डेस्क: तुम नींद से, सुकून से, दोस्तों से, और सबसे ज़्यादा खुद से दूर होते जा रहे हो। ये 5 ऐप्स तुम्हारा वक्त नहीं, तुम्हारा प्यार चुरा रहे हैं। 30 दिन डिलीट करके देखो – जो सुकून, जो हल्कापन, जो खुद से प्यार वापस आएगा, उसे शब्दों में बयाँ नहीं कर नहीं सकते। बस महसूस कर सकते हैं।
“30 दिन का चैलेंज नहीं, खुद से फिर से प्यार करने का वादा है।”
पहली ऐप जो तुम्हारा सुकून चुरा रही है – इंस्टाग्राम
तुम स्क्रॉल करते हो और लगता है “सबकी ज़िंदगी परफेक्ट है, सिर्फ़ मेरी नहीं”। मनोविज्ञान कहता है – ये “सोशल कम्पैरिजन” तुम्हारा डोपामाइन लूप बिगाड़ देता है। **“30 दिन बिना इंस्टा के – पहली बार मैंने खुद को आईने में देखकर मुस्कुराया।”
दूसरी ऐप – यूट्यूब शॉर्ट्स और टिकटॉक
हर 8 सेकंड में दिमाग को नया शॉक। तुम सोने जाते हो, 2 घंटे बीत जाते हैं। “शॉर्ट्स ने मेरी नींद चुराई, 30 दिन बाद लौटाई।”
तीसरी ऐप – ट्विटर/X
हर मिनट कोई नफरत, कोई बहस, कोई जजमेंट। तुम बिस्तर पर लेटकर भी गुस्सा महसूस करते हो। “ट्विटर डिलीट किया तो रात को पहली बार शांति से सोया।”
चौथी ऐप – डेटिंग ऐप्स
हर स्वाइप में लगता है “कोई बेहतर मिलेगा”। और जो सामने है, उससे प्यार करना भूल जाते हो। “डेटिंग ऐप्स डिलीट कीं तो पहली बार खुद से प्यार हुआ।”
पाँचवी ऐप – न्यूज़ ऐप्स
हर नोटिफिकेशन डर, गुस्सा, चिंता। तुम्हारा दिमाग “फाइट और फ्लाइट” मोड में रहता है। “न्यूज़ बंद की तो पहली बार सुबह उठकर मुस्कुराया।”
तुम्हारा दिमाग इन ऐप्स का गुलाम बन चुका है
हर नोटिफिकेशन डोपामाइन रिलीज़ करता है। तुम्हें लगता है “बस एक और वीडियो”। 30 दिन बाद तुम्हारा दिमाग री-सेट हो जाता है। “जो ऐप्स तुम्हें कंट्रोल करती थीं, अब तुम उन्हें कंट्रोल करोगे।”
30 दिन बाद क्या हुआ – असली लोगों की बातें
- नींद 8 घंटे की हो गई
- दोस्तों से बात करने लगा
- किताब पढ़ने लगा
- खुद से प्यार करने लगा
- चेहरा चमकने लगा “30 दिन में मैंने खुद को वापस पा लिया।”
आज रात सिर्फ़ एक काम करो –
फोन उठाओ। ये 5 ऐप्स खोलो। ऑफलोड/डिलीट कर दो। फिर खुद को गले लगाओ और बोलो – “30 दिन। सिर्फ़ 30 दिन। मैं खुद से प्यार करने जा रहा हूँ।”



