ज्यादा होने पर घर बंद रखें और एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।

समस्या को नजरअंदाज करना या खुद दवा करना

जलन या लालिमा को मामूली समझकर इग्नोर करना या बिना डॉक्टर के ड्रॉप्स डालना गलत है। अगर समस्या 2-3 दिन से ज्यादा रहे तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से मिलें। देरी से इन्फेक्शन गंभीर हो सकता है।

सही देखभाल के कुछ आसान उपाय

बाहर से आने पर ठंडे पानी से आंखें धोएं।

. डॉक्टर की सलाह से लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स इस्तेमाल करें।

. पौष्टिक आहार लें, जैसे हरी सब्जियां, फल और ओमेगा-3 से भरपूर चीजें।

. हाथ बार-बार धोएं और आंखों को छूने से बचें।

निष्कर्ष :

प्रदूषण एक गंभीर समस्या है, लेकिन छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर हम अपनी आंखों की रक्षा कर सकते हैं। उपरोक्त 8 गलतियों से बचें तो इन्फेक्शन का खतरा काफी कम हो जाएगा। आंखें अनमोल हैं, इन्हें प्रदूषण से बचाना हमारी जिम्मेदारी है। अगर जलन या कोई नई समस्या हो तो डॉक्टर से मिलना न भूलें। स्वस्थ आंखों से ही हम इस दुनिया की सुंदरता देख पाते हैं। सावधान रहें, सुरक्षित रहें!

PRAGATI DIXIT
Author: PRAGATI DIXIT

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