Social Media Ban in Bihar: बिहार सरकार ने सोशल मीडिया पर बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम और ऑनलाइन गेमिंग की लत को रोकने के लिए एक व्यापक पॉलिसी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य के उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने विधानसभा में इसकी जानकारी देते हुए कहा कि सरकार इस गंभीर मुद्दे पर गंभीरता से काम कर रही है और बेंगलुरु के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंस (NIMHANS) से विस्तृत रिपोर्ट मंगवाई गई है।
विधानसभा में उठा मुद्दा, सरकार की गंभीर पहल

यह मुद्दा तब उठा जब जदयू विधायक समृद्ध वर्मा ने विधानसभा के चल रहे सत्र में इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 का हवाला देते हुए बच्चों में सोशल मीडिया के बढ़ते नकारात्मक प्रभाव और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं पर चिंता व्यक्त की। उनके सवाल के जवाब में डिप्टी CM सम्राट चौधरी ने विधानसभा को आश्वस्त किया कि सरकार इस समस्या को हल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
विधायक वर्मा ने बताया कि इकोनॉमिक सर्वे में स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है कि कैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों का अत्यधिक समय बिताना उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा दुष्प्रभाव डाल रहा है। इसके बाद उप मुख्यमंत्री ने सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की विस्तृत जानकारी दी।
NIMHANS की रिपोर्ट पर आधारित पॉलिसी ड्राफ्ट
उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि सरकार ने NIMHANS से एक व्यापक रिपोर्ट की मांग की है जिसमें बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम, सोशल मीडिया के उपयोग के पैटर्न और ऑनलाइन गेमिंग की लत के कारणों और प्रभावों का गहन अध्ययन किया जाएगा।
“यह एक बहु-क्षेत्रीय मुद्दा है जिसमें न केवल शिक्षा विभाग, बल्कि स्वास्थ्य, सूचना प्रौद्योगिकी और परिवार कल्याण विभाग भी शामिल होंगे। NIMHANS की रिपोर्ट मिलने के बाद सभी संबंधित पक्षों के साथ विस्तृत चर्चा की जाएगी और एक ठोस पॉलिसी तैयार की जाएगी। संभव है कि इस पॉलिसी के बाद कानून भी लागू किया जाए,” सम्राट चौधरी ने विधानसभा में कहा।
ऑस्ट्रेलिया का कानून बनेगा प्रेरणा स्रोत
इस पॉलिसी को तैयार करते समय ऑस्ट्रेलिया के हालिया कानून का विशेष रूप से ध्यान रखा जाएगा। पिछले साल ऑस्ट्रेलिया ने दुनिया का सबसे सख्त सोशल मीडिया कानून लागू किया था, जिसमें 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था।
इस कानून के तहत कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि 16 साल से कम उम्र के बच्चे उनके प्लेटफॉर्म का उपयोग न कर सकें, अन्यथा भारी जुर्माने का प्रावधान है। इस मॉडल को बिहार में लागू करने से पहले राज्य की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर बदलाव किए जा रहे हैं।
मानसिक स्वास्थ्य पर हो रहा गंभीर असर
डॉक्टर्स और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि सोशल मीडिया की लत बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर विनाशकारी प्रभाव डाल रही है। नींद न आना, पढ़ाई में एकाग्रता की कमी, चिड़चिड़ापन, अवसाद और आक्रामक व्यवहार जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
हाल ही में दिल्ली के समीपवर्ती गाजियाबाद से एक हृदयविदारक घटना सामने आई जहाँ तीन बहनों ने ऑनलाइन गेमिंग की लत के कारण अपनी जान दे दी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया और सोशल मीडिया की लत की गंभीरता को उजागर कर दिया।
एक्सपर्ट्स की क्या राय है?
चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट डॉ. प्रिया शर्मा कहती हैं, “बच्चों का दिमाग अभी विकास के चरण में होता है। सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग उनके ब्रेन डेवलपमेंट और सामाजिक व्यवहार पर गहरा असर डाल सकता है। बिहार सरकार का यह कदम स्वागत योग्य है और अन्य राज्यों को भी इससे प्रेरणा लेनी चाहिए।”
शिक्षाविद् डॉ. राम सिंह बताते हैं, “सोशल मीडिया की लत के कारण बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान कम हो रहा है। यह न केवल उनके भविष्य के लिए बल्कि देश की प्रगति के लिए भी चिंता का विषय है।”
पॉलिसी में क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, बिहार की प्रस्तावित पॉलिसी में निम्नलिखित बातें शामिल हो सकती हैं:
• सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए आयु सत्यापन (Age verification) प्रणाली
• बच्चों के लिए समय सीमा का निर्धारण
• पेरेंटल कंट्रोल जैसे तकनीकी समाधान
• स्कूलों में डिजिटल साक्षरता प्रोग्राम
• नियमित काउंसलिंग और निगरानी प्रणाली
• सोशल मीडिया कंपनियों के लिए कड़े नियम
समाज में जागरूकता की जरूरत
सरकार की पहल के साथ-साथ समाज में भी जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है। माता-पिता को शिक्षित करना जरूरी है कि वे बच्चों के साथ समय बिताएं और उन्हें रचनात्मक गतिविधियों में व्यस्त रखें।
सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी भी है कि वे बच्चों के प्लेटफॉर्म पर उपयोग को लेकर कड़े नियम लागू करें। सरकार के साथ मिलकर काम करना ही इस समस्या को हल करने का एकमात्र रास्ता है।
अन्य राज्यों के लिए मिसाल
बिहार का यह कदम अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बन सकता है। गोवा में भी इसी तरह के कानून की मांग की गई थी, और अब बिहार इसे लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यदि बिहार में यह पॉलिसी सफल होती है, तो अन्य राज्य भी इसे अपना सकते हैं।
Social Media Ban in Bihar: निष्कर्ष
सोशल मीडिया की लत से बच्चों को बचाने के लिए सरकार का यह कदम वास्तव में सराहनीय है। हालांकि, कानून लागू करने के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। भविष्य की पीढ़ी को सुरक्षित रखने के लिए पूरी कोशिश करनी होगी ताकि तकनीक का उपयोग हानिकारक न होकर लाभकारी हो।
डिप्टी CM सम्राट चौधरी का यह बयान स्पष्ट करता है कि सरकार इस दिशा में गंभीरता से काम कर रही है और जल्द ही बच्चों के लिए एक सुरक्षित डिजिटल वातावरण तैयार किया जाएगा।
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