डेस्क:हम सोचते हैं कि प्रदूषण सिर्फ फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है, लेकिन अब वैज्ञानिकों की नई रिसर्च ने चौंकाने वाला खुलासा किया है हवा और पानी में मौजूद PFAS (Per- and Polyfluoroalkyl Substances) जैसे केमिकल लिवर को धीरे-धीरे नष्ट कर रहे हैं।ये केमिकल न तो आसानी से टूटते हैं, न ही शरीर से बाहर निकलते हैं। इसलिए इन्हें “Forever Chemicals” कहा जाता है।
लिवर पर असर कैसे डालते हैं ये केमिकल?
जब PFAS या अन्य इंडस्ट्रियल केमिकल्स शरीर में पहुंचते हैं, तो वे लिवर की कोशिकाओं (Hepatocytes) में जाकर फैटी बदलाव लाते हैं।समय के साथ ये कोशिकाएं सूज जाती हैं, जिससे होता है
- फैटी लिवर
- लिवर इंफ्लेमेशन
- लिवर सिरोसिस
- और अंत में लिवर कैंसर का खतरा
AIIMS के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट के अनुसार, “यह एक धीमा ज़हर है जो सालों तक बिना लक्षण दिए शरीर को भीतर से खोखला कर देता है।”
कौन लोग हैं सबसे ज्यादा जोखिम में?
- इंडस्ट्रियल एरिया में रहने वाले लोग – जहां केमिकल फैक्ट्रियों का वेस्ट पास की नदियों या हवा में जाता है।
- फास्ट फूड या पैक्ड फूड खाने वाले लोग – क्योंकि PFAS का इस्तेमाल पैकेजिंग में होता है।
- प्लास्टिक बोतल या टेफ्लॉन कुकवेयर यूज़ करने वाले लोग – इनमें भी ऐसे केमिकल्स मौजूद रहते हैं।
- कमजोर इम्यून सिस्टम या पहले से लिवर डिजीज वाले व्यक्ति – जिनका शरीर टॉक्सिन्स को फिल्टर नहीं कर पाता।
पानी से बढ़ रहा खतरा
भारत में कई शहरों के ग्राउंडवॉटर और नदियों में PFAS, लेड (Lead), और नाइट्रेट्स की मात्रा मानक से कई गुना अधिक पाई गई है।
ये धीरे-धीरे खून में घुलकर लिवर तक पहुंचते हैं और कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त करते हैं।
WHO के अनुसार, “हर साल लाखों लोग प्रदूषित पानी से जुड़ी लिवर बीमारियों के शिकार होते हैं।”
शरीर को बचाने के लिए करें ये उपाय
- फिल्टर किया हुआ पानी पिएं – RO + UV वाले फिल्टर PFAS जैसे केमिकल्स को कुछ हद तक हटा सकते हैं।
- प्लास्टिक की बोतलें न करें इस्तेमाल – स्टील या ग्लास बोतल का प्रयोग करें।
- हरी सब्जियां और फाइबर युक्त भोजन खाएं – लिवर को डिटॉक्स करने में मदद करता है।
- शराब और जंक फूड से दूरी रखें – ये लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं।
- हर 6 महीने में लिवर फंक्शन टेस्ट करवाएं – खासकर अगर आप मेट्रो सिटी या इंडस्ट्रियल एरिया में रहते हैं।
लिवर डिटॉक्स के लिए घरेलू उपाय
- गुनगुना नींबू पानी – सुबह खाली पेट पीना टॉक्सिन्स बाहर निकालता है।
- ग्रीन टी और हल्दी दूध – दोनों ही प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट हैं।
- धनिया पानी – शरीर से भारी धातुएं (Heavy Metals) निकालने में मदद करता है।
डॉक्टरों की चेतावनी
हाल के शोधों में पाया गया है कि जिन लोगों के शरीर में PFAS स्तर अधिक था, उनमें लिवर एंजाइम (ALT, AST) बढ़े हुए पाए गए जो लिवर डैमेज का शुरुआती संकेत है।
विशेषज्ञों का कहना है: “हमें प्रदूषण को केवल सांस का नहीं, बल्कि लिवर हेल्थ का भी मुद्दा मानना होगा।”
निष्कर्ष
आज हवा और पानी में मौजूद अदृश्य केमिकल हमारे शरीर के सबसे मेहनती अंग लिवर को चुपचाप नुकसान पहुंचा रहे हैं।अगर अभी भी हम नहीं जागे, तो आने वाले वर्षों में लिवर बीमारियां नई “पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी” बन सकती हैं।



