बिलासपुर: नई शिक्षा नीति के तहत छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए पांचवी और आठवीं कक्षा के लिए बोर्ड परीक्षाएं अनिवार्य कर दी हैं. इस निर्णय का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारना और छात्रों को शैक्षिक रूप से मजबूत बनाना है. नए नियमों के तहत, अब छात्र इन कक्षाओं में फेल भी हो सकते हैं. इस कदम ने शिक्षा क्षेत्र में नई उम्मीदें और चुनौतियां पेश की हैं.
बदलाव से बढ़ेगी पढ़ाई में रुचि
छात्रों के अध्ययन के प्रति रुचि बढ़ाने और उनकी नींव मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया गया है. पलक संपत लाल कुर्रे ने कहा, ‘पांचवीं और आठवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाएं छात्रों की पढ़ाई के प्रति लगन बढ़ाएंगी. जिस तरह घर बनाने से पहले मजबूत नींव जरूरी होती है, उसी तरह शिक्षा की नींव प्राइमरी स्तर पर मजबूत होगी. इससे बच्चों का आगे का शैक्षणिक सफर बेहतर होगा.
नई शिक्षा नीति की दिशा में सराहनीय पहल
रमेश सूर्यकांत ने इस फैसले की सराहना करते हुए कहा, नई शिक्षा नीति के तहत यह निर्णय बच्चों की पढ़ाई के प्रति गंभीरता बढ़ाने वाला है. बोर्ड परीक्षाएं उन्हें प्रतिस्पर्धात्मक माहौल के लिए तैयार करेंगी और उनके भविष्य को नई दिशा देंगी.
शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद
संतोष ठाकुर ने कहा, ‘बच्चों की पढ़ाई की क्षमता और ध्यान बढ़ाने के लिए यह एक बेहतर कदम है. इससे न केवल बच्चों का शैक्षिक प्रदर्शन सुधरेगा बल्कि अभिभावकों का ध्यान भी बच्चों की पढ़ाई पर केंद्रित होगा.’ सरकार का यह निर्णय शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी पहल है. यह न केवल छात्रों को उनकी पढ़ाई के प्रति प्रेरित करेगा बल्कि उनकी नींव को भी मजबूत करेगा, जो उनके उज्ज्वल भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है.

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