Rajyasabha Election 2026: बिहार की पांच राज्यसभा सीटें जो खाली हो रही हैं, उनके लिए चुनावी बिसात पूरी तरह बिछ चुकी है। 2026 के मार्च में होने वाले इन चुनावों के लिए एनडीए (NDA) और महागठबंधन (Mahagathbandhan) दोनों के बीच उम्मीदवारों के नामों को लेकर हलचल तेज है। 202 विधायकों के दम पर एनडीए गणितीय रूप से चार सीटों पर अपनी जीत सुनिश्चित कर चुका है, जबकि पांचवीं सीट के लिए मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है।
वोटिंग गणित: चार सीटों पर एनडीए की जीत तय
बिहार विधानसभा में 243 सीटें हैं, जिनमें एनडीए के पास कुल 202 विधायक हैं। एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 41 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता होती है। गणितीय रूप से, 202 विधायकों के साथ एनडीए आसानी से चार सीटों पर अपने उम्मीदवार जिता सकता है। इस तरह जेडीयू और बीजेपी दोनों को दो-दो सीटें मिलने की संभावना है।
महागठबंधन की स्थिति भी दिलचस्प है। आरजेडी के पास 35 विधायक हैं, एआईएमआईएम के 5 और बीएसपी के 1 विधायक हैं, जिससे विपक्षी खेमे में कुल 41 वोट बनते हैं। हालांकि, विपक्षी गठबंधन में आम सहमति की गुंजाइश कम दिख रही है।
रामनाथ ठाकुर – तीसरी बार का फॉर्मूला
जेडीयू की ओर से सबसे चर्चित नाम केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर का है। भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर के पुत्र रामनाथ ठाकुर अति पिछड़ा वर्ग (EBC) के बड़े चेहरा हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आमतौर पर अपने नेताओं को दो बार से ज्यादा राज्यसभा नहीं भेजते, लेकिन रामनाथ ठाकुर के मामले में यह परंपरा टूट सकती है।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार पिछड़ी जाति के वोटरों को संदेश देने के लिए रामनाथ ठाकुर को तीसरी बार मौका दे सकते हैं। केंद्रीय मंत्री होने के नाते वे नीतीश की ‘सोशल इंजीनियरिंग’ रणनीति के पूरी तरह फिट बैठते हैं।
मनीष वर्मा – नीतीश के भरोसेमंद

जेडीयू के दूसरे मजबूत चेहरे के रूप में पूर्व आई ए एस अधिकारी मनीष वर्मा का नाम उभर रहा है। वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी और भरोसेमंद माने जाते हैं। आर सी पी सिंह की तरह ही मनीष वर्मा भी उसी इलाके और जाति (कुर्मी) से आते हैं।
वर्तमान में जे डी यू के महासचिव पद पर कार्यरत मनीष वर्मा को पार्टी के भीतर नीतीश कुमार के संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर भी देखा जा रहा है। पार्टी में उनकी पकड़ और उनकी प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए उन्हें एक मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
पवन सिंह – भोजपुरी सुपरस्टार का राजनीतिक सफर
बीजेपी की ओर से सबसे चौंकाने वाला नाम भोजपुरी पावर स्टार पवन सिंह का है। बिहार और पूर्वांचल के युवाओं में उनकी जबरदस्त लोकप्रियता और ‘मास कनेक्ट’ को देखते हुए एनडीए उन्हें राज्यसभा भेज सकती है।
हाल के बिहार चुनावों में पवन सिंह ने एन डी ए के लिए आरा क्षेत्र में खूब प्रचार किया था। उनकी चुनावी रैलियों में भीड़ जुटाने की क्षमता और युवाओं पर प्रभाव को देखते हुए बीजेपी आलाकमान उन्हें राज्यसभा का इनाम दे सकती है।
उपेंद्र कुशवाहान- दिल्ली दरबार में नई चाल
राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के राज्यसभा जाने की अटकलें अब बेहद गंभीर हो चुकी हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार उपेंद्र कुशवाहा दिल्ली पहुंच चुके हैं, जहां वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर सकते हैं।
चर्चा यह भी है कि इस चुनाव के बहाने बीजेपी और आर एल एम के रिश्तों को नया आयाम दिया जा सकता है, जिसमें आर एल एम का बीजेपी में विलय का विकल्प भी शामिल है। उपेंद्र कुशवाहा अपने पुत्र दीपक प्रकाश के लिए भी राजनीतिक भविष्य की तलाश में हैं।
अन्य संभावित उम्मीदवार
बीजेपी के अन्य संभावित चेहरों में नेशनल बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, पूर्व सांसद रमा देवी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव, बिहार क्रिकेट एसोसिएशन फंक्शनरी राकेश तिवारी और ऋतुराज सिन्हा जैसे नाम शामिल हैं।
पांचवीं सीट: राजनीतिक समीकरणों का खेल
पांचवीं सीट पर एन डी ए और महागठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला होने की संभावना है। बीजेपी अपने सहयोगियों के साथ बातचीत कर रही है, जबकि उपेंद्र कुशवाहा अपनी सीट के लिए दावेदारी कर रहे हैं।
महागठबंधन में आर जे डी एक सीट के लिए उम्मीदवार देने की बात कर रहा है, लेकिन विपक्षी गठबंधन में आम सहमति की कमी के कारण यह मुकाबला एन डी ए के पक्ष में जा सकता है।
मार्च 16 है चुनाव का दिन तय
राज्यों की पांच सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव का आयोजन 16 मार्च को किया जाएगा। नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है। 16 मार्च को होने वाले चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नामों का ऐलान जल्द ही होने की उम्मीद है।
सोशल इंजीनियरिंग और जातिगत समीकरण
इन चुनावों में सोशल इंजीनियरिंग और जातिगत समीकरणों का महत्वपूर्ण भूमिका होने वाली है। जे डी यू का अति पिछड़ा वर्ग (EBC) पर ध्यान केंद्रित करने के कारण रामनाथ ठाकुर को तीसरी बार मौका दिया जा सकता है। वहीं बीजेपी युवा और लोकप्रिय चेहरों को तरजीह दे सकती है।
राजनीतिक प्रभाव और भविष्य
इन राज्यसभा चुनाव का असर केवल सदन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह आगामी बिहार विधानसभा चुनावों 2026 के लिए भी राजनीतिक संदेश देगा। जे डी यू के उम्मीदवार चयन से पार्टी की अंदरूनी शक्ति समीकरणों का भी खुलासा होगा।
जल्द ही साफ होगा सियासी पहेली
बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी बिसात पूरी तरह बिछ चुकी है। एन डी ए गणितीय रूप से चार सीटों पर जीत हासिल कर चुका है, जबकि पांचवीं सीट पर मुकाबला दिलचस्प होने वाला है। जैसे ही उम्मीदवारों के नामों का ऐलान होगा, राजनीतिक समीकरणों में और बदलाव देखने को मिलेंगे।
क्या रामनाथ ठाकुर को तीसरी बार मौका मिलेगा? क्या पवन सिंह राज्यसभा पहुंचेंगे? क्या उपेंद्र कुशवाहा को दिल्ली दरबार में सफलता मिलेगी? ये सवाल अब सभी के मन में कौंध रहे हैं, जिसका जवाब जल्द ही 16 मार्च के चुनाव परिणामों में मिलेगा।
Rajyasabha Election 2026: महत्वपूर्ण तिथियां
| आयोजन | तिथि |
| नामांकन की अंतिम तिथि | 5 मार्च 2026 |
| नामांकन पत्रों की जांच | 6 मार्च 2026 |
| नाम वापसी की अंतिम तिथि | 9 मार्च 2026 |
| मतदान और मतगणना | 16 मार्च 2026 |
| सीटें खाली होने की तिथि | 9 अप्रैल 2026 |
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