Bihar politics: बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने मौन व्रत तोड़ने के बाद बड़ा ऐलान किया है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को एक भी सीट न मिलने के बाद उन्होंने गांधी आश्रम भितिहरवा में एक दिन का मौन व्रत रखा। अब वे बिहार की लाखों महिलाओं को केंद्र में लाकर नीतीश कुमार सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं। किशोर का कहना है कि जनता ने उन्हें नकारा तो उन्होंने खुद को नकारा नहीं। यह ऐलान भविष्य के चुनावों के लिए नई रणनीति का हिस्सा लगता है।
Bihar Politics: मौन व्रत से आत्मचिंतन, अब महिलाओं पर फोकस
प्रशांत किशोर ने 20 नवंबर को भितिहरवा गांधी आश्रम में पूरा दिन मौन रखा। सुबह से शाम तक कोई भाषण या बयान नहीं दिया। उनके समर्थक बाहर इकट्ठा हुए, लेकिन अंदर घुसने की इजाजत न थी। वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। व्रत के बाद किशोर ने कहा कि चुनावी हार से सबक लिया है। अब वे बिहार संकल्प यात्रा शुरू करेंगे। यह यात्रा 15 जनवरी से चलेगी। इसमें बिहार के 1 लाख 18 हजार वार्डों में महिलाओं से मुलाकात होगी। वे उन महिलाओं को टारगेट करेंगे जिन्हें सरकार ने 10 हजार रुपये दिए हैं। किशोर खुद इन महिलाओं की मदद करेंगे ताकि वे 2 लाख रुपये के अतिरिक्त लाभ के लिए फॉर्म भर सकें। उनका मकसद इन्हीं महिलाओं को नीतीश सरकार के खिलाफ एकजुट करना है, जो पहले चुनाव में नीतीश को जिताने में अहम भूमिका निभा चुकी हैं।
नीतीश सरकार पर निशाना, क्राउडफंडिंग से चलेगी यात्रा
किशोर की रणनीति साफ है। वे कहते हैं कि जाति की राजनीति कमजोर हो रही है। 2020 में 90 फीसदी सीटें जाति पर लड़ी गईं, लेकिन 2025 में यह 60 फीसदी रह गया। अब मुद्दों पर फोकस होगा, खासकर महिलाओं के। यात्रा के लिए पैसे की कोई कमी नहीं। किशोर ने क्राउडफंडिंग का रास्ता चुना है। उन्होंने जन सुराज से जुड़े हर व्यक्ति से 1000 रुपये चंदा मांग लिया। खुद उन्होंने वादा किया कि पिछले 20 साल में कमाए गए सभी अचल संपत्ति (दिल्ली के घर को छोड़कर) यात्रा और सामाजिक योजनाओं को दान करेंगे। आने वाली 90 फीसदी कमाई भी इसी काम में लगेगी। एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में किशोर ने कहा, “अब मैं किसी पार्टी के लिए कंसल्टेंसी नहीं करूंगा। सिर्फ बिहार पर फोकस होगा। अगर पैसा नहीं तो कम में चुनाव लड़ेंगे, लेकिन बिहार की जनता को नहीं छोड़ेंगे।
चुनावी हार से सबक, भविष्य में नई शुरुआत
यह ऐलान जन सुराज की हार के बाद आया है। किशोर ने स्वीकार किया कि कैंपेन में गलतियां हुईं। लेकिन वे हार मानने वालों में से नहीं। यात्रा से वे ग्रासरूट स्तर पर समर्थन जुटाएंगे। विशेषज्ञ कहते हैं कि महिलाओं को जोड़ना स्मार्ट कदम है, क्योंकि बिहार में महिला वोटर निर्णायक भूमिका निभाती हैं। नीतीश सरकार की कल्याण योजनाओं का इस्तेमाल कर किशोर विपक्ष को मजबूत बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह यात्रा 2029 के लोकसभा चुनाव या आने वाले स्थानीय चुनावों के लिए आधार बनेगी। बिहार की जनता अब देख रही है कि किशोर का यह ‘हथियार’ कितना असरदार साबित होता है। उम्मीद है कि इससे राज्य में सकारात्मक बदलाव आए।
Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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