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बिहार में डिजिटल पुलिसिंग को बढ़ावा: ई-समन और ई-साक्ष्य नियमावली को कैबिनेट की मंजूरी

वाराणसी: राज्य में पुलिस और अभियोजन के कार्य को डिजिटल रूप में बढ़ावा देने के लिए दो महत्वपूर्ण नियमावली को स्वीकृति मिली है। राज्य मंत्रिमंडल ने गृह विभाग के प्रस्ताव पर ई-समन और ई-साक्ष्य नियमावली को मंजूरी दे दी है।

अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने बताया कि ई-समन नियमावली की स्वीकृति मिलने से डिजिटल आदेश जारी करने के साथ उसका तामिला और निष्पादन कराया जा सकेगा। इसी तरह अंतर संचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली (ICJS) के अंतर्गत डिजिटल एकीकरण के उद्देश्य से ई-साक्ष्य प्रबंधन नियमावली को स्वीकृति दी गई है।

नए कानूनों के लागू होने के बाद पुलिस का कामकाज डिजिटल रूप में बढ़ गया है। इन दोनों नियमावली की स्वीकृति से पुलिस और अभियोजन की कार्यशैली को डिजिटल रूप देने में और आसानी होगी।

इसके अलावा वित्त विभाग के प्रस्ताव पर वार्धक्य सेवानिवृत्त होने वाले सरकारी सेवकों को मात्र पेंशन की गणना के लिए वैचारिक वेतनवृद्धि अनुमान्य की गई है। इसका लाभ ऐसे पेंशनभोगियों को मिलेगा जो 30 जनू या 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होते हैं।

दो राष्ट्रीय संस्थानों के साथ होगा समझौता

राज्य सरकार ने आधारभूत संरचना के विकास और युवाओं के कौशल विकास के लिए दो राष्ट्रीय संस्थानों के साथ समझौता करने की स्वीकृति दी है। राज्य की विभिन्न परियोजनाओं में सहायता प्रदान करने के लिए नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड लिमिटेड (NIIFL) के साथ एमओयू करने का निर्णय लिया है।

इसी तरह युवाओं के सशक्तीकरण और कौशल विकास के लिए नेशनल स्टाक एक्सचेंज आफ इंडिया लिमिटेड (एनएसईआइएल), मुंबई के साथ एमओयू की स्वीकृति दी गई है। संस्था की मदद से विद्यार्थी कौशल कार्यक्रम के तहत आनलाइन वेबिनार, आफलाइन सेमिनार के माध्यम से निवेशक जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

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कुष्ठरोगी भी बन सकेंगे दस्तावेज लेखक

राज्य सरकार ने बिहार दस्तावेज लेखक अनुज्ञप्ति संशोधन नियमावली को मंजूरी दी है। इसके बाद कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों को भी दस्तावेज लेखक का लाइसेंस प्राप्त हो सकेगा। बिहार दस्तावेज लेखक अनुज्ञप्ति नियमावली 1968 भेद-भाव पूर्ण होने के कारण उसमें कुष्ठ प्रभावित व्यक्तियों को लाइसेंस प्रदान न करने का प्रविधान था।

इसके अलावा समाज कल्याण विभाग के प्रस्ताव पर कोढ़ी और पागल जैसे शब्दों को बदल कर उसकी जगह कुष्ठ रोग और मानसिक स्वास्थ्य समस्या से पीडि़त व्यक्ति किया गया है।

कैबिनेट के अन्य निर्णय

  • वाल्मीकि व्याघ्र आरक्ष फाउंडेशन के लिए 15 करोड़ रुपये के कार्पस फंड के गठन की स्वीकृति।
  • संजय गांधी जैविक उद्यान के सुचारू संचालन के लिए प्रबंधन एवं विकास सोसाइटी का गठन।
  • नगर निकायों के बकाये बिजली बिल भुगतान के लिए चार सौ करोड़ का सहायक अनुदान स्वीकृत।
  • भ्रष्टाचार के आरोप में राज्य खाद्य निगम के जिला प्रबंधक रहे सुधीर कुमार की सेवा से बर्खास्तगी।
  • आपरेशन सिंदूर के दौरान बलिदानी बीएसएफ के एसआइ मो. इम्तियाज के आश्रित पुत्र मो. इमदाद रजा को अनुकंपा पर नियुक्ति का निर्णय।
  • बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर के भू-स्थानिक सेवाओं के उपयोग की स्वीकृूति।

निष्कर्ष :

राज्य में डिजिटल पुलिसिंग, न्यायिक प्रक्रियाओं, कौशल विकास और सामाजिक समानता को मजबूत करने के लिए कैबिनेट द्वारा लिए गए निर्णय अत्यंत प्रभावी और दूरदर्शी हैं। ई-समन और ई-साक्ष्य नियमावली के लागू होने से आपराधिक न्याय प्रणाली और अधिक पारदर्शी, तेज़ और आधुनिक बनेगी। वहीं राष्ट्रीय संस्थानों के साथ एमओयू से कौशल विकास और निवेशक जागरूकता कार्यक्रमों को नई दिशा मिलेगी। दस्तावेज लेखक नियमावली में संशोधन और सामाजिक रूप से संवेदनशील शब्दों को बदलना सरकार की समावेशी सोच को दर्शाता है। अन्य फैसले राज्य के प्रशासन, संरक्षण और जनहित से जुड़े प्रयासों को और मजबूत बनाते हैं।

PRAGATI DIXIT
Author: PRAGATI DIXIT

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