Women’s Health: महिलाओं की सेहत के बारे में बात करें तो 30 साल की उम्र एक बहुत अहम पड़ाव होती है। इस उम्र के बाद शरीर में कई तरह के बदलाव आने शुरू होते हैं और इन्हीं में से एक है हड्डियों का धीरे-धीरे कमजोर होना। इसकी सबसे बड़ी वजह होती है शरीर में कैल्शियम की कमी। लेकिन समस्या यह है कि ज्यादातर महिलाएं इसके शुरुआती संकेतों को पहचान नहीं पातीं या फिर उन्हें थकान या उम्र का असर समझकर अनदेखा कर देती हैं। यही लापरवाही आगे चलकर ऑस्टियोपोरोसिस जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है। आज हम आपको बताएंगे कि कैल्शियम की कमी होने पर शरीर किस तरह के संकेत देता है और आप किन आसान तरीकों से इस कमी को दूर कर सकती हैं।
30 के बाद क्यों कम होने लगता है कैल्शियम?
हमारा शरीर खुद कैल्शियम नहीं बना सकता। यह पूरी तरह उस खाने पर निर्भर करता है जो हम खाते हैं। 30 साल की उम्र तक हड्डियों का घनत्व यानी बोन डेंसिटी अपने सबसे ऊंचे स्तर पर होती है। लेकिन इसके बाद यह धीरे-धीरे कम होने लगती है।
महिलाओं में यह प्रक्रिया पुरुषों की तुलना में ज्यादा तेज होती है, खासकर मेनोपॉज के आसपास। हार्मोन में बदलाव की वजह से कैल्शियम का अवशोषण कम हो जाता है और हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। इसीलिए डॉक्टर भी 30 की उम्र के बाद महिलाओं को अपनी डाइट और जीवनशैली पर खास ध्यान देने की सलाह देते हैं।
कैल्शियम की कमी के 5 शुरुआती संकेत जो महिलाएं अक्सर अनदेखा कर देती हैं

पहला संकेत: मांसपेशियों में बार-बार खिंचाव और दर्द
अगर आपके पैरों, हाथों या बाहों में बार-बार खिंचाव या ऐंठन होती है तो इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज न करें। यह कैल्शियम की कमी का सबसे पहला और आम संकेत है। कई बार चलते समय जांघों में अचानक तेज दर्द उठता है या रात को सोते वक्त पैरों में ऐंठन होती है। यह सब इस बात के संकेत हैं कि आपकी मांसपेशियों को पर्याप्त कैल्शियम नहीं मिल रहा।
दूसरा संकेत: पूरी नींद के बाद भी थकान और सुस्ती
आपने पूरी रात सोई, फिर भी सुबह उठते ही थकान महसूस होती है? दिनभर काम में मन नहीं लगता, दिमाग भारी-भारी रहता है और कभी-कभी हल्का चक्कर भी आता है? अगर ऐसा अक्सर होता है तो यह सिर्फ नींद की कमी नहीं बल्कि कैल्शियम की कमी का संकेत भी हो सकता है। डॉक्टर इसे ब्रेन फॉग भी कहते हैं जो हड्डियों और नर्वस सिस्टम के कमजोर होने पर होता है।
तीसरा संकेत: नाखूनों का टूटना और त्वचा का रूखापन
अगर आपके नाखून बहुत जल्दी टूट जाते हैं, पतले हो गए हैं या आसानी से मुड़ जाते हैं, तो यह एक बड़ा संकेत है। इसी तरह अगर त्वचा में लगातार रूखापन रहता है, क्रीम लगाने के बाद भी नमी नहीं टिकती और खुजली होती है, तो इसकी जड़ में भी कैल्शियम की कमी हो सकती है। त्वचा और नाखूनों की सेहत का सीधा संबंध हमारे शरीर के अंदरूनी पोषण से होता है।
चौथा संकेत: दांतों का कमजोर होना और मसूड़ों में दर्द
यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि हमारे शरीर का लगभग 99 प्रतिशत कैल्शियम हड्डियों और दांतों में जमा होता है। जब शरीर में कैल्शियम कम होता है तो वह हड्डियों और दांतों से ही इसे खींचना शुरू कर देता है। इससे दांत कमजोर पड़ने लगते हैं, मसूड़ों में सूजन और दर्द होता है और दांतों में सड़न जल्दी-जल्दी होने लगती है। अगर आप हाल के दिनों में दांतों के डॉक्टर के पास बार-बार जा रही हैं तो एक बार कैल्शियम की जांच भी जरूर करवाएं।
पांचवां संकेत: हल्की चोट में फ्रैक्चर और पीठ में दर्द
यह सबसे गंभीर और आखिरी संकेत है। जब कैल्शियम की कमी लंबे समय तक अनदेखी रहे तो हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि छोटी सी चोट में भी फ्रैक्चर हो सकता है। पीठ और गर्दन में लगातार दर्द रहना, रीढ़ की हड्डी में तकलीफ होना, ये सब ऑस्टियोपोरोसिस की शुरुआत हो सकती है। इस अवस्था तक पहुंचने से पहले ही सावधान हो जाना जरूरी है।
कैल्शियम की कमी से बचने के आसान और असरदार तरीके
डेयरी प्रोडक्ट्स को डाइट का हिस्सा बनाएं
दूध, दही, पनीर और छाछ कैल्शियम के सबसे भरोसेमंद और आसानी से मिलने वाले स्रोत हैं। रोजाना कम से कम दो गिलास दूध या एक कटोरी दही खाने की आदत डालें। अगर आप लैक्टोज इनटॉलेरेंट हैं यानी दूध पचाने में दिक्कत होती है, तो दही और पनीर बेहतर विकल्प हैं क्योंकि इनमें लैक्टोज की मात्रा कम होती है।
हरी सब्जियां जरूर खाएं
पालक, मेथी, ब्रोकोली और बीन्स जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां सिर्फ आयरन का ही नहीं बल्कि कैल्शियम का भी अच्छा स्रोत हैं। इन्हें अपने रोजाना के खाने में शामिल करें। इनमें फाइबर भी भरपूर होता है जो पाचन को दुरुस्त रखता है।
तिल, बादाम और चिया सीड्स खाएं
अगर आप नट्स और बीज खाने की आदत डाल लें तो कैल्शियम की कमी दूर करना आसान हो जाता है। सफेद तिल, चिया सीड्स, बादाम और अखरोट इनमें सबसे आगे हैं। एक चम्मच सफेद तिल में इतना कैल्शियम होता है जितना एक गिलास दूध में। इसे दही में मिलाकर या सब्जियों पर डालकर खाया जा सकता है।
विटामिन-डी के बिना कैल्शियम अधूरा है
बहुत कम लोग जानते हैं कि सिर्फ कैल्शियम खाने से काम नहीं चलता। शरीर को कैल्शियम सोखने के लिए विटामिन-डी की जरूरत होती है। और विटामिन-डी का सबसे अच्छा और मुफ्त स्रोत है धूप। रोजाना सुबह 15 से 20 मिनट धूप में बैठना या टहलना आपके शरीर में विटामिन-डी की जरूरत पूरी करता है। इससे कैल्शियम का अवशोषण बेहतर होगा और हड्डियां मजबूत रहेंगी।
चाय, कॉफी और नमक की मात्रा कम करें
यह बात सुनने में थोड़ी अजीब लग सकती है लेकिन ज्यादा चाय, कॉफी और नमक खाने से शरीर में मौजूद कैल्शियम पेशाब के जरिए बाहर निकल जाता है। इसलिए दिन में दो से ज्यादा चाय या कॉफी पीने से बचें और खाने में नमक की मात्रा कम रखें।
कब करवाएं डॉक्टर से जांच?
अगर ऊपर बताए गए किसी भी एक या उससे ज्यादा संकेत आपको खुद में दिख रहे हैं, तो बिना देर किए अपने डॉक्टर से मिलें। एक साधारण ब्लड टेस्ट से कैल्शियम और विटामिन-डी का स्तर जांचा जा सकता है। समय पर पता चलने पर डाइट और जरूरत पड़ने पर सप्लिमेंट्स के जरिए इसे आसानी से ठीक किया जा सकता है।
याद रखें, 30 की उम्र के बाद सेहत का ख्याल रखना सिर्फ अपने लिए नहीं बल्कि अपने पूरे परिवार के लिए जरूरी है। छोटी-छोटी आदतें आपको लंबे समय तक स्वस्थ और मजबूत रख सकती हैं।
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